_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मोती झील – मुजफ्फरनगर शहर
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महाभारत कालीन नागलोक का रास्ता मानी जाने वाली मोती झील ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व की झील है।

मुजफ्फरनगर शहर काली नदी के किनारे पर बसा हुआ है। मुजफ्फरनगर से शामली जाने वाले मार्ग पर काली नदी पर बने पुल से पश्चिम में मात्र कुछ सौ मीटर की दूरी पर ही स्थित है मोती झील।

मोतीझील को पर्दाफाश माना जाता है यानी इस झील का तल कितना गहरा है आज तक पता नहीं चल पाया है। कहते हैं अंग्रेजों के जमाने में इस झील की गहराई का पता लगाने की कोशिश की गई थी लेकिन उस समय भी इसकी गहराई का पता नहीं लगाया जा सका था।

इस झील को महाभारत काल से जोड़ा जाता है।पौराणिक विश्वास के अनुसार माना जाता है कि इस झील का रास्ता नाग लोक को जाता है।

महाभारत काल में हस्तिनापुर के महाराजा धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव तथा उनके भाई पांडु के पुत्र पांडव कहलाते थे।
धृतराष्ट्र का पुत्र दुर्योधन पांडवों के बल और सभी गुणों में श्रेष्ठ होने के कारण उनसे बाल्यकाल से ही ईर्ष्या करता था। दुर्योधन हर समय पांडवों को किस प्रकार दुख और हानि पहुंचाई जाए इसकी युक्ति बनाने के बारे में ही सोचा करता था।

पांडवों में बलशाली भीम को भोजन बहुत प्रिय था। एक बार दुर्योधन ने बाल्यकाल में भीम को विषाक्त भोजन खिलाकर उनके मूर्छित होने पर बांधकर नदी के जल में डलवा दिया था। माना जाता है दुर्योधन ने भीम को जिस गहरे जल में डलवाया था वह पाताल लोक तक गहरा था तो भीम नाग लोग पहुंच गए थे और वह मोती झील के मार्ग से ही नाग लोक से और भी अधिक बलशाली होकर वापस धरती पर आए थे।

पौराणिक महत्व की इस झील के रखरखाव की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। मोती झील ऐसे स्थान पर स्थित है जहां से हरियाणा पंजाब सहित शामली जनपद की तरफ से आने वाला यातायात मुजफ्फरनगर शहर में प्रवेश करता है। लोगों की मांग है कि शामली रोड स्थित मोतीझील का सौंदर्यीकरण करके पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। इस झील के पास ही नगर का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल शनिधाम स्थित है। विकसित होने पर यह स्थान एक अच्छा पर्यटन स्थल बन सकता है।

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