____________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के१०० किमी के दायरे गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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दिल्ली – नरोरा हाईवे पर जनपद मुख्यालय बुलंदशहर से 22 किलोमीटर दूर शिकारपुर नगर स्थित है।

शिकारपुर अपनी अनोखी विशेषता के लिए मशहूर है।

 

इस कस्बे के बाहर हजारों वर्ष पुरानी अजीब और अधूरी सी एक इमारत है। इमारत में केवल दरवाजे और खंबे ही बने हैं।   शिकारपुर के बारहखंबे के नाम से प्रसिद्ध इस इमारत में बारह दरवाजे और सोलह खंभे हैं। लाल पत्थर से बनी इमारत में पत्थरों को जोडने के लिए कहीं भी चूने या अन्य मसाले का प्रयोग नहीं किया गया है। इस बारहखंबा इमारत की विशेषता है कि पत्थरों को एक के ऊपर एक इस प्रकार से रखा गया है  कि ये गिर नहीं सकते। भूकंप, आंधी- तूफान में भी यह खंबे स्थिर रहते हैं।

मान्यता है कि इस इमारत का निर्माण एक ही रात में जिन्नातों ने किया था।

कई बार लोगों ने इस इमारत पर छत बनाने की कोशिश भी की लेकिन छत नहीं बन पाई। जब भी छत का निर्माण हुआ छत अपने आप गिर गई। कई बार तो बताया जाता है कि बनाते बनाते ही छत गिर जाती  और बनाने वाले भी गायब हो जाते। इस प्रकार का प्रयास करने वाले कुछ लोगों पर ऊपरी हवा या जिन्नातों का कहर भी टूटा, बताते हैं जिन्नातों से माफी मांगने के बाद ही उन कारीगर लोगों की हालत सही हो पाई।

आज भी इस बारहखंबा इमारत का रहस्य एक रहस्य ही बना हुआ है।

बारहखंभा इमारत में 16 खंबे है लेकिन ‘खन’ 12 हैं। उर्दू भाषा का शब्द है खन, हिंदी में इसका अर्थ दरवाजा होता है। इस इमारत में 12 दरवाजे हैं। जिधर से भी देखें इस इमारत में 12 दरवाजे ही दिखाई देते हैं।

यहां के रहने वाले मानते हैं  कि  लगभग एक हजार साल पहले एक रात जिन्नातों ने यहां आकर इस इमारत को बनाना शुरू किया था। जब तक जिन्नात इसका निर्माण पूरा करते उन्हें एहसास हुआ कि कहीं से चक्की चलने की आवाज आ रही है। उन्हें लोगों के जागने का आभास हुआ, उन्हें लगा कि अब सुबह होने वाली है। जिन्नात इस इमारत के निर्माण को बीच में अधूरा ही छोड़ कर वहां से चले गए। तब से इस इमारत का निर्माण अधूरा ही पड़ा हुआ है। यहां के लोग यह भी बताते हैं कि जिस महिला ने चक्की चलाई थी, जिन्नातों ने उस महिला को यहां लाकर जिंदा ही दफन कर दिया था।

यह भी कहा जाता है कि जिन्नातों ने जिस महिला को यहां लाकर दफन किया था | उस महिला की कब्र से जिन्नातों के मंदिर तक रास्ता जाता है। ऐसी मान्यता भी है कि एक रात यह कब्र अचानक अपने स्थान से हट गई। जब लोगों ने इसके पास जाकर देखा तो उन्हें यहां एक रास्ता जमीन के नीचे जाता हुआ दिखाई दिया। कुछ लोगों ने हिम्मत दिखाकर इसकी सच्चाई जानने के लिए  नीचे जाने की कोशिश की तो वह लोग लापता हो गए और कब्र का रास्ता एक दिन अचानक से बंद हो गया।

 

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