_______________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १००किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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यह क्षेत्र गंगा का मैदान है

यहां के उत्तरी भाग से शिवालिक की पर्वत श्रेणियां शुरू होती हैं। गंगा- यमुना – रामगंगा जैसी सर्वदा जलापूरित नदियां यहीं पर्वतों से उतर कर मैदान में प्रवेश करती हैं ।

एक पतली सी पट्टी भाभर और तराई कहलाती है। सहारनपुर बिजनौर जिलों में भाभर का क्षेत्र शिवालिक पहाड़ियों के इर्द-गिर्द ही सिमटा हुआ है। पहाड़ो से उतरने वाली नदियों अथवा अन्य तेज बहाव वाली धाराओं की गति यहां आकर कुछ धीमी हो जाती है। अतः ऊपर से अपने साथ बहाकर लाए हुए घिसे- घिसाए प्रस्तर खंडों को यहीं छोड़ती जाती हैं। छोटी- मोटी धाराओं वाले
नदी – नाले इन प्रस्तर खंडों की मोटी परतों के बीच नजर ही नहीं आते जब तक की उन में बाढ़ की स्थिति न हो। किंतु कुछ दूरी के बाद वे फिर दिखाई पड़ने लगते हैं और मंद गति से बहते हुए मिट्टी आदि की बारिक परत बिछाते रहते हैं दलदली तराई क्षेत्र का निर्माण इसी प्रकार हुआ है। सहारनपुर बिजनौर में जंगलों और ऊंची घासों से ढका हुआ तराई का क्षेत्र है।

भाभर और तराई के इलाके के बाहर पूरा का पूरा मैदानी क्षेत्र इनहीं नदियों की लाई हुई मिट्टी से बना है और खूब उपजाऊ है। यह गंगा यमुना एवं उसकी सहायक नदियों द्वारा अभीसिंचित क्षेत्र है।

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