____________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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नरौरा एक छोटा मगर आज के समय में बड़े महत्व का नगर है। यह गंगा नदी के तट पर बुलंदशहर जनपद में स्थित है। पवित्र गंगा नरौरा से होकर गुजरती है।

यह स्थान पहले से ही गंगा के मनोरम तटों, गंगा बैराज और शीत ऋतु में यहां आने वाले तरह-तरह के प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट के कारण बहुत प्रसिद्ध रहा है।

आज के समय में नरोरा यहां स्थित परमाणु बिजली घर के लिए देश – विदेश में अधिक जाना जाता है। नरौरा में परमाणु शक्ति से बिजली बनाने की यूनिटें संपूर्ण स्वदेशी ज्ञान तथा सामग्री से बनाई गई है। जिनके बनाने में विकिरण व भूकंपीय नजरियों  से सुरक्षा का पूरा-पूरा खास ध्यान रखा गया है। नरोरा के रिएक्टर भवन डबल कंटेनमेंट वाले हैं। अतः कभी कुछ अनहोनी हो भी जाए तो भी रेडियोएक्टिविटी किसी भी सूरत में बाहर नहीं आ सकेगी।

सुरक्षा की दृष्टि से परमाणु बिजली घर के चारों और एक मील के दायरे में मानव बस्ती की अनुमति नहीं होती है। इस एक्सक्लूजन जोन में परमाणु वैज्ञानिकों ने लगभग सात लाख पेड़ – पौधों को वैज्ञानिक ढंग से रोपा था। जिससे यह जोन अनेक प्रकार के पशु पक्षियों से भरा सुंदर अभयारण्य बन गया है। यहां बंदरों के दल, खरगोश, नीलगाय, हिरन, जंगली सूअर आदि वन्य पशुओं के साथ-साथ अनेक प्रकार के पक्षियों का वास है। बताया जाता है कि इस क्षेत्र में आने वाले पक्षियों की 200 से भी अधिक प्रजातियां हैं। यहां कई प्रकार के छोटे – बड़े जल जीव भी हैं। इस क्षेत्र में तेंदुओं तथा घडियालों को भी देखा गया है। इस प्रकार से यह क्षेत्र जैवविविधता से परिपूर्ण है। नरौरा आज एक अनोखा एक्सक्लूजन – अभयारण्य, अंतरराष्ट्रीय पक्षी क्षेत्र व     ‘ रैमसर नमभूमि ‘ के तौर पर भी अपनी पहचान बना चुका है।

सुंदर मनोरम हरियाली के बीच गर्व से खड़े रिएक्टर भवन, टरबाइन भवन, शीतलन मीनारें आदि को देखकर मन गर्व से भर जाता है।

नरौरा का परमाणु रिएक्टर भवन, गंगा के मनोरम तट, गंगा बैराज और यहां का वन्य जीवन का अद्भुत दृश्य देखकर यहां आने वाले व्यक्ति मन आनंद से भर जाता है।

 

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