__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.भारत)के १००कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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यमुना नदी उत्तर प्रदेश और हरियाणा को प्राकृतिक रूप से अलग करती है। अंग्रेजों के जमाने में यमुना नदी के बहाव को नियंत्रण में करने के लिए सन 1873 में 91 फीट ऊंचा और 360 मीटर लंबा इंजीनियरिंग का कमाल ताजे वाला बैराज बनकर तैयार हुआ था। यह अपने आप में एक अलग तरह की जगह थी।

हथिनी कुंड बैराज बनने से पहले यहीं से यमुना नदी के बहाव को कंट्रोल किया जाता था। हरियाणा के जनपद यमुनानगर में ताजेवाला नामक स्थान पर बने होने से इसका नाम ताजेवाला हेडवर्क्स पड़ा था।

उस समय यहीं से हरियाणा की पश्चिमी यमुना लिंक नहर और उत्तर प्रदेश की पूर्वी यमुना लिंक नहर निकलती थी।

ताजे वाला में पहले यमुना नदी पर हरियाणा और उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला पुल बना हुआ था। उस समय दोनों प्रदेशों को जोड़ने वाला मेन रास्ता यही था।

इस स्थान पर यमुना नदी में धुआंधार अवैध खनन होता है। अवैध खनन करने वालों ने पुल के पास से भी अवैध खनन किया जिससे यमुना नदी पर बने पुल के पिलर कमजोर हो गए और सन 2010 में यह पुल टूट गया अब उसके मात्र अवशेष बचे हुए हैं। दोनों प्रदेशों को जोड़ने वाला पुल टूटने से अब ताजेवाला कस्बा भी उतना आवाज नहीं रहा।

हथिनी कुंड बैराज बनने से पहले कभी यह इलाका यहां पर काम करने वाले लोगों और इस स्थान पर घूमने आने वाले लोगों की चहल-पहल से भरा रहता था।

लेकिन अब सब यहां वीरान पड़ा हुआ है। उस समय के बने हुए बंगले व अन्य इमारतें सब बंद और वीरान पड़े हैं।

प्रकृति ने अपनी सुंदरता इस स्थान पर दोनों हाथों से लुटाई है।

ताजे वाला हैड वर्क्स से हथिनी कुंड बैराज तक का तीन कि.मी. रास्ता कभी न भूलने वाला सफर होता है। इस रास्ते के सफर में लोग तो कम ही मिलते हैं लेकिन इंजीनियरिंग के बेजोड़ नमूने जगह-जगह देखने को मिल जाते हैं। हथिनी कुंड बैराज से ताजेवाला के बीच पश्चिमी यमुना लिंक नहर वह जगह है जहां पर बिजली बनाई जाती है और उसके सामने ही एक बड़ा बिजलीघर स्थित है।

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