______________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के१००किमी के दायरे में  गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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जहां रावण – कुंभकर्ण , कुबेर का जन्म हुआ रावण के पिता विश्रवा मुनि का आश्रम

 

ग्रेटर नोएडा में हिंडन एवं यमुना नदी के दोआब में स्थित  बिसरख गांव रावण के पिता विश्रवा मुनि की कर्म स्थली रहा है। बिसरख का प्राचीन नाम विश्वेश्वरा था। जोकि रावण के पिता विश्रवा मुनि के नाम पर पड़ा। लेकिन कालांतर में इस गांव को बिसरख कहा जाने लगा। हालांकि पुरातत्व की दृष्टि से इस बारे में कोई ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं है। लेकिन सरकारी दस्तावेजों के रिकॉर्ड में यही गांव रावण का पैतृक गांव है। आज भी थोड़ी सी खुदाई करने पर यहां जगह-जगह शिवलिंग निकलते रहते हैं।

 

यहीं रावण, कुंभकरण तथा कुबेर का जन्म हुआ था ।रावण के पिता विश्रवा मुनि का यहां आश्रम था। विश्रवा मुनि यहां भगवान शिव की आराधना किया करते थे।

 

पूरे देश में जहां असत्य पर सत्य की जीत का पर्व दशहरा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है वहीं किंवदंतियों में रावण के पैतृक गांव गौतम बुध नगर जनपद के बिसरख गांव में कहीं भी पर्व- त्यौहार का माहौल नहीं होता।

दशहरा के दिन गांव में न तो कहीं कोई पुतला जलाया जाता है और न ही कहीं कोई झांकी निकाली जाती है। इतना ही नहीं गांव के लोग आसपास के गांवों या शहरों में झांकियां और पुतला दहन देखने भी नहीं जाते हैं।

बिसरख गांव में राम से अधिक रावण पूजनीय है। इसी कारण इस गांव में न तो रामलीला का मंचन होता है और न ही दशहरा पर्व मनाया जाता है। इस गांव के लोग रावण को अपने गांव का बेटा मानते हैं।

 

इस गांव में हजारों वर्ष पुराना भगवान शिव का पौराणिक मंदिर है। ऐसी मान्यता है की इस शिवलिंग की स्थापना ऋषि विश्रवा मुनी ने की थी। कहते हैं लंका का राजा बनने से पहले रावण भी यहां शिवजी की पूजा किया करता था।

इस मंदिर के शिवलिंग की खुदाई कई बार करा कर देखी गई। शिवलिंग की 60 फीट तक नीचे खुदाई करने  के बाद भी इसकी गहराई व छोर का पता नहीं चल पाया है।

महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर से हजारों श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। बहुत से श्रद्धालु हरिद्वार से पैदल कांवड़ में गंगाजल लाकर भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हैं।

गांव में थाने के पास स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, तांत्रिक चंद्रास्वामी, और बड़े-बड़े नेता, उद्योगपति, आईएएस व पीसीएस आदि बड़ी तादाद में आते रहे हैं। प्रदेश सरकार की इस पौराणिक शिव मंदिर को पर्यटक स्थल के रूप विकसित करने की योजना है।

इस शिव मंदिर पर दशहरा, दीपावली, शिवरात्रि के दिन दिल्ली समेत आसपास के राज्यों से हजारों लोग पूजा- अर्चना करने के लिए आते हैं।

 

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