__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १००कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
_____________________________________

इस क्षेत्र में मकर सक्रांति का पर्व बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से मनाया जाता है। इस क्षेत्र में इस दिन गंगा जी में स्नान करने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, गढ़मुक्तेश्वर-बृजघाट,शुकतीर्थ, गंगा बैराज पर लाखों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं।

मकर सक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति सनातन हिंदू धर्म के सबसे बड़े पर्वों में से एक पर्व है। सूर्य देवता इस दिन से दक्षिणायन से उत्तरायण होने लगते हैं। ठंड से परेशान लोगों के लिए भी यह राहत भरा दिन है। क्योंकि इसी दिन से मौसम करवट लेना शुरू कर देता है और मौसम हल्का-हल्का गर्म होना शुरू हो जाता है। इसके बाद ही बसंत ऋतु का आगमन होता है।

इस दिन सूर्य देव की पूजा उपासना की जाती है। शास्त्रीय सिद्धांतानुसार सूर्य की पूजा में श्वेतार्क तथा रक्त रंग के पुष्पों का विशेष महत्व है। श्रद्धालु इस दिन सूर्य भगवान की पूजा करने के साथ-साथ सूर्य को अर्थ देते हैं। मकर सक्रांति के दिन दान करने का विशेष महत्व है। आज के दिन अन्य दिनों की तुलना में दान का महत्व बहुत बढ़ जाता है। श्रद्धालु इस दिन यथासंभव किसी गरीब को अन्नदान, तिल, गुड़ का दान करते हैं। तिल या फिर तिल के बने लड्डू व तिल के अन्य खाद्य पदार्थ भी दान करना श्रद्धालु शुभ मानते हैं।

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर गंगा यमुना एवं अन्य नदियों में स्नान का बहुत महत्व है। श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान के साथ ही पूजा-अर्चना, दान कर पुण्य अर्जित करते हैं।

मकर सक्रांति पर्व के साथ ही खरमास की समाप्ति होने से हिंदुओं में मांगलिक शुभ कार्यों की शुरुआत भी हो जाती है।

सूर्य भगवान के दक्षिणायन से उत्तरायण होने पर होने वाले गंगा स्नान को अन्य विशेष पर्वों पर होने वाले सभी स्नान में प्रमुख माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु गंगा जी में स्नान करने के लिए इस क्षेत्र में स्थित गंगा के तटों पर उमड़ पड़ते हैं।

इन दिनों इस क्षेत्र में भारी ठंड पड़ती है इसके बावजूद मकर सक्रांति के अवसर पर गंगा जी में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की सबसे अधिक भीड़ गंगा जी के तटों पर जुटती है।

* हरिद्वार में गंगा के घाटों पर मकर संक्रांति के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। पहले दिन से ही भारी कोहरे और ठंड में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचने लगते हैं। रात्रि से ही श्रद्धालुओं के डग हर की पैड़ी की ओर बढ़ने लगते हैं। जैसे-जैसे दिन चढ़ना शुरू होता है हर की पैड़ी पर भीड़ बढ़ने लगती है। तमाम लोग पुण्य काल का इंतजार किए बिना ही ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना शुरू कर देते हैं।

हरिद्वार की हर की पैड़ी के अलावा बिरला घाट, प्रेमनगर आश्रम घाट, विश्वकर्मा घाट, लव-कुश घाट, सर्वानंद घाट आदि तमाम घाटों पर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ता है।

गंगा जी में स्नान के बाद श्रद्धालु मंदिरों के दर्शन और सनातनी मान्यता के अनुसार सूर्य भगवान को अर्द्ध देकर गंगा पूजन और गंगा अभिषेक भी करते हैं। बाद में श्रद्धालु तिल गुड़ वस्त्र आदि का दान कर खिचड़ी का भोग लगाते हैं।

कई सामाजिक संगठन मकर सक्रांति के अवसर पर हरिद्वार में खिचड़ी का प्रसाद वितरित करते हैं।

* ऋषिकेश के गंगा तटों, रुड़की एवं ज्वालापुर गंगनहर के घाटों पर भी भारी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही मकर सक्रांति का स्नान करने के लिए पहुंचते हैं। लक्सर क्षेत्र के श्रद्धालु भी वहां के गंगा के विभिन्न घाटों पर पहुंचकर गंगा स्नान और पूजा अर्चना करते हैं।

* शामली जनपद के कैराना क्षेत्र में आसपास के इलाकों एवं यमुना पार के हरियाणा क्षेत्र से आए श्रद्धाल मकर संक्रांति के अवसर पर यहां यमुना तट पर पहुंचकर यमुना जी में पवित्र स्नान कर सूर्य को आर्द्ध अर्पण करते हैं। इसके साथ श्रद्धालु यहां के मंदिर में पूजा अर्चना कर दान दक्षिणा भेंट करते हैं।

* मुजफ्फरनगर जनपद में पौराणिक तीर्थस्थल शुकतीर्थ में दूरदराज क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालु मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा जी में पवित्र डुबकी लगाते हैं। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु शुकतीर्थ के पौराणिक स्थान शुकदेव मंदिर के दर्शन एवं प्राचीन अक्षयवटवृक्ष की परिक्रमा कर धागा बांधकर अपने घर परिवार की खुशहाली की मनोकामना मांगते हैं।

श्रद्धालु तीर्थ नगरी शुकतीर्थ के दंडी आश्रम, हनुमतधाम, गणेशधाम, शिवधाम, दुर्गाधाम, गंगा मंदिर, विश्वनाथ महादेव मंदिर, पांडव कालीन पार्वती मंदिर, नवग्रह शनि धाम आदि मंदिरों में भी पूजा अर्चना करते हैं।

शिक्षाऋषि ब्रह्मलीन स्वामी कल्याण देव जी महाराज की समाधि और कारगिल शहीद स्मारक पर भी यहां आने वाले श्रद्धालु तीर्थयात्री पहुंचते हैं और उन्हें पुष्प अर्पित कर शत-शत नमन करते हैं।

यहां के दंडी आश्रम, शुकदेव आश्रम, हनुमतधाम, गणेशधाम, शिवधाम, पितांबरापीठ आश्रम, बाबा खिचड़ी वाले उदासीन आश्रम, गौडिया पीठ आश्रम, राम आश्रम, महाशक्ति सिद्ध पीठ आश्रम, शनिधाम, गुरुकुल संस्कृत आश्रम, परमधाम आश्रम, मानव निर्माण आश्रम तथा यहां की धर्मशालाओं में श्रद्धालुओं को खिचड़ी के प्रसाद का वितरण किया जाता है। वहीं श्रद्धालु स्वामी ओमानंद, माता राज नंदेश्वरी, महाराज स्वामी गुरुदत्त महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद सरस्वती महाराज, स्वामी महेश्वर महाराज, महामंडलेश्वर गोपाल आचार्य महाराज, स्वामी कृपाल दास महाराज, स्वामी वेद दास महाराज, स्वामी गीतानंद महाराज, स्वामी भक्ति भूषण महाराज आदि संतों से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

* बृजघाट-गढ़मुक्तेश्वर – मकर संक्रांति के पावन पर्व पर इस तीर्थ नगरी के पवित्र गंगा तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु कड़ी ठंड की परवाह न करते हुए पहुंचते हैं। गंगा जी में पवित्र डुबकी लगाकर सूर्य भगवान को अर्द्ध देते हैं। गंगा जी के तट पर विभिन्न धार्मिक संस्कार संपन्न कर दान दक्षिणा देकर पुण्य अर्जन कर यहां के विभिन्न मंदिरों के दर्शन करते हैं।

इस दिन सूर्य भगवान मकर राशि में प्रविष्ट होकर अपनी दक्षिणायन गति को छोड़कर उत्तरायण हो जाते हैं। सूर्य देव के छह माह के उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने के कारण दिन लगातार बढ़ने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं उसी उपलक्ष में मकर सक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस दिन से ऋतु परिवर्तन भी हो जाता है।

इस पूरे क्षेत्र में मकर संक्रांति का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। जगह-जगह हवन पूजन के बाद खिचड़ी का प्रसाद बांटा जाता है। क‌ई स्थानों पर ताहरी, चाय- पकौड़ी बांट कर लोगों को प्रसाद ग्रहण कराया जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *