____________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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इस क्षेत्र के कई जनपदों में प्रतिवर्ष श्रीराम डोल की शोभायात्रा निकाली जाती है।

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बिजनौर जनपद

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नगीना  –  (बिजनौर जनपद )   –

नगीना कस्बे की बहुचर्चित रामडोल शोभा यात्रा प्रति वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर बड़ी धूमधाम से निकाली जाती है।इस शोभायात्रा में कई मनोहारी झांकियां, कई सारे अखाड़े, बैंड बाजों के अलावा भगवान श्री कृष्ण का डोला शामिल रहते हैं।

बैंड बाजों के शानदार कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भक्ति रस में डूबी स्वर लहरियों के बीच मां काली के नृत्य की मनोहारी झांकी, राधा कृष्ण का नृत्य, भगवान कृष्ण के बाल रूप, शिव – पार्वती आदि देवी – देवताओं की मनोहारी झांकियों के साथ जुलूस कोतवाली मार्ग से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग 74 से नगर के परंपरागत मार्गों से होता हुआ प्राचीन बड़ा मंदिर मुक्तेश्वर नाथ पहुंचता है। जहां मंदिर के पुजारी पूरे विधि- विधान के साथ अखाड़ों की पूजा अर्चना करा कर सभी अखाड़ों के उस्तादों व खलीफाओं और अखाड़ेबाजों को तिलक लगाकर जुलूस में शामिल करते हैं तथा पूरी विधि – विधान के साथ श्री कृष्ण की पालकी व पोतड़े को विराजमान करते हैं। इसके बाद जुलूस बड़ा मंदिर से आगे बढ़ते हुए सुनहरी मस्जिद, सर्राफा बाजार, बारादरी, जामा मस्जिद, पाधान, सैयदबाड़ा व पहाड़ी दरवाजा होता हुआ रात्रि में बढ़ापुर रोड स्थित श्री कृष्ण गौशाला पहुंचता है।

रामडोल जुलूस को परंपरागत रूप से  शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से भी कड़े सुरक्षा प्रबंध किए जाते हैं।

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अमरोहा जनपद

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अमरोहा  –

शहर में प्रति वर्ष परंपरागत रूप से पूर्ण श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण के बीच शोभा यात्रा निकाली जाती है।

नगर के मौहल्ला कोट स्थित रियासत मंदिर से सुबह के समय महाआरती के बाद शहर में श्रीरामडोल यात्रा का शुभारंभ होता है। इस समय जनपद के बडे अधिकारी और नगर के गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहते हैं। आरती के बाद शोभायात्रा शुरू होने से पहले शहर के विभिन्न मंदिरों से आए डोले इस शोभायात्रा में शामिल होते हैं। शहर के परंपरागत यात्रा मार्गो से निकलती हुई शोभा यात्रा पनवाड़ी क्षेत्र में आकर समाप्त होती है। शोभायात्रा में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहते हैंl इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में झांकियां, बैंड- बाजे और  देश के अलग-अलग स्थानों से आए हुए कलाकार अपनी विविध कलाओं का प्रदर्शन करते हुए चलते हैं। शोभायात्रा का जगह-जगह लोगों द्वारा जलपान करा कर स्वागत किया जाता है

अमरोहा की सांस्कृतिक धरोहर इस शोभायात्रा का जगह-जगह सभी धर्म के लोगों के द्वारा स्वागत किया जाता है, साथ ही इसमें सक्रिय भागीदारी कर अमरोहा के सद्भाव को भी मजबूत किया जाता है।

शोभा यात्रा को देखने के लिए पूरे शहर में लोगों का तांता लगा रहता है और पूरा ही दिन नगर का वातावरण कृष्णमय हो जाता है। इसी श्रद्धा और सौहार्दपूर्ण वातावरण में भारी सुरक्षा के बीच शोभा यात्रा का आधी रात के करीब समापन होता हैl

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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