_______________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.- भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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*** श्री श्रीधर धाम –

यह मंदिर सप्त सरोवर क्षेत्र में दूधाधारी बर्फानी आश्रम के सामने ऋषिकेश रोड पर ही दक्षिण के प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी का मंदिर स्थित है।

भगवान विष्णु का ही एक नाम श्रीधर है।श्री श्रीधर धाम में राष्ट्र को सुख समृद्धि प्रदान करने वाले भगवान श्रीधर वैंकटेश की भव्य मूर्ति स्थापित है।

इस मठ में संत निवास तथा जाति निवास भी बने हुए हैं जिनमें संत महात्माओं के अलावा आम यात्री भी ठहरते हैं। यहां विद्यार्थियों के लिए पाठशाला तथा गौशाला भी स्थापित है।

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*** भद्रकाली मंदिर –

स्वामी कल्याणानंद जी सरस्वती के द्वारा स्थापित यह एक सिद्ध स्थान है। कहते हैं कि भक्तों को मां भद्रकाली की कृपा एवं अनुग्रह की उपलब्धियां प्राप्त होने का प्रत्यक्ष अनुभव हुआ है।

भद्रकाली मंदिर सप्त सरोवर मार्ग पर कच्छी आश्रम के सामने बांध के पार बिल्कुल गंगा जी के किनारे पर स्थित है।

बताया जाता है कि स्वामी कल्याणानंद जी महाराज गंगा जी के किनारे झोपड़ी बनाकर तप क्या करते थे। एक दिन जब वह गंगा जी में स्नान कर रहे थे, तब डुबकी लगाते समय मां भद्रकाली की मूर्ति उनकी पीठ पर लगी। स्वामी जी ने मूर्ति को गंगा जी से बाहर निकाला और प्रार्थना करने लगे कि मां आप स्वयं प्रकट हुई हैं, तो आगे क्या करना है? मां भद्रकाली के आदेशानुसार स्वामी कल्याणानंद जी ने यहीं भद्रकाली मंदिर के स्थान पर करोड़ों मंत्रों का जप करके यज्ञ किया और पूजा उपासना करके मां भद्रकाली की मूर्ति स्थापित की।

मां भद्रकाली मंदिर की स्थापना के बाद गंगा स्नान के समय ही उन्हें एक अद्भुत शिवलिंग भी प्राप्त हुआ जिसे उन्होंने मंदिर में स्थापित किया। इस शिवलिंग की विशेषता है कि इसके दर्शन करने से यह लगातार बढ़ता ही नजर आता है।

स्वामी कल्याणानंद जी श्री दत्तात्रेय गुरु जी के परम उपासक थे। मंदिर प्रांगण में गूलर के वृक्ष के नीचे गुरु दत्तात्रेय जी का लघु मंदिर बना हुआ है। स्वामी जी गूलर के वृक्ष के नीचे बैठकर ही तप किया करते थे। यहां आने वाले श्रद्धालु इस वृक्ष की १०८ परिक्रमाएं करते हैं।

इस मंदिर में एक सहस्त्र लिंग शिव मूर्ति भी स्थापित है। यह शिवलिंग उत्तर भारत में अपने प्रकार का एक ही है। यात्रियों के स्नान के लिए गंगा तट पर यहां दो सुंदर घाट बने हुए हैं।

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