___________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
_____________________________________

अनादि काल से यह भूमि ऋषियों – मुनियो की तपोस्थली है।

_____________________________________

महाभारत संग्राम इसी क्षेत्र के कुरुक्षेत्र में लड़ा गया था महाभारत के युद्ध में 18 अक्षौहिणी सेना मारी गई थी और देश की समस्त शौर्य संपदा का उसमें निर्मम विनाश हो गया था। इतने निर्मम संहार के बाद जीवन के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आना लाजमी है और यह बदलाव हमें महाभारत के बाद के अध्यात्म संवादों की बहुलता में नजर आता है। तब इस इलाके में नए विचारों के प्रवर्तकों की एक लंबी श्रंखला यहां कुरु- पंचाल के इलाके में विकसित हुई।

इसी इलाके में हुए थे याज्ञवल्क्य जिन्होंने त्याग पूर्वक भोग का विचार फैलाया।

याज्ञवल्क्य के ही समकालीन थे उद्दालक आरुणि जिन्होंने देश को वह महावाक्य दिया जो आज तक हमारी दार्शनिक निधि का बेसिक विचार बना हुआ है।
वह वाक्य है –

‘तत्वमसि’ –

यानी तुम स्वयं ही ब्रह्म हो,परमात्मा हो, ईश्वर हो।

_____________________________________

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *