____________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १००किमी के दायरे में गंगा -यमुुुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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धरती पर बहुत कम ही स्थान ऐसे हैं जहां सभी ऋतुएं होती हैं।
गंगा- यमुना घाटी जिन कई बातो पर गर्व कर सकती है,
उनमें एक ऋतु संपन्नता है।
यहां वसंत का मादक मौसम होता हैं और झुलसाने वाली गर्मी भी। शरद ऋतु भी होती हैं, तो गुनगुनी सर्दी के साथ हड्डियों को भी कंपकपा देने वाला जाडा भी पड़ता है।
मानसून में बादल तो पूरे देश के आसमान पर छा जातें हैं। लेकिन गंगा- यमुना की घाटी में ही वे हिंदमहासागर की तरफ से भी आते हैं और बंगाल की खाड़ी की तरफ से थी।
यह इंतजाम शायद यह सोच कर किया गया है कि एक लंबा रास्ता तय करते हुए बादल इस हृदय देश तक पहुँचते- पहुँचते रीत न जाए। इन्द्र को किसी एक तरफ के बादलों पर भरोसा नही रहा होगा तभी उसने गंगा-यमुना की घाटी की उपजाऊ मिट्टी को सिंचने के लिए और उसकी माहिमामयी नदियों को सदानीरा बनाए रखने के लिए यह दोहरा इंतजाम किया।

* शरद ऋतु –

शरद ऋतु का सौंदर्य श्री का सौंदर्य है, लक्ष्मी का सौंदर्य है। भारतीय संस्कृति में ‘जीवेणः शरद शतम्’की कामना की जाती है कि हम अपने जीवन में सौ शरद ऋतुओं को देखें।

इस क्षेत्र में सितंबर माह के अंतिम दौर में पहुंचते ही शरद ऋतु दस्तक देने लगती है। जाते हुए मानसून की कुछ जगह तेज कुछ जगह हल्की बूंदाबांदी सर्दियों की दस्तक दे देती है। इन दिनों होने वाली बारिश से मौसम का मिजाज एकदम बदल जाता है। अचानक हुए मौसम के बदलाव के बाद ठंडक का आगाज होने लगता है। तापमान में भी काफी गिरावट आ जाती है। सुबह और शाम के समय हवाओं में हल्की सी सिहरन महसूस होने लगती है। ऐसा मौसम शरद ऋतु की दस्तक का संकेत होता है। मौसम में आ रही ठंडक का लोग आनंद लेते हैं। मौसम में आ रही ठंडक लोगों को अच्छी लगती है। इस समय रात खासी ठंडी होती है तो दिन भी बहुत अधिक गरम नहीं रह जाते हैं। धूप का मुकाबला करने के लिए हल्की ठंडी हवाएं होती है। दिन में तेज गर्मी का एहसास गायब हो चुका होता है। हालांकि दिन में कभी-कभी थोड़ी उमस हो जाती है। लेकिन सुबह शाम के समय हवाओं में ठंडक बरकरार रहती है जिससे इस समय गर्मी से राहत मिलने लगती है।

इस समय इस क्षेत्र में गन्ना एवं धान की फसल लहलहा रही होती है। गन्ना और धान की फसल को इस समय सिंचाई की आवश्यकता होती है। इस समय होने वाली हल्की वर्षा फसलों के लिए काफी लाभदायक साबित होती है। लेकिन इस समय हवा नहीं चलनी चाहिए। बारिश के साथ यदि हवा चलती है तो गन्ना एवं धान की फसल गिर जाती है। जिससे फसलों की उत्पादकता पर प्रभाव पड़ता है।

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