___________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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स्वर्गाश्रम
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यह स्थान ऋषिकेश से 5 किमी दूर स्थित है। मुनी की रेती नामक स्थान पर राम झूला पुल से गंगा जी को पार करके मणीकूट पर्वत की तलहटी में पावन गंगा के पूर्वी किनारे पर एक पतली संकरी सी पट्टी स्वर्गाश्रम कहलाती है। स्वर्गाश्रम में शांति के साथ प्रकृति तथा अध्यात्म को निकटता से अनुभव किया जा सकता है।

इस स्थल की अलौकिक एवं प्राकृतिक छटा को देख कर अनायास ही नैसर्गिक आनंद का आभास होने लगता है। चारों ओर सघन वनों से घिरे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण हरीतिमा का आवरण ओढ़े शिवालिक पर्वत की पहाड़ियों का मनोमुग्धकारी दृश्य बड़ा ही लुभावना लगता है।

इस आश्रम को प्रसिद्ध संत विशुद्धानंद जी के सम्मान में बनवाया गया था। जो बाबा काली कमली वाले के नाम से जग प्रसिद्ध थे।

इस समय स्वर्गाश्रम में कई विश्व प्रसिद्ध आश्रम स्थित हैं। गीता प्रेस – गोरखपुर का ‘गीता भवन’ आश्रम, परमार्थ निकेतन, वेद निकेतन जैसे विशाल एवं प्रसिद्ध आश्रम हैं। इनके अलावा कई विभिन्न छोटे-छोटे आश्रम है। जिनमें देश और विदेश से हजारों श्रद्धालु तीर्थयात्री एवं पर्यटक आते हैं। किसी न किसी आश्रम में धार्मिक प्रवचनों का आयोजन होता रहता है। संध्या के समय स्वर्गाश्रम में भव्य गंगा आरती का आयोजन होता है। यहां की गंगा आरती स्वयं में विशिष्ट है।

यहां स्टोर, पार्क, चाय-कॉफी की दुकान, धर्म और अध्यात्म से संबंधित वस्तुओं एवं पुस्तकों की दुकान, पूजा- पाठ से संबंधित सामानों की दुकान, अन्य दुकानें, आयुर्वेदिक दवाखाना, पुस्तकालय, ध्यान केंद्र, होटल और रेस्तरां हैं।

स्वर्गाश्रम हर प्रकार के पर्यटन के लिए विकसित हो चुका है। यहां से साहसिक पर्यटन की गतिविधियों का संचालन होता है विशेषकर रिवर राफ्टिंग के लिए हजारों साहसिक पर्यटक यहां आते हैं।

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