_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद(उ.प्र.भारत)के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मुजफ्फरनगर जनपद के बुढ़ाना कस्बे में कई ऐसे मंदिर हैं जिनसे चमत्कृत करने वाली गाथाएं जुड़ी हैं।

*** प्राचीन श्री हरनंदेश्वर धाम मां दुर्गा मंदिर –

बुढ़ाना कस्बे में ‘नदी वाला मंदिर’ नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर हिंडन नदी के तट पर स्थित है। बहुत पहले सिद्धपुरुष बाबा हरनंद जी महाराज का आश्रम इस नदी के किनारे स्थित था। इस मंदिर के संबंध में कई कहानियां यहां के बुजुर्ग बताते हैं।

बुढाना कस्बे में रहने वाले पुराने लोग बताते हैं कि इस क्षेत्र से निकलने वाली हिंडन नदी का नाम बाबा हरनंद जी के नाम पर ‘हरनंद नदी’कहा जाता था जो समय के साथ विकृत होकर हिण्डन हो गया।

हिण्डन नदी में समय-समय पर आने वाली बाढ़ के कारण पुराना देवी मंदिर व मंदिर का कुआं और उससे जुड़े भवन नदी की बाढ़ में नष्ट हो गए।

सौ वर्ष से भी पहले बुढ़ाना कस्बे के लोगों ने इस पावन धाम का जीर्णोद्धार कराया था।

वर्तमान में यहां आधुनिक एवं परंपरागत वास्तु शिल्पकला का सुंदर मिश्रण विशाल दुर्गा मंदिर व नव दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र हैं। ‌

इस मंदिर की एक और विशेषता यहां स्थापित ब्रह्मा जी की मूर्ति है। बताते हैैं कि पुष्करजी तीर्थ के अलावा ब्रह्मा जी की मूर्ति केवल यहीं पर है।

इस मंदिर हरनंदेश्वर धाम में एक छोटे शिलाखंड पर भगवान शिव का संपूर्ण परिवार तराश कर उत्कीर्ण किया गया है। यहां स्थापित शिवलिंग नर्मदेश्वर भगवान का रूप है। जिसके आधे भाग में भगवान विष्णु आधे भाग में भगवान शंकर का रूप है। प्राचीन सिद्ध पीठ शिव मंदिर, श्रीराम दरबार, श्री राधा कृष्ण, श्री गणपति जी, श्रीसूर्यनारायण, श्री मां गायत्री जी, श्री मां सरस्वती, भक्त मीराबाई, मां दुर्गा जी, नवदुर्गा-‘श्री मां शैलपुत्री श्री मां ब्रह्मचारिणी श्री मां चंद्रघंटा श्री मां कुष्मांडा श्री मां स्कंदमाता श्री मां कात्यायनी श्री मां कालरात्रि श्री मां महागौरी श्री मां सिद्धिदात्री, साक्षात श्री हनुमान जी तथा भैरव देव जी आदि की बहुत ही सुंदर देव प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन सब से इस मंदिर की अलौकिकता अपने आप में देखते ही बनती है।

* नवरात्रों के अवसर पर मां दुर्गा के इस मनोहरी धाम को भव्य तरीके से सजाया जाता है। देवी मां के श्रद्धालु भक्तजन दूर-दूर से इस अद्वितीय एवं चमत्कारी पुण्य स्थान पर आकर माता की पूजा करके प्रसाद चढ़ाते हैं। देवी मां अपने सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

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*** चांदनी वाला मंदिर –

बुढ़ाना नगर के मौहल्ला पछाला व भटवाड़ा के बीच में ऐतिहासिक चांदनी वाला मंदिर स्थित है।

इस प्रसिद्ध मंदिर के विषय में बहुत सी कहानियां यहां के लोग सुनाते हैं। इस मंदिर को चांदनी नाम की महिला ने बनवाया था जिससे इसका नाम चांदनी वाला मंदिर पड़ा।

कहा जाता है कि कई शताब्दी पुराने इस मंदिर का निर्माण बुढाना में स्थित मौ. पट्टी चौधराईन की रहने वाली चांदनी नामक मुस्लिम महिला ने कराया था। मंदिर के शिखर के कलश पर उसके द्वारा लगाया गया चांद सितारा आज भी लगा है।

कुछ अन्य लोगों के अनुसार वर्तमान समय में जिस स्थान पर यह मंदिर स्थित है वहीं पर पुराने समय में एक जमीदारों का कुआं हुआ करता था। उस कुएं का पानी केवल बड़े परिवार के लोग ही पी सकते थे। एक दिन चांदनी नाम की महिला ने इस कुएं का पानी पीने की जिद की जिस पर जमीदारों ने कड़ी आपत्ति जताई।

चांदनी ने अपनी जिद पूरी करने के लिए खाना-पीना छोड़ दिया। 10-12 दिन बीतने के बाद भी जब चांदनी ने कुछ नहीं खाया पिया, तब चांदनी की जिद को पूरा करने के लिए एक और कुआं उसी कुएं के बराबर में बनवाया गया तथा चांदनी ने इस नए कुएं का पानी पीकर अपना अनशन खोला।

बताते हैं कि इस नए कुएं का पानी पीते ही चांदनी ने दम तोड़ दिया। मरने से पहले चांदनी ने लोगों से कहा था कि जो भी इस कुएं का पानी पिएगा उसे कोई बीमारी नहीं होगी।

कहते हैं इसके बाद यहां के लोगों ने कुएं के पास ही एक शिव मंदिर बनवाया जिसका नाम चांदनी वाला मंदिर रखा गया।

किवदंती है कि बाद में बहुत दिनों तक इस कुएं का पानी पीकर लोगों के रोग दूर हो जाते थे लेकिन ठीक तरह से देखभाल न होने के कारण यह कुआं ठप हो गया।

बाद में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करा कर यहां मां दुर्गा का भव्य मंदिर बनवाया गया तथा मां दुर्गा की ही एक मूर्ति मुख्य द्वार के ऊपर लगवाई गई।

चांदनी वाला मंदिर यहां के श्रद्धालु भक्तों के लिए अटूट श्रद्धा का केंद्र है।

* प्रतिवर्ष इस मंदिर पर चैत्र माह की चौदस को भव्य मेले लगता है। यह इस इलाके का सबसे भव्य मेला होता है। इस अवसर पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का ताता लग जाता है। मेले के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन संध्या का भी आयोजन भी किया जाता है।

मंदिर में स्थापित देवी प्रतिमा को करिश्माई देवी बताया जाता है। इस संबंध में कहते हैं कि सैकड़ों वर्ष पूर्व मां दुर्गा का मेला मंदिर के सामने के ही मैदान में नहीं लगा कर कुछ दूर हटकर मौहल्ला पछाला में एक स्थान पर मेले को लगाया गया था। इससे देवी मां नाराज हो गई और उन्होंने उस समय के मंदिर के पुजारी के सपने में आकर कहा कि मुझे मेला देखने के लिए अपनी गर्दन को घुमाना पड़ता है। मेले को उस स्थान से हटाकर फिर से मंदिर के सामने ही लगवाओ। मान्यता है कि उसके बाद से ही मां दुर्गा की प्रतिमा का मुंह दाहिनी ओर की तरफ घूमा हुआ है। कस्बे के निवासियों की मान्यता है कि मां दुर्गा का जो भी श्रद्धालु भक्त सच्चे मन और भक्ति भाव से देवी की आराधना करता है। देवी मां उसको दर्शन देकर उसकी हर कामना को पूरी करती हैं।

— चांदनी वाला मंदिर के परिसर में ही एक चरण मंदिर बना हुआ है। इस चरण मंदिर का प्रसाद केवल चख लेने मात्र से पशुओं की बीमारी तुरंत दूर हो जाती है। इस संबंध में बताया जाता है कि जब चांदनी वाला मंदिर का निर्माण पूरा हो गया था तो उसके बाद यहां एक महात्मा जी ने आकर अपना डेरा जमा लिया था और वे यहीं रहने लगे रहे थे।

उन्होंने अपने अंतिम समय में प्राण त्यागने से पहले लोगों से कहा था कि वे उनकी समाधि इसी मंदिर के परिसर में बनाएंगे तो इस इलाके में टिड्डीदल नहीं आएगा। उस जमाने में हर साल टिड्डियों के दल के दल इस इलाके में आते थे और फसलों को नष्ट कर देते थे। कहते हैं कि उन महात्मा की समाधि बनने के बाद फिर कभी इस इलाके में टिड्डी दल नहीं आया और न ही फिर फसलें नष्ट हुई।

चरण मंदिर ऑन महात्मा जी की ही समाधि है। जिसके ऊपर महात्मा के चरणों के निशान बने हैं। जिन पर पानी डालकर वापस ले जाकर बीमार पशुओं को पिलाने से पशुपालकों के पशु तुरंत ठीक हो जाते हैं।

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