______________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १०० कि. मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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पहाड़ों की रानी मसूरी के खुशगवार मौसम और बादलों के धरती पर उतर आने के लुभावने नजारों को देखने के लिए सैलानी पर्यटक बड़ी संख्या में यहां आते हैं।

भारत के सबसे ज्यादा लोकप्रिय पहाड़ी सैरगाहों में से एक और पर्यटकों का पसंदीदा स्थान है ‘पहाड़ों की रानी मसूरी’।

भारत में पर्यटन स्थल दिल्ली-आगरा-जयपुर का गोल्डन ट्रायंगल पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय है, इस क्षेत्र में भी इसी तरह का एक बहुत ही लोकप्रिय पर्यटक स्थलों का ट्रायंगल देहरादून-मसूरी-ऋषिकेश स्थित है।

देहरादून जनपद में मसूरी बहुत ही मनोरम तथा प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्वतीय स्थल है। देहरादून की शिवालिक श्रंखला पर लगभग 2005 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह ‘पहाड़ों की रानी’ अतीत में ब्रिटिश शासकों की आरम्भ से ही चहेती रही है। अपनी शीतल आबोहवा और प्राकृतिक दृश्यों के कारण मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है।

दून घाटी वैविध्यपूर्ण रमणीयता से परिपूर्ण है। यह घाटी निकट के गगनचुंबी पर्वत शिखरों तथा देवदार व चीड़ के वृक्षों, हरी-भरी घाटियों का अनुपम सौंदर्य अपने में समेटे हुए है। हिमालय की गोद में बसी हरी-भरी मनभावन मसूरी वर्ष भर पर्यटकों को आकर्षित करती है। गर्मियों के दिनों में मैदानी इलाकों में गर्मी से परेशान लोग इस सुरम्य स्थली में आकर शीतलता अनुभव करते हैं, जबकि सर्दियों में बर्फ की चादर से ढकी मसूरी पर्यटकों को बरबस अपनी ओर खींचती है। गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए बड़े-बड़े सरकारी कर्मचारी देश विदेश के सैलानी यहां बड़ी संख्या में देखे जा सकते हैं।

राजधानी दिल्ली और NCR के सबसे नजदीकी हिल स्टेशन होने के कारण यहां सैलानी पर्यटकों की भारी गहमा-गहमी रहती है। मसूरी के नजदीकी मैदानी इलाकों में गर्मी की तपिश बढ़ने के साथ यहां सैलानियों का तांता लग जाता है।

मार्च महीने के मध्य से मानसून के आने तक इस पर्यटक स्थल पर हर साल एक नया यौवन आता है। मसूरी का हर होटल, यहां की धर्मशालाएं, पर्यटन केंद्र, विश्राम गृह और आवासीय स्थल देश विदेशी पर्यटकों से भर जाते हैं। यहां आने वालों में ज्यादातर नवधनिक वर्ग के लोग होते हैं जो दो-चार दिन की मौज-मस्ती के बाद लौट जाते हैं।

मसूरी का सुरम्य परिवेश नवविवाहित जोड़ों को आकर्षित करता है। यहां आने वाले पर्यटकों में हनीमून मनाने के लिए आने वाले ‘हनीमूनर्स’ की बहुतायत होती है। इन हनीमूनर्स को माल रोड़ की भीड़ हो या कैमल्स बैक रोड़ का एकांत- अपने आसपास की दुनिया से बेखबर ये जोड़े अपने में ही खोए, फिल्मी अंदाज में हाथों में हाथ डाले डोलते या चुंबन, आलिंगन करते दिखाई दे जाते हैं।

मसूरी में स्थाई रूप से निवास करने वाले लोगों की आबादी तो कम ही है लेकिन अप्रैल-मई-जून के महीनों में लाखों में पहुंच जाती है। इन महिनों में तो यहां पैर रखने की जगह भी नहीं मिलती। इन दिनों यहां की माल रोड पर शाम को बड़ी भीड़ होती है।

दिल्ली और NCR के करीब होने से सर्दियों में भी सैलानी यहां बड़ी संख्या में आते हैं। स्नोफॉल देखने के लिए भी बड़ी संख्या में इस इलाक़े के निवासी यहां आते हैं। आजकल तो मौसम का पूर्वानुमान पहले ही पता चल जाता है इसलिए स्नोफॉल का आनंद उठाने के लिए पहले से ही यहां आए हुए पर्यटकों से मसूरी के सभी होटल खचाखच भर जाते हैं।

हरियाली से लकदक मसूरी की पहाड़ियों में मानसून की वर्षा का आनंद लेने का अनुभव भी अविस्मरणीय होता है।

वीकेंड यानी शनिवार‌और रविवार की छुट्टियां बिताने के लिए इन स्थानों से लोगों का हुजूम मसूरी की ओर उमड़ पड़ता है।

मसूरी के लोग पर्यटकों के बल पर ही अपनी आजीविका चलाते हैं। मैदान का नजदीकी हिल स्टेशन होने के कारण यहां पर्यटकों की संख्या हर साल बढ़ती ही रहती है।

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