________________________________________  _____________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा- यमुना की धरती पर स्थित महाभारत क्षेत्र  _________________________________________

 

गाजियाबाद जनपद का मोदीनगर शहर एक प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है।

मुगल काल में यह स्थान बेगमाबाद के नाम से जाना जाता था। जानकारों के अनुसार उस समय इस गांव को नवाब जाफर अली ने बसाया था। इस गांव के बसने के कुछ ही समय बाद दिल्ली सल्तनत के ऊपर बेगम समरू का अत्यधिक प्रभाव हो गया। उसके बाद ही इस गांव को बेगमाबाद कहा जाने लगा था। आज भी मोदीनगर के पास बेगमाबाद गांव बसा हुआ है।

मुगल काल के अंतिम समय से ही यहां मराठा सैनिक यहां आकर पड़ाव डालते थे। मोदीनगर में आज भी एक स्थान पड़ाव नाम से जाना जाता है। आजकल यहां पर श्रमिक कॉलोनी बसी हुई है।

बेगम समरू के समय में ही इस स्थान बेगमाबाद में मराठा सैनिकों की दिलचस्पी को देखते हुए ग्वालियर की महारानी बलविया ने बेगमाबाद के बाहर पूर्व दिशा में मराठा सैनिकों के लिए  शिव मंदिर और पीने के पानी के लिए कुएं को बनवाया था जो आज भी मोदीनगर में छत्री वाला मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।

इस क्षेत्र की धरती बहुत उपजाऊ है। बहुत पहले से ही यहां गन्ने की फसल अधिक बोई जाती है।  गन्ने से गुड और खांड बनाने के कोल्हू ही यहां लगाए जाते थे।

इस क्षेत्र के विकास का समय सन 1933 में उस समय आया जब स्वर्गीय रायबहादुर गुर्जर मल मोदी उद्योग लगाने के लिए भूमि की तलाश में उपयुक्त स्थान को ढूंढते – ढूंढते अपनी पहचान के हापुड़ में रहने वाले सेठ मुसद्दी लाल के पास हापुड़ जाते समय उनकी नजर इस स्थान पर पड़ी। उन्होंने यहां की जमीन को गन्ने के लिए उपयुक्त देखते हुए और इस स्थान के निकट रेलवे स्टेशन व मुख्य सड़क मार्ग आदि की सुविधा को मद्देनजर रखते हुए इसी स्थान पर चीनी उद्योग लगाने का मन बना लिया। हालांकि जब वे हापुड़ सेठ मुसद्दीलाल के पास मिलने पहुंचे तो उन्होंने चीनी उद्योग लगाने के लिए उन्हें मेरठ या मुजफ्फरनगर को उपयुक्त स्थान बताया था। परंतु फिर भी तीव्र नजर और बुद्धि के स्वर्गीय गुजरमल मोदी ने अपने मन के फैसले को अटल रखा और 24 सितंबर 1933 को यहां बेगमाबाद गांव के उत्तर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर रेलवे स्टेशन के ठीक पीछे चीनी उद्योग की की स्थापना की। इस क्षेत्र में चीनी उद्योग लगने से आसपास का ग्रामीण क्षेत्र भी विकास की ओर कदम बढ़ाने लगा।

चीनी उद्योग के ठीक प्रकार से चलने पर 5 वर्ष के बाद ही समय को पहचानने के पारखी गुजरमल मोदी ने कुछ ही समय के अंतराल में एक के बाद एक उद्योग लगाने की झड़ी लगा दी। उन्होंने यहां वनस्पति घी, तेल मिल, बिस्कुट फैक्ट्री, बिना चर्बी वाला साबुन, रंग रोगन प्लांट, ग्लीसरीन प्लांट, क्लॉथ मिल आदि की स्थापना करके मोदीनगर को देश की प्रसिद्ध औद्योगिक नगरी के रूप में खड़ा कर दिया।

कपड़ा मिल के बड़े स्वरूप में जिसमें रुई की धुनाई से लेकर धागा बनाना, कपड़ा बनाना और उस की रंगाई छपाई सब कुछ तैयार होकर बाजार में जाने लगा।

उद्योग लगाने के साथ-साथ इस नगर की सामाजिक उन्नति के लिए उन्होंने यहां कई शिक्षण संस्थाएं, महिला शिक्षा के लिए रुकमणी मोदी महिला इंटर कॉलेज की स्थापना, चिकित्सालय की स्थापना, नेत्र चिकित्सालय और श्रमिकों के लिए विशाल श्रमिक कॉलोनियों को भी बनवाया। इस क्षेत्र के ही नहीं बाहर के बहुत से लोगों को भी यहां रोजगार प्राप्त हुआ।

मोदीनगर में भव्य – विशाल श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर की स्थापना की गई।

रायबहादुर गुजरमल मोदी की मृत्यु के कुछ ही समय बाद मोदी घराने में बंटवारे को लेकर आपसी विवाद उठ खड़ा हुआ। परिणाम स्वरूप विभिन्न  कारणों से मोदी उद्योग खोखले होते चले गए तथा धीरे धीरे बंद होने लगे। इस प्रसिद्ध औद्योगिक नगरी को लोग उजाड़ नगरी भी कहने लगे लेकिन देश की यह उद्योग नगरी फिर से उन्नति की ओर बढ़ने लगी है।

मोदीनगर शिकंजी और ब्रेड पकोड़े के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। मोदीनगर के राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित होने के कारण यहां हर समय पर्यटक और यात्रियों की भारी भीड़ लगी रहती है।

 

 

 

 

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