__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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यह स्थल सदा से ही युद्ध स्थल रहा है और सतयुग में यह स्थान तीर्थस्थल था।

कुरुक्षेत्र में पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टि से भारत का भाग्य निर्धारित किया है। कुरुक्षेत्र को महाभारत का समर क्षेत्र माना जाता है। महाभारत का युद्ध यहीं पर लड़ा गया।

ऐतिहासिक दृष्टि से भी कुरुक्षेत्र का महत्व कम नहीं है। कुरुक्षेत्र अंबाला, यमुनानगर, करनाल, कैथल से घिरा हुआ है। थानेसर और पानीपत के इतिहास प्रसिद्ध युद्ध इसी स्थान पर हुए। थानेसर हर्षवर्धन की राजधानी रहा है। इस नगर पर अनेक विदेशी आक्रमण हुए। पानीपत और भारत का भाग्य निर्माण करने वाली तीन बड़ी-बड़ी लड़ाइयां पानीपत में लडी गई। पानीपत भी इसी क्षेत्र के दायरे में आता है।

इतिहास के अनुसार यहां लुटेरों तथा हमलावरों ने आकर इसके वैभव को लूटा इसकी धार्मिक प्रतिष्ठा को नष्ट-भ्रष्ट किया। इन आक्रमणकारियों में महमूद गजनी, मोहम्मद गौरी और तैमूर भी थे। सन1765 तक कुरुक्षेत्र में ध्वंस एवं निर्माण का क्रम चलता रहा।

इतिहास की पुस्तकों में यहां इतना खून बहने के बारे में लिखा कि कुरुक्षेत्र की धरती का रंग आज तक लाल है।

सिख राज्यों के शासन स्थापित होने के बाद भारत पर उत्तर-पश्चिम की ओर से आक्रमण समाप्त हुए जिसके परिणाम स्वरूप स्थिरता आई।

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