_____________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ. प्र.-भारत) के १०० कि. मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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प्राकृतिक सौंदर्य के अनूठे दृश्यों को मसूरी की पहाड़ियों पर देखा जा सकता है। इसी प्राकृतिक सौंदर्य से मसूरी पर्यटकों को अपने आंचल में आने के लिए आकर्षित करती रही है।

हरे-भरे मनोरम पहाड़, भांति-भांति के पक्षी विविध प्रकार की वनस्पतियों से लदी हुई मसूरी की पहाड़ियां न केवल मानवीय भावनाओं को व्यक्त करने के लिए प्रेरित करती रहती हैं,बल्कि अनेक साहित्यकारों, वैज्ञानिक एवं शोधकर्ताओं को भी आकर्षित करती रही है।

मसूरी की पहाड़ियों पर हरियाली सबसे अधिक दिखलाई पड़ती है। कहते हैं कि मसूरी हिमालय पर्वत श्रृंखलाल में सबसे हरी-भरी पहाड़ी है। चारों तरफ से पहाड़ों की चोटियों ने मसूरी को घेरा हुआ है। यहां की पहाड़ियों में प्राकृतिक रूप से तरह तरह के फूल खिलते हैं और चीड़, देवदार तथा अन्य कई प्रकार के जंगली वृक्षों से मसूरी की पहाड़ियां ढकी रहती हैं। शायद इसी कारण इतनी हरियाली और कहीं दिखलाई नहीं पड़ती। आज भी मसूरी जैसी प्राकृतिक छटा किसी अन्य स्थान पर देखने को नहीं मिलेगी। मसूरी की पहाड़ियां देश-विदेश के पर्यटकों को स्वर्ग जैसी प्रतीत होती है और वे साल दर साल मसूरी के भरे-भरे पहाड़ियों की नैसर्गिक छटा को निहारने के लिए आते हैं।

मसूरी की पहाड़ियां इतनी हरी-भरी क्यों है? यह जिज्ञासा हर किसी के मन में उठेगी, तो इसका उत्तर है कि यहां के पहाड़ मिट्टी एवं चूना पत्थरों से बने हैं। यह एक प्रकार की कच्ची पहाड़ियां है। ये पहाड़ अन्य स्थानों के कठोर पत्थरों से बने हुए पहाड़ों से अलग प्रकार के हैं। ये पहाड़ मिट्टी तथा चूना पत्थरों से बने हुए होने के कारण ही मसूरी के पहाड़ों पर सबसे अधिक हरियाली नजर आती है। वैसे तो यहां पूरे वर्ष भर हरियाली छायी रहती है लेकिन फिर भी यहां अक्टूबर का महीना तो हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, इस समय तो यहां के पहाड़ों पर कहीं एक इंच भूमि भी खाली दिखाई नहीं देती। मसूरी के जंगल मसूरी की हरियाली ही इसका आकर्षण है।

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