__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद(उ.प्र.भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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पठानों की रियासत रहा मुजफ्फरनगर जनपद का शाहपुर कस्बा अपनी कई खूबियों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है।

शाहपुर की ऐतिहासिक अमचूर की मंडी एशिया भर में प्रसिद्ध रही है। यहां की अमचूर की मंडी की अपनी खास पहचान हुआ करती थी।

यहां का देसी प्रजाति के आम का खट्टा अमचूर बहुत पसंद किया जाता था लेकिन अब देसी आम के पेड़ों के लगभग समाप्त हो जाने के कारण मंडी में अमचूर की आवक समाप्त प्रायः है।

किसी समय इस मंडी से अमचूर जयपुर कोलकाता, जोधपुर, मुंबई,दिल्ली आदि बड़ी मंडियों में भेजा जाता था।

ऐतिहासिक अमचूर मंडी अपनी महत्ता के साथ साथ अस्तित्व भी खोती जा रही है।

यहां के कव्वाल और नवाबों ने दुनिया भर में प्रसिद्धि प्राप्त की है। यहां के ही एहसान भारती घुंघरू वाले के हुनर का लोहा दुनिया मानती थी। रियासती काल में और अब से कुछ दशक पहले तक जब मनोरंजन के आज के जमाने के जैसे आधुनिक साधन नहीं आए थे शाहपुर के नक्काल दुनिया भर में मशहूर थे।

हिंदुस्तान के प्रसिद्ध शायरों में से एक जोक साहब की जन्म स्थली है शाहपुर कस्बा।

यहां का पीतल का काम भी बहुत विख्यात है।

शाहपुर का दरांती कुटीर उद्योग सौ साल से भी अधिक पुराना है। यहां के कारीगरों द्वारा बनाई जाने वाली फसल काटने की दरांती भी बहुत मशहूर है। फसल कटाई के समय यहां की दरांती विभिन्न प्रांतों के काश्तकार किसानों की पहली पसंद होती है। हरियाणा के किसान स्वयं यहां के बाजार में आकर दरांती खरीद कर ले जाते हैं। जबकि अन्य राज्यों को यहां से माल अन्य साधनों से भेजा जाता है। शाहपुर की बनी पिठठी दरांती गन्ने की कटाई में काम आती है। मई के महीने में गेहूं की फसल की कटाई के समय मांग के अनुरूप माल की आपूर्ति करना भी संभव नहीं हो पाता है।

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