________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद(उ.प्र.-भारत)के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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भारत में सबसे अच्छी चाट किस शहर में मिलती है, इंटरनेट पर किए गए इस सवाल के जवाब में सबसे अधिक बार मुजफ्फरनगर का नाम लिया गया था। यह क्षेत्र सबसे अच्छी चाट मिलने के लिए मशहूर है। यहां चाट बनाने के सबसे कुशल कारीगर हैं।

मुजफ्फरनगर जनपद का पुरकाजी कस्बा चाट के विशेष स्वाद के लिए प्रसिद्ध है। यहां की चाट के इसी विशेष स्वाद ने पुरकाजी की पहचान दूर-दूर तक कई प्रदेशों में कराई है। चाट पुरकाजी कस्बे की पहचान बन चुकी है।

चाट की तस्वीर को देखने मात्र से ही जीभ लपेटे लेने लगती है तो कल्पना कीजिए कि खाते समय क्या हालत होती होगी। ‌

पुरकाजी कस्बा नेशनल हाईवे 58 के किनारे ही बसा हुआ है। इस हाइवे से होकर बड़ी संख्या में यात्री व पर्यटक प्रतिदिन आते-जाते हैं। आप पुरकाजी से होकर गुजरे और यहां की चाट का स्वाद नहीं लिया तो मन को यह महसूस होता है कि कुछ रह गया है, उन्हें अपनी यात्रा अधूरी लगती है। पुरकाजी की चाट का स्वाद ही ऐसा है कि लोग चटकारे लेकर इस का आनंद उठाते नजर आते हैं।

बताते हैं कि कुछ दशक पहले पुरकाजी के बाबू नत्थूमल हाईवे के किनारे एक पीपल के पेड़ के नीचे चाट का खोमचा लगाते थे। पीपल के पेड़ की छांव में खड़े होकर लोग उनके खोमचे की चार्ट खाकर चटकारे लेते थे। अब वह सब तो नहीं रहा लेकिन नत्थुमल की बनाई चाट का स्वाद आज भी बरकरार है।

किसी समय एक छोटे से खोमचे पर बिकने वाली चाट मौजूदा समय में इस कदर मशहूर हो चुकी है कि पुरकाजी कस्बे में आने वाले मेहमानों की पहली पसंद बन चुकी है। हाल यह है कि कई कई दुकानें हो जाने के बावजूद हर समय भीड़ लगी रहती है और ग्राहकों को चाट खाने के लिए काफी देर तक खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।

पुरकाजी से होकर हरिद्वार, देहरादून व अन्य तीर्थ स्थलों, पर्यटक स्थलों पर जाने-आने वाले यात्री बड़ी संख्या में यहां चाट खाने के लिए रुकते हैं। कभी-कभी तो चाट खाने वालों की यहां इतनी भीड़ हो जाती है की उससे यहां जाम तक लग जाता है।

यहां की चाट इन यात्रियों के द्वारा उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र तक दूर के प्रदेशों में भी मशहूर हो चुकी है।

यहां की चाट में गोलगप्पे गुंजिया-पकौड़ी दही-भल्ले पापड़ी आलू की टिक्की आदि बनाए जाते हैं। चाट को स्वादिष्ट बनाने में दही-खटाई अहम स्थान है। चाट बनाने में दिमाग एवं हाथों की मेहनत के अलावा शुद्ध मसालों के मिश्रण का तालमेल होना भी जरूरी होता है।
इन्हीं सबके होने से लोग यहां की चाट के स्वाद की तारीफ करते हुए नहीं थकते।

इसके अलावा पुरकाजी कस्बे में आने वाले नेताओं और अफसरों की भी पहली पसंद यहां की चाट खाना ही होता है और वह लोग चाट खाए बिना नहीं जाते हैं।

कहते हैं कि कुछ समय पहले यहां एक कार्यक्रम में आए मुंबई के कलाकारों ने भी कस्बे में आते ही पुरकाजी की चाट खाने की इच्छा जाहिर की थी और उन सब ने चाट खाने के बाद यहां की चाट की जमकर तारीफ की थी। यहां के प्रसिद्ध चार्ट विक्रेताओं के अनुसार कई प्रदेशों के मंत्री भी यहां रुक कर चाट खा चुके हैं।

सवेरे 8 बजे से रात 10 बजे तक खुलने वाली चाट की दुकानों पर टिक्की, गुजिया-पकौड़ी, खस्ता व गोलगप्पों आदि की जमकर बिक्री होती है।

आज कई सारी चाट की दुकानें गुप्ता चाट भंडार के नाम से पुरकाजी में खुल चुकी हैं लेकिन स्थानीय लोग असली वाले गुप्ता जी की दुकान को जानते हैं।

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पुरकाजी कस्बा एक और चीज के लिए मशहूर है। जिसका नाम आते ही मुंह में पानी आ जाता है। जी हां वह चीज है चासनी के रस से भरी स्वादिष्ट करारी जलेबियां।

पुरकाजी कस्बे के मेन बाजार में स्थित भुल्लन की कई दशकों पुरानी मशहूर जलेबी की दुकान है। दोपहर बाद जब यहां जलेबियां बननी शुरू होती है तब जलेबी का स्वाद लेने के लिए लोगों की लंबी लाइन लग जाती है।

पुरकाजी कस्बा नेशनल हाईवे के किनारे बसा हुआ है इसलिए यहां से गुजरने वाले बहुत से लोग भी इस दुकान की बनी हुई जलेबियां खाना नहीं भूलते। बहुत से लोग तो यहां से जलेबियों को पैकिंग करा कर अपने साथ भी ले जाते हैं।

इस दुकान की जलेबियों का आकार भी आम जलेबी के आकार से अलग होता है।

पुरकाजी में रिश्तेदारी में आने वाले मेहमानों की खास पसंद भी यहां की जलेबियां ही होती हैं।

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