___________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १००किमी के दायरे में गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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सहारनपुर नगर गंगा-यमुना के दोआब में बेहद उर्वर भूमि पर स्थित है। इसका इतिहास और संस्कृति बहुत समृद्ध है। प्राचीन काल के इसे सुगना के नाम से संबोधित किया जाता था। चीनी यात्री ह्वेनसांग जब भारत भ्रमण पर आया था। उसने अपने यात्रा विवरण में लिखा है- वह स्थानेश्वर से अंबाला होकर हरिद्वार (स्वर्गद्वार) जा रहा है रास्ते में एक मनोरम स्थान आया है ‘सुगना’।
ह्वेनसांग ने जिस सुगना के बारे में लिखा है वह आज का सहारनपुर है। एडविन टी. स्टसीन्स के अनुसार गंगा यमुना के मध्य में उपजाऊ भूमि भरपूर फसल समृद्ध उदार निवासियों वाला सहारनपुर का प्राचीन नाम सुगना ही है।

वैदिक कालीन सभ्यता के समय यह कुरू प्रदेश तथा बाद में ब्रह्म ऋषि परदेस के अंतर्गत आता था।

सहारनपुर विभिन्न काल खंडों में विभिन्न नामों से जाना जाता रहा है। लेकिन इसका नाम सहारनपुर कैसे पड़ा इसके बारे में बताया जाता है कि सूफी संत शाह हारुन ने बसाया था इसलिए इसका नाम सहारनपुर पड़ा। सहारनपुर नगर के बीचोबीच पीर मोहल्ले में स्थित दो मजारों में से एक मजार इन्हीं सूफी संत शाहे हारून चिश्ती की बताई जाती है और दूसरी जो मजार है वह उनके शागिर्द की है।
कुछ लोग यह भी मानते हैं कि इसे राजा सहारनवीर ने बसाया था और उसी के नाम पर इसका नाम सहारनपुर पड़ा। कौन सा तथ्य सही है और कौन सा गलत इस पर तो इतिहासकारों में भी विवाद है।

इतिहास का चाहे कोई सा भी कालखंड हो सहारनपुर जनपद अति महत्वपूर्ण रहा है धार्मिक और व्यापारिक दृष्टिकोण से भी सहारनपुर का उल्लेख महत्वपूर्ण ढंग से होता रहा है

सहारनपुर भारत के विभिन्न छोरों को जोड़ने वाला स्थान है। सहारनपुर से होकर विभिन्न दिशाओं की ओर रेल और सड़क मार्ग निकलते हैं। सहारनपुर जनपद की सीमाएं उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश से लगती हैं। सहारनपुर से देश के विभिन्न बड़े नगरों के लिए रेलगाड़ियां सुलभ है।

एशिया का सबसे बड़ा डाक तार प्रशिक्षण केंद्र और रिमांड ट्रेनिंग स्कूल केंद्रीय फल शोध संस्थान राजकीय वानस्पतिक उद्यान
सहारनपुर में कास्ट कला का विश्व स्तरीय कार्य होता है यहां का होजरी उद्योग भी महत्वपूर्ण है।

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