__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.भारत) के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मुजफ्फरनगर जनपद में जानसठ एक पौराणिक और ऐतिहासिक कस्बा है। जानसठ से जुड़ी एक नहीं अनेकों उपलब्धियां हैं जो पुराणों और इतिहास से संबंधित हैं। उनसे संबंधित कई प्राचीन इमारतें और स्थान यहां देखे जा सकते हैं जो आज भी इस कस्बे में स्थित हैं।

*** रानी का महल –

जानसठ के बुधबाजार में एक विशाल दीवार जर्जर हालत में खड़ी है वह राजा बाहू के महल की है। खंडहर हुआ महाभारतकालीन यह महल स्वयं में इतिहास को समेटे है। लगभग ग्यारह सौ साल पहले यहां पर अधिक संख्या में ब्राह्मण निवास करते थे तब इस स्थान को बामनौली के नाम से जाना जाता था।

एक जमाने में यह महल यहां का ही नहीं आसपास के इलाके की शान हुआ करता था लेकिन आज यह स्थान पूरी तरह से उपेक्षित है।

बताते हैं कि यह राजा बाहू का महल ‌‌‌‌‌सात मंजिल का था। यह महल आधा जमीन के नीचे और आधा जमीन से ऊपर बना हुआ था। मरहेटे काल में यहां राजा बाहु का राज था। राजा बाहू ने अपनी रानी के लिए इसे बनवाया था।

कहते हैं कि राजा बाहू की रानी गंगा दर्शन के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती थी। आज के समय में गंगा नदी जानसठ कस्बे से बहुत दूर चली गई है लेकिन उस समय गंगा जानसठ कस्बे से ज्यादा दूर नहीं बहती थी।

बताते हैं कि इस महल की ऊंचाई इतनी थी कि यहां से हस्तिनापुर के नजदीक बह रही गंगा साफ दिखाई देती थी। रानी सुबह-दोपहर और शाम महल की छत से हस्तिनापुर की गंगा के दर्शन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करती थी।

* यह भी बताया हैं कि राजा बाबू ने रानी के स्नान के लिए महल के साथ-साथ एक बहुत बड़े तालाब को भी बनवाया था। आज के समय में इस पर लोगों का कब्जा हो चुका है।

* जानसठ में ही इस तालाब के किनारे ही एक अठपहलू नाम से विख्यात कुएं का भी निर्माण कराया गया था लेकिन वर्तमान समय में उस कुएं को भी पाटकर भर दिया गया है।

रानी के महल का हालांकि कोई लिखित इतिहास तो नहीं है। अंग्रेजों के शासन में महल तहसील दर्ज किया गया था लेकिन बाद में उस रिकॉर्ड को भी गायब करा दिया गया।

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