____________________________________ _________ मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत) के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मुजफ्फरनगर जनपद के पुरकाजी कस्बे से मात्र 1 किमी दूर खाईखेड़ी मार्ग पर नार्वे नगर गांव स्थित है। नार्वे गांव नट बिरादरी का गांव है।

नट जाति विभिन्न प्रकार की कला करके पूरे भारत में घूमती रहती है। कला का प्रदर्शन कर लोगों से रूपए पैसे इकट्ठा करके अपना पालन पोषण करती है। नट जाति के लोग अपना कार्य बहादुरी से बिना जान की परवाह किए करते हैं, लेकिन वर्तमान समाज के लोगों में नटों के कला कौशल के कार्य की कोई रुचि नहीं रह गई है। इसलिए नटों को अपना पुश्तैनी कार्य छोड़कर रोजगार के नए अवसर तलाशने पढ़ रहे हैं।

यहां नट समाज द्वारा अपने गुरु एवं देवता बाबा मोतीराम लाहौर वालों की याद में एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है। श्रद्धालुओं के अनुसार बाबा मोतीराम का दूसरा मंदिर पाकिस्तान के लाहौर में है।

नार्वे गांव में बाबा मोतीराम लाहौर वाले के मंदिर पर हर तीसरे वर्ष उनकी स्मृति में गांव के नट समाज के द्वारा हर्षोल्लास के साथ मेला लगाया जाता है। जिसमें कई राज्यों दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश समेत उत्तर प्रदेश के श्रद्धालु मेले में भागीदारी कर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

नट जाति के लोग भारी संख्या में श्रद्धालु स्वयं ही एकत्रित हो जाते हैं तथा अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा रखते हुए मन्नतें मांगी जाती हैं। नट बिरादरी के लोगों का मानना है कि मंदिर में बाबा मोतीराम लाहौर वाले से जो भी मन्नत मांगी जाती है उनको वह पूरा करते हैं।

मेले में सुंदर झांकियों के साथ एक शोभायात्रा निकाली जाती है। यह शोभायात्रा नार्वे गांव के मंदिर से खाईखेड़ी गांव जाकर वापस यहीं पर समाप्त होती है।

कई जगहों के प्रसिद्ध बैंडबाजों, ढोल-नगाड़ों और सुंदर मनमोहक झांकियों के साथ शोभा यात्रा पैतृक गांव खाईखेड़ी की गलियों से गुजरती है। जहां पर श्रद्धालुओं के द्वारा स्थान-स्थान पर पुष्प वर्षा की जाती है।

मंदिर कमेटी मेले की व्यवस्था के लिए नट समाज के लोगों से अपने स्वयंसेवक लगाती है।

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