बिजनौर जनपद का नहटौर कस्बा । इसके बारे में बताते हैं कि बहुत पहले किसी समय कोई कबीला बसेरे की तलाश में घूमते हुए इधर आया और यहां बहती गागन नदी को देख कर यहां पड़ाव डाला था। उस समय उन्होंने इस स्थान का नाम नया ठौर रखा था। जो आगे चलकर बाद में नहटौर कहा जाने लगा।

निरंतर बह रही गागन नदी की धारा मोहन वाली के पहाड़ी उबड़ खाबर रास्तों से होती हुई खो बांध, सुखरू व जोगीरमपुरी से होती हुई नहटौर से होकर मुरादाबाद के पास रामगंगा से मिल जाती है। गागन नदी की शीतल जलधारा यहां के लोगों की प्यास तो बुझाती ही है। इसके समीप की धरती सिंचित हो कर फसलों से भी लहलहाती है।

नहरौर के पास गागन नदी पर ब्रिटिश काल में एक पुल और बांध का निर्माण हुआ। बांध से एक नहर भी निकाली गई। इस नहर से पूरे वर्ष आस-पास के २० कि.मी. क्षेत्र में खेतो की सिंचाइ होती है। बांध से बरसात के समय नहटौर के निचले इलाके में पानी भरने से राहत मिली।
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पाताल तोड़ शिवलिंग –

नहटौर के पास ही है पाताल तोड़ शिवलिंग फाल्गुन माह में महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां मेला लगता है। बहुत से श्रद्धालु इस अवसर पर हरिद्वार से कावड़ में गंगाजल लाकर यहां शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। इस शिवलिंग के बारे में यहां के लोग बताते हैं कि यहां पर सुरेंद्र त्यागी का आम का बाग था। इस बाग में काफी झाड़ होने पर उन्होंने कुछ मजदूरों को इसकी सफाई करने के लिए भेजा। मजदूर जब बाग की सफाई कर रहे थे उस दौरान फावले से इस स्थान पर उन्हें टन – टन की आवाज सुनाई दी। मजदूरों ने उक्त स्थान पर और नीचे तक खुदाई की। कुछ गहराई तक पहुंचने के बाद वहां उन्हें एक शिवलिंग के आकार का पत्थर दिखाई दिया। मजदूरों ने आकर सुरेंद्र त्यागी को बताया। उनकी बात सुनकर उन्होंने बाग में पहुंच कर देखा और मजदूरों से उस स्थान पर और नीचे गहराई तक खोदने के लिए कहा। बुजुर्ग बताते हैं कि सुरेंद्र त्यागी के कोई संतान नहीं थी उन्होंने उस शिवलिंग के पास खड़े होकर संतान प्राप्त होने की मनोकामना की। कुछ समय बाद उनके दो पुत्र पैदा हुए। इसके बाद यहाँ मंदिर का निर्माण कराया गया। इस बात की चर्चा आसपास के क्षेत्र में फैल गई और यहां श्रद्धालुओं का आने का सिलसिला शुरू हो गया। बाद में इस स्थान का नाम झारखंडी रखा गया और यहां पर जमीन से निकले शिवलिंग को पाताल तोड़ शिवलिंग के नाम से श्रद्धालु भक्त जानते हैं।

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नल वाले बाबा का मेला –

नहटौर के समीपवर्ती गांव रामपुर में प्रतिवर्ष नल वाले बाबा का मेला लगता है। इस अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद लेकर मन्नतें मांगते हैं। बाबा की मान्यता के चलते दूर-दूर से भक्तगण इस अवसर पर आते हैं।

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