__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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समौली गांव –

जनपद मुजफ्फरनगर के खतौली कस्बे के पास रतनपुरी क्षेत्र के समौली गांव में स्थित शिव मंदिर की इस क्षेत्र के सिद्ध शिवालयों में गणना की जाती है।

लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व यहां पर स्थित रेत मिट्टी के टिल्लों के बीच जमीन से एक शिवलिंग प्रकट हुआ था। आस-पास के गांव वालों ने जब सबसे पहले इस शिवलिंग को देखा तो उन्होंने इस शिवलिंग को अपने गांव में स्थापित करने के लिए यहां खुदाई की लेकिन गांव वाले रात भर खुदाई करते रहे लेकिन वह शिवलिंग को जमीन से निकालने में असफल रहे।

गांव के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि वे लोग टिल्ले की की जितनी भी खुदाई करते शिवलिंग उतना ही नीचे धरती की ओर जाता रहा। बाद में थक हार कर वे लोग चले गए। बाद में जब समौली गांव के ग्रामीणों को इस बात की जानकारी हुई तो उन्होंने उस शिवलिंग की पूजा- आराधना शुरू कर दी।

यहां के ग्रामीण यह भी बताते हैं कि उस समय के जमींदार ने इस शिवलिंग को चमत्कारी मानते हुए अपने मंदिर में इसकी स्थापना करनी चाही और इसके लिए उसने हाथी के द्वारा शिवलिंग को निकालने का प्रयास किया लेकिन हाथी भी इस शिवलिंग को हिला तक नहीं सका। उस समय अंग्रेजों को राज का समय था उन्होंने भी इस लिंक को उखाड़ने का प्रयास किया लेकिन वह भी सफल नहीं हो सके।

कुछ दशकों पहले इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया उस समय मंदिर निर्माण करने के लिए चबूतरा बनाने के लिए जितनी मिट्टी का भी भराव किया जाता था यह शिवलिंग स्वयंमेव ही उतना ही ऊपर उठता गया।

इस सिद्ध शिव मंदिर के सामने ही लगभग सौ वर्ष प्राचीन निराले रूप में बना काली माता का मंदिर है। काली माता के इस मंदिर को पीपल के पेड़ चारों तरफ से घेर रखा है। इस मंदिर की भी बहुत मान्यताएं एवं चमत्कार हैं।

प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां तीन दिन का मेला लगता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं कांवड़िए शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

गांव वाले इस चमत्कारी सिद्ध शिवलिंग के सैकड़ों चमत्कार सुनाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से जो कोई श्रद्धालु मांगता है उसकी मनोकामना पूर्ण होती है।

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