_____________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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राजघाट  –

 

बुलंदशहर जनपद में गंगा के तट पर स्थित राजघाट। यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रत्येक अमावस्या एवं पूर्णिमा को यहां मेला लगता है। इस अवसर पर यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में गंगा स्नान के लिए और बच्चों का  मुंडन संस्कार  कराने के लिए आते हैं।

राजघाट के गंगा घाट पर हर वर्ष गंगा जन्मोत्सव के अवसर पर तीन दिवसीय उत्सव मनाया जाता है। लोगों का मानना है कि आज ही के दिन गंगा जी का जन्म हुआ था। इस दिन का बहुत ही महत्व बताया जाता है।

इस अवसर पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा जी में स्नान करने के लिए आते हैं। बड़े धूमधाम से गंगा जी के दर्शन करते हैं। यह मेला यहां 3 दिन तक लगता है मुख्य बाजारों से होकर बैंड बाजों के साथ झांकियां भी निकाली जाती हैं। गंगा आरती देखने के लिए श्रद्धालु बहुत दूर दूर से और बाहर से भी लोग आते हैं।

चारों और गंगा घाट पर जागरण और भंडारों का आयोजन किया जाता है। इस दिन गंगा जी में स्नान करने से श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। गंगा मैया का आशीर्वाद सदैव उन पर बना रहता है। ऐसा श्रद्धालुओं का विश्वास है। गंगा जन्मोत्सव का यह सब आयोजन कई दशकों से भागीरथी सेवा ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।

राजघाट पर गंगा जी पर सड़क पुल नहीं है यहां  रेलवे पुल बना हुआ है। सन 18 87 में अंग्रेजों  के काल में यह शानदार रेलवे पुल बनाया गया था।

रेलवे पुल से गंगा जी का मनमोहक मनोरम दृश्य दिखाई देता है।

यहां मृतकों की अस्थियां विसर्जन करने के लिए और अलाऔं- बलाओं से मुक्त होने के लिए भी लोग आते हैं।

राजघाट के सामने गंगा पार नवराला स्थान है। यहां कई धर्मशालाएं तथा मंदिर है।

यहां गंगा जी में रहने वाले जलीय प्राणी घड़ियाल आदि  भी कभी-कभी दृष्टिगोचर हो जाते हैं।

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** विहारघाट   –

राजघाट से कुछ ही दूरी पर विहारघाट नामक स्थान है।

इसे नलक्षेत्र भी कहा जाता है। यह पुराणों के प्रसिद्ध राजा नल के स्नान- दानादि का स्थान रहा है।

यहां श्री विहारी जी का मंदिर और गायत्री देवी का मंदिर है।

यहां से कुछ ही दूरी पर नरवर नामक  स्थान है।

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**  रामघाट   –

बिहार घाट से लगभग 8 किलोमीटर दूर गंगा के दक्षिणी तट पर रामघाट एक प्रसिद्ध और प्राचीन तीर्थ है।

कहा जाता है कि कोल( अलीगढ़) के स्वामी कोलासुर का वध करके जब हलधर बलराम ने गंगा स्नान किया तो उन्होंने वही अपने नाम से एक नया नगर रामघाट बसाया। यहां बहुत अधिक और प्रसिद्ध मंदिर हैं।

मुख्य मंदिर  – नृसिंह जी, विहारी जी, हनुमान जी, गंगा जी, सीताराम जी सत्यनारायण जी, रघुनाथ जी( गढ़ी में), गोविंद देव जी( नहर किनारे), दाऊजी, कृष्ण- बलदेव आदि मंदिर प्रसिद्ध हैं।

रामघाट से थोड़ी ही दूरी पर एक प्राचीन खेड़े पर( खेत का टीला) वनखंडेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर है। कहा जाता है कि कीलेश्वर नामक दैत्य को मारकर श्री बलराम जी ने इस मंदिर की प्रतिष्ठा की थी।

कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान के अवसर पर यहां मेला लगता है। अन्य पर्व उत्सवों  पर भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने के लिए आते हैं।

 

 

 

 

 

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