______________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के१००किमी के दायरे में गंगा – यमुनाकी धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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मुरादनगर दिल्ली से केवल 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।यह गाजियाबाद जनपद का एक पुराना और ऐतिहासिक कस्बा है और हथकरघा उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

कहा जाता है कि इस कस्बे की स्थापना मोहम्मद मुराद गाजी ने की थी। उन्हीं के नाम पर इसका नाम मुरादनगर रखा गया।

प्रचलित मान्यताओं के अनुसार मुगल बादशाह औरंगजेब के एक वजीर मुराद गाजी रहमतुल्ला अले ने मुगल सैनिकों के ठहरने के पड़ाव के रूप में इस क्षेत्र को बसाया था। उसी के नाम पर इस सैनिक पड़ाव का नाम मुरादनगर पड़ा। उस समय का ऐतिहासिक सैन्य पडाव आज के समय में दिल्ली के निकट एक विकसित होता हुआ स्थान और हथकरघा वस्त्र उद्योग तथा व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बन गया है।

मुगल काल में सैनिकों के ठहराव के लिए बनाई गई सराय की कोठारियों के ध्वंसावशेष आज भी यह बताते हैं कि कभी इस स्थान पर मुगल सैनिक और यात्री यहां रुक कर विश्राम करते थे। उस समय इस सराय में यहां ठहरने वालों के लिए बावर्ची आदि की भी व्यवस्था रहती थी।

कुछ समय सराय व मोहल्ला कोट की पुख्ता सुरक्षा के लिए चारों तरफ एक परकोटा बनाया गया था। इसमें प्रवेश करने के लिए  विशाल मजबूत द्वार बनाए गए थेl उनके समानांतर ही लाखोरी ईटों की 4- 5 फुट चौड़ी दीवार थीl अंदर की ओर कचहरी थी जहां उस समय शाही काजी बैठकर जनता के विवादों का निपटारा किया करता थाl

यह भी कहा जाता है कि मुराद गाजी की मृत्यु के बाद इस सैन्य पड़ाव की ठीक प्रकार से देखभाल नहीं की गईl मुरादनगर में उसके संस्थापक मुराद गाजी की दरगाह विद्यमान हैl प्रतिवर्ष यहां उर्स मुबारक मेला बड़े जोश खरोश के साथ मनाया जाता है मेले में दूरदराज से आए कव्वाल शानदार कव्वालियों को प्रस्तुत करते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु कव्वालियों का आनंद लेते हैं।

 

मुरादनगर में यहीं पर निकट ही चामुंडा देवी का प्राचीन मंदिर है

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