__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद(उ.प्र.भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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बिजनौर जनपद में नवाब नजीबुद्दौला के बसाए शहर नजीबाबाद में भी ताजमहल की तरह बनवाई गई एक यादगार इमारत है। अंतर केवल इतना है की आगरा में ताजमहल को मुगल बादशाह शाहजहा ने अपनी बेगम मुमताजमहल की याद में बनवाया था तो नजीबाबाद शहर में बनवाई गई यादगार एक पत्नी ने अपने शौहर की याद में बनवाई थी।

नजीबाबाद शहर में मुअज्जमपुर तेली गढ़ी में स्थित इस इमारत को लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व ताजमहल की तर्ज पर नवाब नजीबुद्दौला के नवासे नवाब जहांगीर खान की याद में उनकी बेगम ने एक शानदार मकबरे के रूप में बनवाया था।

इस इलाके के इतिहास के जानकार बताते हैं कि नवाब जहांगीर खान का निकाह पास के ही कस्बे किरतपुर के मोहल्ला कोटरा में हुआ था। निकाह के 2 साल बाद वे अपनी बेगम को लेने कोटरा गए थे। वापसी में जब वे अपने साथ बेगम को लेकर लौट रहे थे उस समय जश्न मनाया जा रहा था। गांव जीवनसराय के पास जश्न की आतिशबाजी के दौरान छोड़ा गया बारूद का एक गोला दिशा बदलते हुए उनके सीने से जाकर लगा और नवाब जहांगीर खां इस हादसे में दुनिया को अलविदा कह गए।

जश्न के दौरान हुए उस हादसे से उनकी बेगम को बहुत धक्का लगा। बेगम ने अपने शौहर नवाब जहांगीर खान की याद में चारमीनार के नाम से इस शानदार मकबरे को बनवाया।

मकबरे के चारों कोनों पर लखौरी ईंटों से बनी तीन खंडों वाली चार मीनारें हैं। एक दूसरे से लगभग 50 फुट की दूरी पर बनी इन चार मीनारों में से दो मीनारों में ऊपर जाने के लिए 26-26 पैड़ी बनी हुई है। मकबरे के हाल में जाने के लिए मीनारों के बीच में मेहराब नुमा दरवाजे बनाए गए हैं। चारों मीनारों के बीच में एक भव्य गुंबद भी बनाया गया था जो कभी किसी समय ढह गया। कहा जाता है गुंबद के नीचे ही नवाब जहांगीर खां की कब्र है।

नवाब जहांगीर खां की बेगम ने अपने शौहर की याद में जिस शानदार मकबरे को बनवाया था वह आज के समय में बदहाल है। बेगम के अपने शौहर के प्रति प्यार की निशानी चार मीनारें कब ढह जाएं कोई कह नहीं सकता।
मीनारों की ईंटें तेजी से निकल रही हैैं। पुरातत्व महत्व का यह स्मारक कभी भी ध्वस्त हो सकता है।

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