__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मुजफ्फरनगर जनपद के खतौली कस्बे में बुढ़ाना रोड पर प्राचीन थानेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। इस मंदिर का प्राचीन इतिहास है। इस मंदिर में परियों का तालाब और मंदिर है। पिछले चार सौ से भी अधिक सालों से लगातार यहां परियों का मेला लगता चला आ रहा है। इस मेले को देखने के लिए एवं परियों के मंदिर पर प्रसाद चढ़ाने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं।

यहां चैत्र मास के प्रत्येक बुधवार के दिन एवं चैत्र अमावस्या को परियों के विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें भारी भीड़ उमड़ती है। इस मेले को देखने के लिए एवं परियों के मंदिर पर प्रसाद चढ़ाने के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं। परियों के मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर श्रद्धालु घर परिवार की सुख समृद्धि की कामना करते हैैं।

यहां के लोगों की मान्यता है कि इस मंदिर में बने तालाब में अमावस्या की रात्रि के समय परियां स्वर्ग से उतरकर स्नान और नृत्य करतीं थी। धीरे-धीरे यह स्थान सब जगह लोकप्रिय हो गया। इस मंदिर की ख्याति पूरे देश में फैली हुई है। परियों का तालाब और मंदिर आज भी परियों के यहां आने की याद दिला देता है। लोगों की यह भी मान्यता है कि कोई रोगी इस तालाब में स्नान कर ले तो वह ठीक हो जाता है। इसी से चैत्र मास के प्रत्येक बुधवार को यहां दूरदराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

थानेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास मराठा काल से भी पहले का है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने यहां शिव की आराधना की थी। नक्काशीदार मंदिर में चौमुखी शिवलिंग स्थापित है। मंदिर की इमारत एवं परियों का कुंड इस स्थान की प्राचीनता के साक्षी हैं।

महाशिवरात्रि के पर्व पर बड़ी संख्या में कांवड़िए एवं श्रद्धालु यहां जलाभिषेक करते हैं। इस अवसर पर मंदिर में मनमोहक साज-सज्जा की जाती है। इस स्थान पर एक संस्कृत महाविद्यालय को भी संचालित किया जाता है।

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