_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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शामली जनपद

कांधला –

कांधला में रामलीला मंचन का इतिहास बहुत पुराना है। लगभग 500 वर्ष पहले कांधला में जमीदारों ने रामलीला मंचन की परंपरा शुरू की थी। यहां पर मंचित की जाने वाली रामलीला का अपना एक ऐतिहासिक महत्व है। रामलीला का मंचन स्थानीय कलाकारों द्वारा ही किया जाता है लेकिन श्री राम – लक्ष्मण व सीता आदि पात्रों की भूमिका मथुरा के बाण समाज के लोग ही निभाते हैं। जिस समय जमींदारों ने रामलीला मंचन की परंपरा शुरू की थी। उस समय चौकीदार से लेकर राजा तक के पात्र की भूमिका वे स्वयं ही निभाया करते थे। उसी परंपरा को उन की पीढ़ियां आगे भी निभाती रही है। भगवान श्री राम के जीवन से जुड़ी रामलीला मंचन के साथ यहां लगने वाले मेले में मनोरंजन के लिए झूले सर्कस के साथ साथ बाजार को भी लगाया जाता है।

कांधला का रामलीला मेला पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण मेले के रूप में विख्यात है एक एक बड़ी परिधि में लगने वाला यह मेला अपनी अनुपम छटा के लिए भी प्रसिद्ध है सांप्रदायिक सौहार्द के मेले के रूप में मशहूर इस मेले में हलवा पराठा की सबसे ज्यादा दुकानें लगती हैं और लोग बड़े शौक से इसे खाते हैं

श्री राम बारात –

रामलीला के अवसर पर श्री राम बारात की शोभा यात्रा धूमधाम से निकाली जाती है। जिसमें दर्जनों झांकियां, कई बैंड और डीजे आदि शामिल रहते हैं। शोभा यात्रा का नगर में जगह-जगह भव्य स्वागत किया जाता है।

भरत मिलाप की भव्य शोभायात्रा –

रामलीला में श्री राम के साथ हुए युद्ध में रावण के मारे जाने के बाद कांधला नगर में रामलीला कमेटी के द्वारा भरत मिलाप की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है। शोभा यात्रा में भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

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बिजनौर जनपद

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नगीना कस्बा –

भगवान श्रीराम की बारात बड़ी धूमधाम से मुख्य मार्गों से निकाली जाती है। बारात में शामिल आकर्षक मनमोहक झांकियां सब का मन मोह लेती है। शोभायात्रा में सभी वर्गों के हजारों लोग शामिल होते हैं।

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