________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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श्री गंगा आरती – हर की पैड़ी – हरिद्वार

हर की पैड़ी पर गंगाजी की भव्य आरती का नयनाभिराम दृश्य सुविख्यात है।

मान्यता है कि कठिन तपस्या के बाद राजा भगीरथ जब गंगा जी को धरती पर लाए तब वे शंख बजाते हुए आगे चले और गंगा जी उनके पीछे-पीछे बहती हुई आगे बढ़ी। पहाड़ों से धरती पर जब गंगा जी उतरी तब पहला तीर्थ हरिद्वार पड़ा था। यहीं पर राजा भगीरथ ने गंगा जी की पहली आरती उतारी थी। माना जाता है तब से गंगा जी की आरती की परंपरा निरंतर चली आ रही है।

सन 1916 में गंगा जी के लिए चलाए गए लंबे आंदोलन के बाद महामना मालवीय जी ने तीर्थ पुरोहितों को साथ लेकर गंगा माता की भव्य आरती उतारी थी। हरिद्वार में हर की पैड़ी पर गंगा आरती को जो नया रूप मिला है, वह उन्हीं की देन है। हर की पैड़ी की प्रबंधकारिणी संस्था गंगा सभा ने श्री गंगा जी की आरती को और भी आकर्षक और भव्य रूप दिया है।

हर की पैड़ी पर हर दिन गंगा जी की आरती प्रातः काल और दोपहर के समय भी होती है लेकिन संध्याकालीन गंगा जी की आरती की शोभा देखते ही बनती है।

घंटे – घड़ियालों और शंखध्वनियों के बीच हर एक मंदिर में और घाटों पर पुजारियों के हाथों की आरतियों में ऊंची-ऊंची उठती ज्वालाएं। गंगा मैया का जयघोष। सब कुछ मिलकर एक अद्भुत दृश्य बन जाता है।

आरती के पश्चात बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा जी की तीव्र धारा में दीपदान करते हैं। गंगा जी के जल प्रवाह में बहते प्रकाश बिंदुओं की टिमटिमाती कतारों से गंगा जी में आकाशगंगा जैसा दृश्य बन जाता है।

फूलों के दोनों में श्रद्धालु भक्तों की आराधना व मनोकामनाओं के दीप। फूलों के दोनों में जलते नन्हें-नन्हें दीप गंगा जी में दूर तक झिलमिलाते हुए चले जाते हैं।

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