_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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बिजनौर जनपद का सबसे प्रमुख नगर नजीबाबाद को रुहेला सरदार नजीबुद्दौला ने बसाया था। उसने यहां कई महल और मस्जिदें बनवाई थी।

नजीबुद्दौला का नवाबी शहर नजीबाबाद और यहां स्थित नजीबुद्दौला का किला व महल यहां तक कि नवाब नजीबुद्दौला व उसकी बेगम की कब्रगाह उसके बसाए मोहल्ले आदि नवाब नजीबुद्दौला की याद ताजा कर देते हैं।

नवाब नजीबुद्दौला ने अपने समय में जब नजीबाबाद को बसाया था तब उसने इस नगर में बहुत से मोहल्ले भी बसाए थे। उन सब मोहल्लों के नामों की भी बहुत रोचक दास्तान हैं।

तब उसने यहां अपनी बेगम सहित अपने परिवार के सदस्यों यहां तक कि अपने दरबार के विश्वासपात्र कारिंदों के नाम पर भी नजीबाबाद शहर में बसाए गए मोहल्लों के नाम रखे थे।

नवाब नजीबुद्दौला ने जहां अपनी बेगम के लिए महल बनवाया था उस क्षेत्र का नाम उसने महल सराय तथा आज के समय में जहां पुलिस थाना बना है नवाब ने वहां बनवाए अपने किले के क्षेत्र का नाम नवाबगंज रखा था।

अपने कारिंदों के निवास जिस स्थान पर नवाब ने बनवाए थे उस क्षेत्र का नाम नवाबपुरा रखवाया। नजीबुद्दौला और उसकी बेगम की कब्रगाह जिस स्थान पर है उस मोहल्ले का नाम मकबरा। नवाब का खानदानी कब्रिस्तान जिस क्षेत्र में था उसका नाम मेहंदी बाग रखा गया।

उसके भाई जाब्ताखां के नाम पर मोहल्ले का नाम जाब्तागंज रखा गया। नवाब के पुत्र कल्लू खां के नाम पर कल्लू गंज और मुनीर खान के नाम पर मुनीर गंज तथा मजीद खां के नाम पर मजीद गंज नाम के मोहल्ले बसे। ‌

उसके दरबार में जो दीवान परमानंद थे उनके नाम पर मोहल्ला दीवान परमानंद है। नवाब ने अपनी महल की मालन संतो के नाम पर संतोमालन मोहल्ला बसाया।

नवाब के सिक्के ढालने की टकसाल वाले क्षेत्र का नाम टकसाल हुआ। और तो और नवाब के शासन में भुखमरी के दौर में पेट भरने के लिए जहां नान (रोटी) बनती थी यानी नान दे हंद का नाम नादेहिन्द हुआ।

नजीबाबाद शहर को बसाया गया था उस समय यहां अफगानिस्तान के काबुल शहर से पठानों को भी लाकर बसाया गया था उस क्षेत्र को पठानपुरा के नाम से जाना जाता है तो मुगलों को बसाने वाला क्षेत्र मुगलूशाह के नाम से।

नवाब नजीबुद्दौला ने अपनी याद को हमेशा यहां कायम रखने के लिए सबसे पहले इस स्थान पर एक बड़ा विशाल किला और अपने आवाज के लिए महल बनवा लिया था। इस समय वह किला महल का गेट और उसका मकबरा केंद्रीय पुरातत्व विभाग के द्वारा संरक्षित है और महल में आजकल थाना कोतवाली चल रही है।

नजीबाबाद नगर में नवाब के परिजनों कारिंदों आदि के नाम पर बसाए गए मोहल्ले आज के जमाने में भी उसकी याद ताजा कर देते हैं।

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बिजनौर जिले में सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन नजीबाबाद में है। यहां से हर जगह को ट्रेन जाती है। कई और भी महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठान यहां पर स्थित हैं।

कुछ दशक पहले तक आकाशवाणी का नजीबाबाद केंद्र भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय था।

नजीबाबाद का ‘सरस्वती पुस्तकालय’ भी आसपास के इलाके में अद्वितीय है। विभिन्न भाषाओं की 32हजार से भी अधिक पुस्तकें यहां संग्रहित हैं। यहां बालोपयोगी पुस्तकों का भंडार है। इसके साथ साथ इस पुस्तकालय में साहित्य, विधि, अनुसंधान, विज्ञान, इतिहास, भूगोल, धर्म ग्रंथ आदि के साथ-साथ दुर्लभ पुस्तकें भी मौजूद हैं। इन सभी का उपयोग अनुसंधानकर्ता शोध विद्यार्थी और ज्ञान उपार्जन करने वाले जिज्ञासु करते हैं।
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