_________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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बिजनौर जनपद में नगीना कस्बा एक तहसील मुख्यालय है।

वैसे तो नगीना शब्द स्वयं में एक आकर्षण लिए हुए हैं। इस नाम से ही किसी वस्तु की चमक- दमक, आकर्षण, सुंदरता और उसके औरों से अलग होने का पता चलता है। लेकिन नगीना नगर ने अपने नाम के अनुसार अपने आप को चरितार्थ किया है। यह नगर प्राचीन काल में फारस से आने वाले व्यापारियों का विश्राम स्थल हुआ करता था।

नगीना नगर कई बार उजड़ा और बसा है। इस बात के प्रमाण आज भी इस नगर के उत्तर की ओर किसी प्राचीन बस्ती के अवशेष चिन्ह के रूप में मिलते हैं।

नगीना से कुछ दूरी पर स्थित एक टीला जिसे पारसनाथ का किला के नाम से जाना जाता है। यहां पर खुदाई के समय जैन तीर्थंकरों एवं देवी देवताओं की प्रतिमाएं निकली है। इससे यह प्रमाणित होता है की प्राचीन काल में यह स्थान जैन एवं वैदिक संस्कृति का प्रमुख केंद्र था।

नगीना शहर में पर्यटन महत्व के कई दर्शनीय स्थान है। जो हिंदू मुस्लिम वास्तुकला के कौशल को दर्शाते हैं। उन्हीं में से एक जामा मस्जिद महत्वपूर्ण इमारत है। यहां की जामा मस्जिद का प्रवेश द्वार दिल्ली की जामा मस्जिद के प्रवेश द्वार से मिलता जुलता है।

प्राचीन एवं प्रसिद्ध मुक्तेश्वर महादेव मंदिर भी यहां का एक महत्वपूर्ण एवं सुंदर दर्शनीय स्थान है। जो इस क्षेत्र में बड़ामंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। 17 वीं शताब्दी में बनाया गया यह मंदिर अपनी विशालता, भव्यता तथा वास्तुकला के लिए जाना जाता है और इस जनपद में अपनी तरह का अकेला मंदिर है। शिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है।

रामलीला बाग स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में अपार आस्था है। बताया जाता है कि मुगल काल से इसका अस्तित्व ज्यों का त्यों है। इस लिए श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था है। इस मंदिर को भव्य रूप देने के लिए गुजरात, राजस्थान एवं नोएडा के कारीगरों से कांच का काम कराया गया है।
कहा जाता है की पुराने समय में जब यह मंदिर सुनसान रहता था और इसके आसपास घना जंगल हुआ करता था। उस समय डाकू भी इस मंदिर में आकर माथा टेक कर चढ़ावा चढ़ाते और मन्नत मांगते थे।

शारदीय नवरात्र चैत्र नवरात्र पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगती है। तीन दिन यहां मेला लगता है। जिस में श्रद्धालु आकर माता के सामने माथा टेकते हैं। नवविवाहित जोड़े आकर माता का आशीर्वाद लेते हैं। नवजात बच्चों का यहां जात व कुंडारा लगाया जाता है। विजयदशमी पर भी इस स्थान पर मेला लगता है।

ब्राह्मणी वाला तालाब, रामलीला मैदान,कुफ्रतोड़ मस्जिद, शियाओं का इमामबाड़ा, ईदगाह, रामलीला मैदान आदि अन्य स्थान भी नगीना के इतिहास से जुड़े हुए महत्वपूर्ण स्थान है।

नगीना भारत में इस्लामिक शिक्षा का भी प्रमुख केंद्र है। यहां कई दीनी इदारे हैं। जिनमें यहां के निकटवर्ती क्षेत्रों के हजारों बच्चे इस्लामी शिक्षा पाते हैं। इसके अलावा इस्लामी तालीम के महाविद्यालय स्तर के कई बड़े मदरसे हैं। जिनमें देश के विभिन्न भागों के साथ- साथ विदेशों से भी इस्लामिक तालीम पाने के जिज्ञासु युवक इस्लामी शिक्षा का उच्च स्तरीय अध्ययन करने के लिए यहां आते हैं।

नगीना लकड़ी पर नक्काशी के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। इसके बारे में कहा जाता है कि नगीना वह नगर है जहां बेजान लकड़ी में भी जान डाली जाती है। यहां के लकड़ी पर नक्काशी करने वाले शिल्पी राष्ट्रपति से पुरस्कार भी प्राप्त कर चुके हैं।

भारत में हुई हरित क्रांति में नगीना का भी योगदान है। नगीना धान शोध केंद्र ने भारत की हरित क्रांति में बहुत योगदान दिया है। यहां के शोध केंद्र ने चावल व गेहूं की कई उन्नत किस्मों का निर्माण करके हरित क्रांति को आगे बढ़ाया है।

नगीना के बारे में एक रोचक बात जुड़ी है। कुछ दशक पहले बॉलीवुड में एक सफल फिल्म को बनाया गया था जिसका नाम था नगीना। इसके बारे में दिलचस्प संयोग है कि यह इस नगीना शहर के नगीना नाम के टॉकीज में नगीना नाम की फिल्म लगी थी। जिस समय यह फिल्म जहां लगी थी तब लोग आपस में कहते थे – नगीना के नगीना में नगीना फिल्म लगी है।

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