बिजनौर जनपद में ताजपुर वह स्थान है जहां बिजनौर की रियासतों और पिंडारियों के बीच घमासान युद्ध हुआ था। माधवगढ़ में भारी तबाही मचाने वाला आमिर पिंडारी बिजनौर के स्थानीय राजाओं और अंग्रेजो के चक्रव्यूह में ऐसा फंसा था कि उसे अपने भारी भरकम हथियारों का जखीरा यहीं छोड़कर भागना पड़ा था। अगस्त सन 1805 में  भारी भरकम हथियारों से लैस अपने लड़ाकों के साथ आमिर पिंडारी ने पहले यमुना को पार किया और उसके बाद गंगा यमुना के दोआब  में मेरठ से परीक्षितगढ़ होते हुए उसने अपने दलबल के साथ गंगा को पार करके बिजनौर पर धावा बोल दिया ।यहां से वह ताजपुर पहुंचा लेकिन  यहां के स्थानीय राजाओं और  अंग्रेज अधिकारी जनरल स्मिथ के बिछाए  हुए चक्रव्यूह  के कारण वह वापस मुड़कर शेरकोट, धामपुर एवं नगीना आया अंत में उसने फिर से ताजपुर पर हमला किया। लेकिन आमिर पिंडारी और उसका दल यहां के राजाओं और जनरल स्मिथ के बिछाए हुए चक्रव्यूह में फंसता ही चला गया। यहां पर भयंकर युद्ध हुआ। लेकिन आमिर पिंडारी और उसकी टुकड़ी अपने भारी भरकम खतरनाक हथियारों को अन्य सामान केेेे साथ  यहीं पर छोड़ कर रेहड़ और ठाकुरद्वारा होते हुए भागने में सफल हो गई।

आमिर पिंडारी और उसका दल जो खतरनाक हथियार और अन्य सामान यहां छोड़कर भागे  थे।  उस सारे सामान को एक सुरंग में रखवा दिया गया था। वह सुरंग आज भी उस सारे  दफन सामान के साथ ताजपुर के मुख्य बाजार में स्थित है। बाद में किसी समय उस सुरंग के मुहाने को बंद करके दीवार बनवा दी गई

इस युद्ध में पिंडारियों का मुकाबला करने से अंग्रेज कंपनी सरकार ने किड्ढा सिंह को गोपालपुर की एस्टेट दे दी थी। किड्ढा सिंह पिंडारियों से मुकाबला करके राजा बन गए थे।

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