________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र-भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मुजफ्फरनगर जनपद के पुरकाजी कस्बे में उत्तर प्रदेश उत्तराखंड की सीमा के निकट नेशनल हाईवे 58 के किनारे सूली वाला बाग व तालाब सन 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शहादत का साक्षी है।

यहां अंग्रेजों के राज के जुल्मों की दास्तान दबी पड़ी है। यह वह जगह है जहां अंग्रेजी हुक्मरानों ने अनेकों देश भक्तों को तालाब के किनारे के पेड़ों पर फांसी पर लटका दिया था।

उस समय हुए कत्लेआम के गवाह बने पेड़ आज भी यहां मौजूद हैं।

सन 1857 में अंग्रेजों के राज से अपने देश को मुक्त कराने के लिए मेरठ से उठी क्रांति की ज्वालाएं मुजफ्फरनगर तक भी पहुंच चुकी थी। बताया जाता है कि 29 मई 1857 के दिन उस समय के यहां के कलक्टर मिस्टर वरफोर्ड की हत्या क्रांतिवीरों ने कर दी थी, इसके बाद अंग्रेजों ने यहां 1 जुलाई को मिस्टर एडवर्ड को मुजफ्फरनगर का नया कलेक्टर बनाकर भेजा। उसने क्रांतिवीरों को रोकने के लिए सेना को बुला लिया।

मेजर विलियम की कमान में आई सेना ने इस जनपद के लोगों पर बेरहमी से अत्याचार करने की सारी सीमाओं को तोड़ दिया। सैकड़ों बेगुनाह लोगों को यहां के पेड़ों पर लटका कर फांसी पर चढ़ा दिया था। क्षेत्र के 51 वर्षीय शोभाराम त्यागी को अंग्रेजों ने जमीन में गाड़ दिया था और मुनादी करा कर कुत्तों से फड़वा दिया था। तभी से पुरकाजी के इस स्थान का नाम सूली वाला बाग पड़ गया।

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