_____________________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ. प्र.-भारत) के १०० कि.मी. के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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मसूरी एक ऐसा स्थान जो वास्तव में खूबसूरत नगरी ही नहीं वरन अपने भीतर शीतल हवा, शांत और अनामिक सौंदर्य छुपाए हैं। साल भर मसूरी के सौंदर्य को निहारने के लिए पर्यटकों का हुजूम उमड़ता है। पर्यटक जब भी मसूरी आएं तो इसके आस-पास के पर्यटन स्थल भी घूमना न भूलें-नहीं तो आपका मन बार-बार इस गलती के लिए कचोटता रहेगा।

*** कैम्पटी फॉल मसूरी से लगभग 15 कि.मी. दूर चकराता मार्ग पर एक जलप्रपात है। चिलचिलाती धूप में इस झरने के निर्मल जल में स्नान पल भर में ही सारी थकान उतार देता है।

इस मनोरम झरने को देखने जाने से पहले सुरम्य हिमालय पर्वत श्रृंखलाओं के साथ घने वनों, पवित्र यमुना नदी की घाटी तथा सांस्कृतिक परंपरा के धनी जौनपुर क्षेत्र के दर्शन होते हैं।

ब्रिटिश शासन काल के समय से ही कैम्पटी गांव के निकट होने पर जलप्रपात का नाम ‘कैम्पटी फॉल’ प्रचलित है। ऊंची चिकनी चट्टान पर फिसलते पानी की छोटी-छोटी धाराएं और कहीं अधिक एकत्र धाराओं के समूहों से बना है कैम्पटी फॉल जलप्रपात। इस जलप्रपात को देखकर प्रकृति के अद्भुत कलारुप के प्रत्यक्ष प्रमाण की अनुभूति सहज ही मन में बैठ जाती है। छोटे-छोटे पहाड़ी दर्रों के बीच बना यह प्राकृतिक कलारूप किसी चित्रकार की अद्भुत रचना सा लगता है। ‌

पर्यटक कैम्पटी फॉल के निकट ही स्थित गांवों का अवलोकन कर यहां की संस्कृति और रहन-सहन से परिचित हो सकते हैं।

*** यमुना पुल – मसूरी से चकराता बड़कोट यमुनोत्री मार्ग पर केवल 26 कि. मी. दूर स्थित है। यहां पर्यटक यमुना के ठंडे जल प्रवाह के दर्शन करते हैं। यहां पर्यटक राफ्टिंग इत्यादि का आनंद भी उठा सकते हैं। गढ़वाल में जो 52 गढ़ हैं, उनमें से एक विराल्टा गढ़ अगलाड़ पुल से केवल एक कि.मी. की दूरी पर स्थित है।

*** अलगाड़ गुफाएं – यह मनोरम स्थान कैम्पटी से 7कि.मी. की दूरी पर यमुनोत्री रोड़ पर स्थित है। जहां पर अलगाड़ नदी के समीप मेलामाइन्ट की 3 प्राकृतिक गुफाएं हैं। इन गुफाओं के अंदर सुंदर मूर्तियां बनी हुई है और यहां एक प्रकृति का अद्भुत झरना भी देखने को मिलता है

*** थत्यूड़ यह स्थान मसूरी से केवल 34 कि.मी. दूर है और पर्यटक यहां से नाग टिब्बा सहित देवल सारी आदि स्थानों की ट्रेकिंग का आनंद ले सकते हैं।

इस स्थान के निकट ही ओतड का प्राचीन नाग मंदिर तथा इसके अलावा भवान के समीप 11 वीं शताब्दी का बना हुआ सत्यनाथ मंदिर जैसे प्राचीन और दर्शनीय धार्मिक स्थल विद्यमान हैं।

*** नाग टिब्बा – मनोरम छटा से भरपूर इस स्थान पर थत्यूड़ एवं पंतवाड़ी से सीधे ट्रैकिंग के द्वारा जाया जाता है। इस स्थान से हिमालय पर्वत के जैसे दर्शन होते हैं वैसे दर्शन किसी अन्य नहीं होते हैं।

*** धनोल्टी प्राकृतिक संपदा से धनी यह क्षेत्र एक बेहद सुंदर पर्यटन स्थल है। मसूरी के बहुत ही निकट केवल 25 कि.मी. की दूरी पर यह स्थान मसूरी-टिहरी रोड पर स्थित है। प्रकृति के सानिध्य से भरपूर इस स्थान पर सैलानी हिमालय के दर्शन व एकांत और आनंद का अनुभव करेंगे।

मसूरी से धनोल्टी जाते समय घने वनों से घिरे पहाड़ी रास्तों से गुजरते हुए पर्यटक दून घाटी के भव्य दृश्यों का अवलोकन करते हुए तथा बुरांश खंड आदि स्थलों से गुजरते हुए पर्यटक धनोल्टी पहुंचते हैं।

धनोल्टी में फूल पट्टियों से सुसज्जित सीढ़ीनुमा खेत, लंबे देवदार के वृक्ष पर्यटकों का स्वागत करते हैं। पर्यटकों को यहां सामने ही दिखाई देती भव्य हिमालय की पर्वत श्रंखलाओं और दुर्गम पहाड़ों की पंक्तियां उनको इस स्थान पर देवभूमि के अस्तित्व की अनुभूति कराती हैं।

*** सुरकंडा देवी का प्रसिद्ध मंदिर धनोल्टी से थोड़ी ही दूरी पर है और फिर चंबा, नई टिहरी जाने का मार्ग है। यह स्थान मसूरी-टिहरी मार्ग पर धनोल्टी से 7 कि.मी. दूरी पर स्थित कद्दूखाल से लगभग 2कि.मी. पैदल चलने दो उपरांत 10 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां श्रद्धालु पर्यटक मां सुरकंडा देवी के दर्शन करते हैं। मान्यता है कि माता के दरबार में सच्चे मन से की गई हर मनोकामना देवी मां अवश्य पूरी करती हैं।

इस स्थान पर पर्यटक हिमालय का एक विहंगम दृश्य देखते हैं।

*** भदराज मंदिर – इस स्थान पर भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलभद्र जी का प्राचीन मंदिर है। यहां से हिमालय का एक विहंगम दृश्य दिखाई देता है तथा यहां से जौनसार बावर और जौनपुर क्षेत्र के दृश्य भी दिखाई देते हैं। प्रत्येक वर्ष अगस्त माह में यहां मेला भी लगता है।

*** विराटगढ़ – इस स्थान के साथ महाभारत काल की स्मृति जुड़ी हुई है। अज्ञातवास के समय पांडवों ने यहां शरण ली थी। मसूरी-चकराता रोड पर यह स्थान नाग थात से केवल 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह खूबसूरत स्थान अपने गर्भ में इतिहास और संस्कृति को छुपाए हुए है। यहां पर राजा विराट के गढ़ सहित कई बड़ी-बड़ी सुरंगें स्थित है तथा उनके कई अवशेष आज भी देखे जा सकते हैं। इन सब का संबंध पांडवों से जोड़कर देखा जाता है। यहां पर्यटक महाभारत काल की क‌ई कथाओं और संस्कृति परंपराओं की जानकारी के जीवंत उदाहरणों से परिचित हो सकते हैं।

*** चकराता –

*** लाखामंडल –

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