___________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.भारत)के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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कोटा गांव – ( जनपद सहारनपुर )

सहारनपुर – मुजफ्फरनगर मार्ग पर नागल कस्बे से 6 किलोमीटर दूर कोटा गांव स्थित है।

सहारनपुर जनपद का कोटा गांव मंदिरों में किए गए कलात्मक भित्ति चित्रों के प्रसिद्ध है यह गांव अनेक धार्मिक और ऐतिहासिक रहस्य अपने गर्भ में छिपाए हुए हैं इस गांव में स्थित मंदिर में अद्भुत शिवलिंग और भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा है यहां स्थित खंडहर नुमा हवेलियों और सुरंगों में कहा जाता है अकूत खजाना छिपा हुआ है जिन की रक्षा आज भी नात करते हैं

इस गांव के इतिहास के बारे में कहा जाता है कि यह गांव हजारों वर्षों यादें समेटे हुए हैं कहा जाता है कि किसी समय यह गांव गंगा यमुना के बीच में सबसे धनी गांव था तब लाला चरणदास शिव चरण दास बहुत बड़े जमीदार थे चरणदास बावन गांव के जमीदार थे कुछ दशक पहले तक प्राइमरी पाठशाला ओं में छोटे बच्चों को चरण का कोटा नामक पाठ उनकी पाठ्य पुस्तकों में पढ़ाया जाता था

गांव में प्रवेश करते ही ऊंची ऊंची जेंट्स इमारतें अपनी ओर आकर्षित करती हैं गांव में बनी चार कोठियां आज भी इतिहासकारों के लिए अजूबा है गांव की अधिकांश इमारतें अब खंडहर हो गई है गांव में स्थित शिव मंदिर और राधा कृष्ण मंदिर अतिथि गृह शिव भवन पशुशाला आदि इमारतें चुने से निर्मित की गई हैं इनकी न्यू इतनी चौड़ी है कि कहा जाता है कि किसी समय वाह रे व्यक्ति एक साथ उस पर कबड्डी खेला करते थे

कोटा गांव के शिव मंदिर और राधा कृष्ण मंदिर अपनी भव्यता और इन मंदिरों के अंदर की गई कलात्मक भित्ति चित्रण के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है

शिव मंदिर में स्थापित विशाल और सुंदर शिवलिंग व नंदी की प्रतिमा की भी अलग विशेषता है यहां एक ही शिवलिंग पर चारों ओर धागों से सुसज्जित 11 शिवलिंग बने हुए है भगवान शिव के नंदी की प्रतिमा भी 2 मीटर लंबी और 1 मीटर ऊंची है इनके जैसी प्रतिमाएं आसपास के अन्य स्थानों पर भी नहीं मिलती हैं

भगवान श्री राधा कृष्ण का मंदिर आज भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं इस मंदिर के रहस्य भी अनूठे हैं राधा कृष्ण के इस मंदिर में एक पीतल की कटोरी में भगवान् श्री कृष्ण को सिर पर रख कर ले जाते हुए वासुदेव की मूर्ति बनी है भगवान श्री कृष्ण को यमुनापार कराते यह मूर्ति देवीय चमत्कारों से परिपूर्ण है इस कटोरी के नीचे एक छेद बना हुआ है इस कटोरी में चाहे जितना पानी डाला जाए वह वह पानी छेद में से नहीं निकल कर कटोरी के ऊपर से ही बाहर बह जाता है यदि प्रतिमा के श्री कृष्ण के पैरों को पानी से स्पर्श करा दिया जाए तो पानी कटोरी के छेद से ही ऐसे बाहर निकल जाता है जैसे द्वापर युग में श्री कृष्ण के चरणों का स्पर्श करके बाढ़ का रूप ले चुकी यमुना शांत होकर कहने लगी थी शोधकर्ताओं के लिए भी यह मूर्ति एक चुनौती की तरह है

कोटा गांव के मंदिरों में की गई कलात्मक भित्ति चित्रण ऐसा उदाहरण अन्यत्र नहीं मिलता यहां बने कुछ भित्ति चित्र धर्म में डाल देते हैं यहां बना एक भित्ति चित्र पहली दृष्टि से देखने पर एक हाथी जैसा नजर आता है लेकिन ध्यान से देखने पर उसने ग्यारह नारियों का चित्रण किया गया है

गांव के बड़े भाइयों बताते हैं कि इन भित्ति चित्रों को बनाने वाले कलाकारों के हाथ पैर अंग्रेजों ने काट दिए थे क्योंकि उन्होंने ऐसे ही भित्ति चित्र ब्रिटेन में जाकर बनाने से मना कर दिया था
इस मंदिर का विशाल चबूतरा भी 2 बीघा जमीन को घेरकर बनाया गया है

राधा कृष्ण मंदिर के एक और संस्कृत महाविद्यालय का भवन है तो दूसरी ओर रामबाग बनाया गया है इसमें फव्वारा और विशेष गलियों से होती हुई कचहरी बनाई गई थी इससे आगे पक्का तालाब है इस तालाब पर महिला घाट पर जाने के लिए सुरंगे बनाई गई थी कहते हैं कि यहां के हाथी खाने की सुरंग हरिद्वार तक जाती थी जो इस समय में बंद हो चुकी है

प्राचीन समय में हमारे देश में सती प्रथा के उदाहरण तो मिलते हैं यहां पर भी प्राचीन समय से सती मठ के साथ साथ एक सत्ता मट भी बना हुआ है अपने देव स्थानों पर पूजा करने एरन गोत्र के वैश्य अग्रवाल बड़ी संख्या में बड़ी दूर दूर से अब भी प्रतिवर्ष यहां आते हैं और मनो तियां मांगते हैं

पुराने समय में इस गांव के अलग ही ठाट बट थे एक ही बाजार में एक सौ से अधिक दुकानें एक ही बाजार में बनाई गई थी दूर-दूर के गांवों के लोग यहां आकर सामान खरीदते थे यहां के लोग बताते हैं कि गांव के खंडहर नुमा बड़ी हवेलियों में आज भी बहुत सा खाजाना भरा पड़ा है कहा जाता है कि उस समय हर घर में कुछ विशेष स्थानों पर गुप्त खजाने बनाए जाते थे उनका पता केवल घर के मुखिया को होता था लेकिन कई कारणों से वे इन खदानों का रहस्य आगे की पीढ़ियों को नहीं बता सके और खजाने का रहस्य आज भी रहस्य ही बना हुआ है गांव के पुराने लोग बताते हैं कि इन हवेलियों के ऊपर बने हुए शेरों के मुंह में उन्होंने चांदी के सिक्के और औषधियों की थैलियां डाली है जिनके नीचे गिरने की आवाज भी काफी देर तक सुनने में आती थी लेकिन उस खजाने को निकालने का राज आज भी किसी को पता नहीं है कोटा गांव के बारे में किवदंती है कि यहां की हवेली में अकूत खजाना है परंतु हवेली खोलने पर भी उसमें कोई भी प्रवेश नहीं कर सकता है क्यों क्योंकि उस खजाने की रक्षा नागों के द्वारा पहरा दे कर की जा रही है

कोटा गांव की अनेक ऐतिहासिक इमारतें और हवेलियां देखने के भाव में खंडहर हो रही है और यहां के सुंदर मैं भव्य मंदिर भी देख रेख के अभाव में वीरान होते जा रहे हैं
राधा कृष्ण के मंदिर की अद्भुत कटोरी जिस के किस्से आज भी क्षेत्रीय लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं चोरी हो चुकी है

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