_______________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.- भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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भारत की पवित्र तीर्थ स्थली हरिद्वार में ऋषि मुनियों की तपोस्थली सप्त सरोवर भूपतवाला में मंदिरों की अनवरत श्रंखला के बीच माता लाल देवी भवन ‘भारत दर्शन मंदिर’उनके भक्तों ने स्थापित कराया है।

भारत दर्शन मंदिर में कटरा जम्मू के माता वैष्णो देवी गुफा एवं पवित्र अमरनाथ की गुफा को एकदम उसी आकार- प्रकार की गुफाओं के रूप में बनाया गया है। यह मंदिर हरिद्वार में वैष्णो माता मंदिर गुफा के नाम से प्रसिद्ध है।

कहते हैं कि माता लाल देवी को वैष्णो देवी ने स्वप्न में आकर उनसे हरिद्वार में वास करने की इच्छा व्यक्त की थी। माता लाल देवी ने प्रण लिया था कि वे माता वैष्णो देवी का कटरा के समान मंदिर यहां हरिद्वार में बनाएंगी, जिसे उन्होंने अपने भक्तों के सहयोग से साकार रूप दिया।

इस मंदिर में प्रवेश के उपरांत बाएं ओर गंगा देवी की विशाल मूर्ति बनाई गई है। इसके पास से ही वैष्णो देवी की गुफा प्रारंभ होती है। वैष्णो देवी मंदिर को तीन मंजिलों में इस प्रकार घुमा कर बनाया गया है कि दर्शनार्थ जाने वाले श्रद्धालुओं को पहाड़ी पर चढ़ने का एहसास होने लगता है। जम्मू कश्मीर की वैष्णो देवी की भांति एकदम उसी आकार- प्रकार की गुफाएं बनाई गई हैं। इन गुफाओं में भी मूल गुफाओं की तरह से पानी बहता रहता है। श्रद्धालुओं को गुफा में लेटते हुए काफी झुककर मंदिर तक जाना पड़ता है। राजस्थान एवं दक्षिण भारत के कुशल कारीगरों ने वैष्णो देवी गुफा को साक्षात हरिद्वार में उतार दिया है।

सीढ़ियों से चढ़ते ही गुफा पार करके माई देवी का मंदिर आता है। उसके पश्चात बाणगंगा का बड़ा ही मनोहारी दृश्य दर्शाया गया है, जिसके बाएं और विशाल पर्वत श्रृंखलाएं व कल-कल की ध्वनि करती नदियां और झरने बनाए गए हैं। इसके पश्चात चरण पादुका का मंदिर आता है, तत्पश्चात गर्भजून व अर्धक्वांरी की अनुकृति बिल्कुल वैसे ही बनाई गई है जैसी कटरा क्षेत्र में स्थित वैष्णो देवी के रास्ते में है। इसी श्रंखला में आगे हाथी मत्था व सांझी छत का भी सुंदर निर्माण किया गया है। वैष्णो देवी मंदिर के प्रारंभ में वह गुफा बनाई गई है जो कि प्रवेश द्वार कहलाती है। यहीं भैरव का धड़ बनाया गया है, प्रत्येक श्रद्धालु दर्शनार्थी को इसके ऊपर से गुजरना पड़ता है। गुफा में नीचे पानी भरा गया है तथा बाईं तरफ पांच पांडव, कलपतरु, सप्त ऋषि, कामधेनु, शेर का पंजा, शेषनाग आदि का निर्माण किया गया है। इसके पश्चात वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य स्थल आता है। ‌मंदिर में मां महासरस्वती, मां महालक्ष्मी, मां महाकाली की पिंडियों के दर्शन होते हैं और श्रद्धालु दर्शनार्थी स्वयं को पूर्णतया वैष्णो देवी कटरा की गुफा में ही महसूस करते हैं।

कलाकारों की कल्पनाशीलता ने इस मंदिर को वैष्णो देवी मंदिर के समतुल्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। यहां से बाहर निकलते हुए श्रीधर की प्रतिमा बनी हुई है जिन्होंने सर्वप्रथम वैष्णो देवी गुफा मंदिर की खोज की थी।

वैष्णो देवी गुफा मंदिर की तरह ही यहां तीसरी मंजिल पर पवित्र अमरनाथ गुफा का निर्माण भी किया गया है। शिवलिंग पर बूंद बूंद पानी टपकता रहता है और बर्फ के रूप में जम जाता है।

इन दोनों गुफाओं में आधुनिक संयंत्रों की सहायता से वही माहौल और तापमान बनाया गया है जो मूल स्थानों पर होता है।निर्माण कार्य में आधुनिक टायलों, पत्थरों, शिलाओं, सिरेमिक, प्लास्टर ऑफ पेरिस, पीतल, तांबा लोहे आदि का कलात्मक प्रयोग हुआ है। विद्युत से चलने वाले घंटे नगाड़े लगाए गए हैं।

गुफा के अंदर जंगली दृश्य उपस्थित करने के उद्देश्य से कुछ चेतना बोधक जंगली जीव जंतु बनाए गए हैं इसके पश्चात काले गोरे भैरव, गंगा-जमुना, बद्री पंचायत कुबेर (नर-नारायण, गरुड़, लक्ष्मी इत्यादि) की प्रतिमाएं स्थापित हैं।

समस्त भारत के तीर्थ स्थलों को एक ही स्थान पर समेटने के उद्देश्य से प्रथम तल पर स्थित विशाल हॉल में उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और मध्य भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में स्थित देवी- देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई है। चारों धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ, राजस्थान के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथ जी का मंदिर, उड़ीसा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर, कश्मीर में बना खीर भवानी का मंदिर, वैतरणी नदी, शेषनाग की झील, झूलेलाल, हनुमान जी, राम दरबार, लाल देवी दुर्गा, कन्याकुमारी, शिव परिवार, दक्षिण भारत के श्री रंगजी, मीनाक्षी देवी, तिरुपति बालाजी, रामेश्वर के मंदिरों को यहां प्रदर्शित किया गया है। नेपाल के काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ के मंदिर की भी यहां अनुकृति बनाई गई है।भवन के ऊपर श्री गणेश जी तथा पवन पुत्र हनुमान जी विराजमान है जो दूर से ही नजर आ जाते हैं। इतने सारे तीर्थ स्थलों को एक ही स्थान पर समाहित देखकर श्रद्धालु एवं पर्यटक आहलादित हो उठते हैं। भारत दर्शन मंदिर वास्तव में एक अनूठा व अद्वितीय मंदिर है।

‌ मंदिर भवन की प्रेरणा स्रोत सुप्रसिद्ध धर्मज्ञ माता लाल देवी का जन्म वर्तमान पाकिस्तान के कसूर क्षेत्र में हुआ था।उनका परिवार माता चिंतपूर्णी में अपार श्रद्धा रखता था। जब ये मात्र 4 वर्ष की थी तभी इन पर माता की सवारी आ गई थी और तभी से इनमें देवी अंश प्रकट होने लगे थे तथा धीरे-धीरे उनके सैकड़ों भक्त बन गए थे। यह अपनी देवी शक्ति का उपयोग मात्र भीड़ जमा करने या चमत्कार दिखाने के उद्देश्य से नहीं करती थीं। विभाजन के पश्चात लाल देवी कसूर से अमृतसर आकर बस गईं थीं।शुरू से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति की रही सादा भोजन और केवल फलाहार पर ही रहती। उन्होंने 5 साल की उम्र में ही अन्न त्याग दिया और दूध व अल्पाहार पर निर्भर रही। 12 वर्ष की उम्र में घर छोड़कर इनका परिवार हरिद्वार आ गया। इन की करुण पुकार पर मां गंगा ने उन्हें दिव्य दर्शन दिए गंगा से जुड़ने के बाद उनका पूरा जीवन हरिद्वार से जुड़ गया। मान्यता है कि एक बार स्वप्न में उन्हें दिखाई दिया कि बहुत से ऐसे लोग हैं जो मजबूरी वश माता वैष्णो देवी की कठिन चढ़ाई नहीं चढ़ पाते। उन भक्तों के लिए उसी तरह की पवित्र गुफा का निर्माण कर उन्हें कल-कल बहते जल, यात्रा के विभिन्न पड़ाव, तीनों पिंडियों के दर्शन कुछ ऐसे कराए जाएं जिससे उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हों,तभी से हरिद्वार में इस मंदिर का निर्माण हुआ। इस मंदिर में जहां एक और भव्य तीर्थ स्थलों की पवित्रता है, वहीं दूसरी ओर उत्कृष्ट कोटी की कलात्मकता के दर्शन होते हैं। इस भव्य पवित्र मंदिर में दिन-रात देश-विदेश के श्रद्धालुओं एवं पर्यटक का तांता लगा रहता है। भारत दर्शन भवन में यात्रियों के ठहरने के लिए बहुत से कमरे बनवाए गए हैं। इस भवन की कैंटीन में लागत मूल्य पर देसी घी की पूरियां समोसे व अन्य मिठाइयां उपलब्ध हैं। यहां तैयार खाद्य पदार्थों पर कोई लाभ नहीं लिया जाता। हरिद्वार के आधुनिक मंदिरों की श्रंखला में यहां हर की पैड़ी के बाद सबसे अधिक दर्शकों की भीड़ रहती है।

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