_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत) के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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सिद्ध बाबा की समाधि – फहीमपुर खुर्द गांव

मुजफ्फरनगर जनपद में खतौली कस्बे से 6 कि.मी.दूर जसौला मार्ग पर फहीमपुर खुर्द गांव के पश्चिमी सिरे पर
व सिखेड़ा गांव के पूरब में अशोक के वृक्षों की घनी छाया के बीच एकांत स्थान पर सिद्ध बाबा दूधाधारी की भव्य समाधि स्थित है। श्रद्धालु यहां आकर इस स्थान की रमणिकता से अपने तमाम झंझटों से मुक्ति का अनुभव करता है। यह समाधि क्षेत्र का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। सिद्ध बाबा दूधाधारी की समाधि चमत्कारिक मानी जाती है।

बाबा के चमत्कारों के सैकड़ों किस्से ग्रामीणों के द्वारा बताए जाते हैं। सिद्ध बाबा ने यहां सैकड़ों वर्षों पूर्व तप किया था तथा ग्रामीणों के अनुसार बाद में बाबा धरती में समा गए थे। (बाबा की सहारनपुर जनपद के सुन्ना मोरा गांव में भी समाधि है। जहां बाय का इलाज किया जाता है।)

इस समाधि का आसपास के गांवों में बड़ा महत्व है और समाधि के प्रति इस क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

सिद्ध बाबा का प्रसाद यहां के धूने की विभूति है, जो यहां सैकड़ों वर्षों से चेतन है। यहां के ग्रामीणों की मान्यता है कि उनके परिवार के साथ साथ उनके पशुधन पर भी पूरे वर्ष भर बाबा की विशेष कृपा रहती है। बाबा सब प्रकार से उनकी रक्षा करते हैं। यहां के लोग मानते हैं कि बाबा की कृपाओं का बखान नहीं किया जा सकता और वह औघड़दानी भगवान शिव के ही एक रूप हैं।

* दूर-दूर तक प्रसिद्ध है फहीमपुर खुर्द गांव की होली –

सिद्ध बाबा की समाधि पर वैसे तो पूरे वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है परंतु होली के पर्व पर इस समाधि की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इस गांव में मनाया जाने वाला होली का पर्व दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। होली के अवसर पर यहां पूजा-पाठ का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जिसकी बहुत पहले से जोर-शोर से तैयारियां की जाती हैं।

दुल्हेंडी वाले दिन प्रातः गांव के किसानों एवं ग्रामीणों के जितने भी पालतू पशु दूध देते हैं, वह सब दूध बाबा की समाधि पर चढ़ाया जाता है। कोई भी ग्रामीण एक भी बूंद दूध अपने घर नहीं रखता है।

इस अवसर पर पूरे गांव का दूध बाबा की समाधि पर चढ़ाया जाता है। दूध निकालने के बाद उस दूध को जमीन पर नहीं रखा जाता है तथा सीधे बाबा को ही दूध चढ़ाया जाता है। इस अनोखी परंपरा का गांव वाले पूरी श्रद्धा के साथ पालन करते हैं।

सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार इस दिन गांव के लोग सिद्ध बाबा दूधाधारी की समाधि पर जाकर अपने घर का सारा दूध अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वर्षभर बाबा उनके पालतू पशु सुरक्षित रखते हैं। सदियों से चली आ रही इस परंपरा का आज भी पूरी श्रद्धा से पालन किया जाता है। पूर्वजों से चली आ रही इस परंपरा को लेकर गांव वालों का कहना है कि ऐसा करने से उन्हें सिद्ध बाबा की कृपा प्राप्त होती है तथा वे साल भर संकटों से बचे रहते हैं।

केवल फहीमपुर खुर्द गांव के लोग ही नहीं यहां के आसपास के गांव सिखेड़ा, पिपलहेड़ा, जसौला, मोचड़ी, शाहपुर आदि के ग्रामीण भी सिद्ध बाबा की समाधि पर दूध चढ़ाने के लिए आते हैं। रंग खेलने से पहले फहीमपुर के सभी ग्रामीण और आसपास के गांवों के लोग भी सिद्ध बाबा की समाधि पर पहुंचकर वहां शीश नवाते हैं और समाधि पर दूध अर्पित करते हैं। दुल्हेंडी वाले दिन यहां समाधि पर मेला सा लग जाता है।

इस क्षेत्र के लोगों का मानना है कि दुल्हेंडी के दिन सिद्ध बाबा दूधाधारी की समाधि पर दूध चढ़ाने से गांव में सुख समृद्धि आती है। ग्रामीणों द्वारा समाधि पर अर्पित किए हुए दूध को बाद में दूधिया बनाकर प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाता है।

पूरे साल बाबा की समाधि पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं यहां पर हर रविवार को सिद्ध बाबा की समाधि पर भक्तों का मेला लगता है जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल होती हैं।

* फहीमपुर खुर्द गांव में पहले होलिका दहन की परंपरा भी प्राचीन रूप से निभाई जाती थी। इस गांव में होली पत्थरों की आग से दहन की जाती थी। होली जलाने के लिए यहां पत्थरों को आपस में रगड़ कर उनसे उत्पन्न अग्नि का प्रयोग किया जाता था, लेकिन अब कुछ वर्षों से इस परंपरा को तोड़ दिया गया है।

* अश्विन मास की नवरात्रों की नवमी व विजयदशमी के पर्व के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बाबा सभी की मनोकामना पूर्ण करते हैं, जो भी श्रद्धा पूर्वक शीश नवाता है बाबा प्रसन्न हो जाते हैं। त्योहारों के अवसर पर पूरे दिन समाधि पर भक्तों की भारी भीड़ बनी रहती है।

* प्रतिवर्ष देवोत्थान एकादशी के अवसर पर यहां पर हवन और भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर कई गांवों के हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

* बाबा की समाधि पर रामनवमी पर दो दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। यहां नवरात्र पर्व पर भी पूजा अर्चना का विशेष महत्व बताया जाता है मान्यता है कि नवरात्र में यहां पूजा-अर्चना करने से उनकी सभी मनोकामनाएं को बाबा व दुर्गा माता अवश्य पूरा करती हैं

* बाबा की समाधि स्थल पर अपनी मनोकामना पूरी होने पर उत्तराखंड के एक बड़े बिल्डर्स ने एक भवन मंदिर का निर्माण करवाया था। उस समय पूरे विधि विधान से दुर्गा माता की प्रतिमा को स्थापित किया गया था।

सिद्ध बाबा की समाधि चमत्कारों के लिए मानी जाती है। सिद्धबाबा के भक्तों की संख्या बहुत बड़ी है जिनमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जैसे लोग भी शामिल हैं। चुनावों में जीत हासिल करने के लिए नेता लोग भी बाबा के दरबार में आकर हाजिरी लगाते हैं और उन्हें प्रसन्न करने के प्रयास में लगे रहते हैं। वे चुनाव में जीत की मन्नतें मांगने़ में भी पीछे नहीं रहते।

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