_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत) के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मुजफ्फरनगर जनपद में रामराज कस्बे के पास महाभारत कालीन महर्षि दुर्वासा की तपोभूमि एवं उनके द्वारा स्थापित शिव मंदिर फिरोजपुर गांव में स्थित है।

मान्यता है कि यह स्थान पांडवकालीन है और इस स्थान की कथा महाभारत काल से जुड़ती है।

सनातन हिंदू धर्म के धार्मिक ग्रंथों में अनेक ऐसी कथाएं हैं जिनसे पता चलता है की महर्षि दुर्वासा बहुत क्रोधित स्वभाव के ऋषि थे। छोटी-छोटी बातों पर ही वे किसी से भी रुष्ट होकर उसे श्राप दे देते थे।

इस स्थान पर महर्षि दुर्वासा ने अपने क्रोध को शांत करने के लिए कठोर तपस्या की थी। यह स्थान महर्षि दुर्वासा की तपस्थली है।

मान्यता है कि इस स्थान पर ज‌ब महर्षि दुर्वासा तपस्या कर रहे थे उसी दौरान ही कौरवों और पांडवों के बीच महाभारत का युद्ध चल रहा था। उस समय अपने-अपने पुत्रों की विजय श्री का आशीर्वाद लेने के लिए कौरवों की माता गांधारी और पांडवों की माता कुंती दुर्वासा ऋषि से आशीर्वाद लेने यहां आई थी। कहते हैं कि उसी समय आकाशवाणी हुई थी कि जिस किसी के भी पक्ष की ओर से यहां शिवलिंग पर पहले फूल चढेंगे उसी को महाभारत के युद्ध में विजय श्री मिलेगी। तब पांडवों की ओर से देवराज इंद्र ने आकाश से शिवलिंग पर फूलों की वर्षा कर पांडवों को विजयश्री का आशीर्वाद दिलाया था।

बाद में यह तपोभूमि वीरान पड़ी रही। इस स्थान पर झाड़-झंखाड़ आने से यह लोगों की दृष्टि से ओझल हो गई। महाभारत कालीन शिवलिंग उस समय लोगों के सामने आया जब फिरोजपुर गांव के कुछ ग्वाले गाय चराने के लिए यहां पास के रास्ते से होकर जंगल में जाते थे। बताते हैं कि गायों के झुंड से निकलकर एक बछिया रोजाना अपने थनों से एक पत्थर पर दूध की धारा गिराती थी। एक दिन इस घटना को देखकर ग्वाले आश्चर्य में पड़ गए। ग्वालों ने इस चमत्कार को गांव में कुछ लोगों को बताया। जे बात पूरे गांव व आसपास के क्षेत्रों में फैल गई। इस बात की चर्चा गांव वालों के द्वारा उस समय के जमीदार हैदर अली तक भी पहुंची। उसने उस पत्थर को उखड़वाकर फेंकने के लिए अपने आदमी वहां भेजें। काफी गहरी खुदाई करने के बाद वे उस पत्थर को उखाड़ नहीं पाए बाद में उस पत्थर पर आरा भी चलवाया। लेकिन वे शिवलिंग का कुछ नहींं बिगाड़ पाए और उनके सभी प्रयास विफल रहे। कहा जाता है बाद में उनके परिवार का नामोनिशान मिट गया। उनके द्वारा इस शिवलिंग पर की गई बर्बरता के निशान अभी भी देखे जा सकते हैं।

फिरोजपुर गांव में स्थित शिवलिंग की इस क्षेत्र में बहुत मान्यता है। यह मंदिर देश के लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। प्रति वर्ष श्रावण और फागुन माह की महाशिवरात्रि पर यहां लाखों श्रद्धालु कांवड़िए पैदल गंगाजल लाकर प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

इस सिद्धपीठ शिव मंदिर की एक चमत्कारिक विशेषता यह है कि इस अष्टकोणिय मंदिर में स्थित शिवलिंग खुले आसमान के नीचे स्थित है। मंदिर का गुंबद बनवाने के लिए कई बार छत बनवाई गई परंतु यहां विराजमान भगवान शंकर को शायद यह पसंद नहीं और मजबूत से मजबूर छत भी हर बार अपने आप गिर गई।

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल कांवड़ मेले का आयोजन होता है। इस अवसर पर देश के कोने कोने से आए श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

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