_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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हनुमान टीला मंदिर – शामली

शामली नगर प्राचीन काल से ही धर्म और आस्था का केंद्र रहा है। भगवान श्री कृष्ण के श्याम नाम से ही इसका नाम शामली है।

किवदंती है हस्तिनापुर से युद्धभूमि कुरुक्षेत्र में जाते हुए भगवान श्री कृष्ण इस मार्ग से गुजरे थे और यहां के हनुमान धाम पर बरने के पेड़ों से घिरे शांत एवं छायादार स्थान पर कुछ समय विश्राम कर मीठे जल के पुराने कुएं से पानी पीकर अपनी प्यास को शांत किया था। भगवान श्री कृष्ण के पावन चरणों से यह भूमि धन्य हुई है।

नगर के बीचोंबीच स्थित श्री मंदिर हनुमान टीला धाम एक अतिप्राचीन सिद्धपीठ एवं प्रसिद्ध मंदिर है। चित्ताकर्षक हरियाली तथा स्वच्छ सरोवर के निर्मल जल से घिरे मंदिर स्थल पर आते ही दर्शनार्थी प्रफुल्लित हो उठता है। अपने अनोखे विहंगम दृश्य के कारण पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मंदिरों में इस मंदिर का अपना एक विशेष स्थान है। इस पावन स्थान के बारे में प्रचलित है कि जो भी सच्चे मन से इस पावन धाम की शरण में आता है उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

इस मंदिर में स्थित बाबा धर्मदास की समाधि यहां आने वाले हर श्रद्धालु को अपना जीवन धर्ममय बनाने की प्रेरणा देती है। सिद्ध पुरुष बाबा धर्मदास ने निरंतर दो माह तक खड़ी तपस्या करके मोक्ष प्राप्त किया था।

प्रचलित है कि वर्ष १८६३ में रामसनेही रामानुयायी संत शिरोमणि बाबा धर्मदास ने इसी स्थान पर बैठकर कठोर तपस्या की थी और उन्होंने साक्षात दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया था तब से ही इस भूमि को हनुमान सिद्ध पीठ का नाम दिया गया।

बताया जाता है कि उस समय इस भूमि पर तीन विशालकाय मिट्टी के टीले थे। हनुमान जी का एक छोटा सा मंदिर एक टीले पर स्थित था। जिसमें हनुमान जी की एक छोटी सी प्रतिमा विराजमान थी वह प्रतिमा आज भी उसी स्थान पर विराजमान है।

उस समय यहां पर तालाब के साथ मनकामेश्वर महादेव का मंदिर भी था। तालाब में उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई थी और यहां हर समय सर्पों का वास रहता था। तालाब के पास ही बाबा धर्मदास की कुटिया थी। बाबा धर्मदास के साथ कई संत महात्मा रहते थे और उनसे धर्म की शिक्षा प्राप्त करते थे।

इस स्थान के बारे में बाबा धर्मदास जी कहते थे कि यह एक चमत्कारिक भूमि हैं। यदा-कदा बाबा बजरंगबली यहां आते रहते हैं। धर्मदास जी यह भी कहते थे बाबा बजरंग बली की कृपा से एक समय ऐसा आएगा कि यह पूरा क्षेत्र मंदिर शिखरों से घिरा नजर आएगा। समयानुसार धर्मदास जी के कथन सत्य हुए।

सन 1970 से पहले तक इस पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्थल की दशा बेहद खराब थी। सारा स्थान ऊबड़-खाबड़ एंव झाड़ – खंखाड़ से भरा हुआ था। ऊंचे टीले पर स्थित छोटे से मराठा कालीन मंदिर की स्थिति भी बहुत जीर्ण – शीर्ण थी। नगर के कुछ उत्साही युवकों ने इस देवभूमि के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। मंदिर का जीर्णोद्धार कर इस स्थान को भव्य रूप दिया गया। जिसके फलस्वरूप आज यह अपने पूर्ण वैभव को प्राप्त है।

सिद्ध पीठ हनुमान जी का मंदिर एक ऊंचे टीले पर बना हुआ है। बजरंगबली का ११० फुट ऊंचा मंदिर तथा उसमें विराजमान पवनसुत की ७ फुट ऊंची प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र है। इसी मंदिर के एक कक्ष में हनुमान जी की प्राचीन प्रतिमा है।

यहां स्थित तालाब की हालत भी खराब थी सफाई करके व सीढ़ियां बनाकर उसको सुंदर रूप दिया गया। तालाब के बीच में बनी भगवान शंकर की मनोहर प्रतिमा हर किसी को अपनी और आकर्षित करती है।

हनुमान धाम में अनेक देवी-देवताओं के मंदिरों की श्रंखला है। इनमें हनुमान जी के साथ मां अंजना है तो गणेश जी की उंगली पकड़े मां पार्वती हैं संतोषी माता, दुर्गा देवी और सिद्धीदाता गणेश जी भी यहां विराजमान है।

इस देवभूमि में भगवान गणपति, सिद्धिदात्री मां दुर्गा देवी, मनकामेश्वर महादेव,भगवान सत्यनारायण, श्री राधा कृष्ण, संतोषी माता, श्री लक्ष्मी नारायण, जी राम दरबार, देवी सरस्वती जी, माता राजराजेश्वरी, मां गायत्री(तीनों रूप में), भगवान जगन्नाथ मंदिर, त्रिपुर सुंदरी मां भगवती, भगवान परशुराम, झुंझुनू वाली दादी मां, भगवान विश्वकर्मा, भगवान विट्ठल संत नामदेव‌ जी, श्री शनिदेव मंदिर आदि की भव्य एवं दिव्य प्रतिमाएं एक ही पंक्ति में स्थित अलग अलग मंदिरों में विराजमान है।

श्री बाबा ब्रह्मा जी की कुटिया जाहरवीर एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का शहीद स्मारक भी यहां स्थित है।

१८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिवीरों ने अंग्रेजों के कंपनी साम्राज्य के विरुद्ध शामली के मोहल्ला बनखंडी स्थित तहसील को जलाकर अंग्रेजी सेना से मुकाबला करते हुए स्वतंत्रता की ज्योति को जलाकर बाबा बजरंगबली के धाम से ही अपने आप को देश पर बलिदान पर शामली का नाम इतिहास के पन्नों में अंकित करा दिया।

शामली स्थित हनुमान टीला धार्मिक इतिहास में एक विशेष स्थान रखता है। इस चमत्कारिक देवभूमि के जीर्णोद्धार के शुरू होने के पहले हीं वर्षों से इस स्थान पर शंकराचार्यों, विभिन्न स्थानों के मठाधीश व अनेक दंडी स्वामियों का यहां आना शुरू हो गया था।

हनुमान धाम पर सनातन धर्म के श्रृंगेरी पीठ, द्वारका पीठ, कांची कामकोटि पीठ और ज्योतिर्मठ पीठ चारों पीठ के शंकराचार्य एक साथ एकत्र हो चुके हैं।

यह भी बाबा बजरंगबली का अद्भुत चमत्कार है कि इस देवभूमि पर आकर कोई भी श्रद्धालु कभी निराश नहीं लौटा है।

यहां हनुमान धाम पर भारत के चार पूर्व प्रधानमंत्री आकर पूजा अर्चना कर चुके हैं। सबसे पहले यहां लालबहादुर शास्त्री जी आए और उसके बाद इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह और राजीव गांधी ने भी यहां आकर पूजा अर्चना की थी।

देश के अनेक राजनेता, विदेशी राजदूत, मंत्री, लेखक, पत्रकार एवं अनेक प्रमुख हस्तियां इस धाम के दर्शन कर अपने को कृतार्थ कर चुके हैं।

हनुमान धाम पर हर मंगलवार को यहां मेला सा लगा रहता है। इस दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ यहां दर्शन करने के लिए आती है।

हनुमान धाम पर पूरे वर्ष समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है।

** श्री हनुमान जयंती पर्व

हनुमान टीला पर श्री हनुमान जयंती का पर्व हर्षोल्लास एवं भक्ति भावना से मनाया जाता है। इस अवसर पर बाबा बजरंगबली के मंदिर को फूलों व रंगीन रोशनी से आकर्षक रूप से सजाया जाता है।

बाबा बजरंगबली का अलौकिक श्रृंगार कर विशेष पूजा अर्चना करके बाबा को छप्पन भोग लगाया जाता है। भजन गायक बाबा बजरंगबली का गुणगान करते हैं। श्रीरामचरितमानस से सुंदरकांड का पाठ का आयोजन होता है। बाबा बजरंग बली की महाआरती की जाती है और श्रद्धालु भक्तों को प्रसाद का वितरण होता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।

** बूढाबाबा मेला – (पड़वा मेला)

हनुमान टीला मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष चैत्र प्रतिपदा के अवसर पर बूढे बाबा (ब्रह्मा जी) के तीन दिवसीय मेले का धूमधाम से आयोजन किया जाता है। शताब्दियों से मंदिर हनुमान टीला पर चैत्र नव संवत्सर की पड़वा को यह मेला शुरू होता है। मान्यता है कि श्री ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना इसी दिन की थी।

तीन दिवसीय मेले के दौरान संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। श्रद्धालु बूढ़े बाबा को गुड आटे का भोग लगाते हैं और बूढ़े बाबा स्थल पर प्रसाद चढ़ाकर अपने घर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

** सिद्धपीठ मनकामेश्वर मंदिर

हनुमान टीला मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ मनकामेश्वर महादेव मंदिर पर महाशिवरात्रि पर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

** मां दुर्गा देवी जगदंबा का वार्षिकोत्सव

मंदिर हनुमान धाम पर मां दुर्गा देवी जगदंबा का वार्षिकोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर शहर के हलवाइयों द्वारा कढ़ाई का आयोजन किया जाता है। भजन गायक माता का गुणगान करते हैं। महाआरती के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है। इस आयोजन में स्थानीय और आसपास के श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग ले कर धर्म लाभ उठाते हैं।

** दादी झुंझनू वाली का वार्षिकोत्सव

हनुमान टीला मंदिर पर प्रतिवर्ष दादी झुंझनू वाली का वार्षिकोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में महाशिवरात्रि के अवसर पर हरियाणा के बागेश्वर महादेव एवं अन्य विभिन्न शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए पैदल कावड़ में गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़ियों के लिए यहां विशाल कांवड़ सेवा शिविर लगाया जाता है। जिसमें जलपान, भोजन, दूध चाय, फलाहार, विश्राम एवं चिकित्सा की निशुल्क व्यवस्था की जाती है। यह कांवड़ सेवा शिविर १० -१२ दिन तक चलता है। लाखों की संख्या में शिवभक्त कांवड़िए इस शिविर का लाभ उठाते हैं।

मंदिरों के अलावा यहां श्री रामलीला मंच, शिवमूर्ति योग साधना आश्रम, धर्मशाला, हनुमान वाचनालय, होम्योपैथिक धर्मार्थ औषधालय, बाल संकीर्तन मंडल, हनुमान शारीरिक गठन केंद्र एवं व्यायाम शाला तथा अन्न क्षेत्र भी स्थित है। जहां गरीब और असहाय एवं साधु-संतों के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था है।

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शामली नगर के चारों कोनों पर चार प्राचीन शिवालय स्थापित हैं।

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