__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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कृष्णा नदी –

इस क्षेत्र में बहने वाली कृष्णा नदी का संबंध महाभारत काल से है। कृष्णा नदी के संबंध में किवदंती है कि महाभारत काल में पांडव वनवास के समय इस क्षेत्र में आए थे। इस क्षेत्र में भ्रमण के समय अर्जुन ने द्रौपदी के स्नान के लिए धरती में बाण मारकर कृष्णा नदी की उत्पत्ति की थी, बाण मारने से निकली जलधारा में द्रौपदी ने स्नान किया था। इसी जलधारा ने नदी का रूप धारण कर लिया। बाद में इस जलधारा को कृष्णा के नाम से पुकारा जाने लगा।

कृष्णा नदी सहारनपुर जनपद में रामपुर मनिहारान के पास एक छोटे से गांव कृष्णानगर से एक छोटे से जलस्रोत के रूप में प्रारंभ होकर विशाल कृष्णा नदी के रूप में प्रसिद्ध हो गई। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर से बहती हुई यह नदी बागपत जनपद में बरनावा लाक्षागृह के पास हिंडन नदी में संगम होने के बाद यह हिंडन नदी का अभिन्न अंग बन जाती है।

कृष्णा नदी सभ्यताओं की जननी है। प्राचीन काल में कृष्णा नदी के तट पर सिंधु घाटी सभ्यता की तरह ही एक विकसित सभ्यता के लोग निवास करते थे। इसके प्रमाण बरनावा लाक्षागृह के विशाल टीलों में पुरातत्व महत्व के प्राप्त अवशेषों से मिलते हैं।इस क्षेत्र में और भी कई स्थानों पर विशाल प्राचीन पुरातत्व महत्व के टीले स्थित है जिनसे पुरातत्व महत्व की महत्वपूर्ण सामग्री प्राप्त हो सकती है।

कुछ दशक पहले तक कृष्णा नदी लहलहाती लहरों के साथ बहती नदी थी लेकिन आज सूख कर विलुप्त होती नजर आ रही है।

कृष्णा नदी साफ और स्वच्छ जल के लिए प्रसिद्ध थी। उस समय कृष्णा नदी के स्वच्छ पानी से आसपास के इलाके गुलजार रहते थे। गांव कस्बों के लोग इस नदी के ठंडे पानी में डुबकी लगाकर आनंद का अनुभव करते थे वहीं पशु-पक्षी भी अपनी प्यास इस नदी के स्वच्छ जल को पीकर बुझाते थे। किसानों की हजारों बीघा फसलें इसी के पानी से लहलहाती थी। किसान इसके पानी से अपने खेतों की फसलों को सींचते थे।

लेकिन अब इस नदी के आसपास स्थापित मिलों द्वारा गंदा पानी छोड़े जाने से यह एक गंदा नाला बन कर रह गई है। कृष्णा नदी में विचरण करने वाले जीव जंतु प्रदूषित जल के कारण समाप्त होते गए वहीं इस नदी के किनारे विचरण करने वाले जंगली जानवर भी विलुप्त होते गए।

कृष्णा नदी का उद्गम स्थल सूखने के बाद अब इस नदी में फैक्ट्रियों का गंदा काले रंग का बदबूदार पानी बहता है। नदी के पानी में खतरनाक अम्ल होने से इस नदी के किनारे बसे गांव के लाखों लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। लोगों में खतरनाक बीमारियां पैदा हो रही हैैं।
नौ

इस नदी का गंदा रासायनयुक्त पानी भूमिगत जल स्रोतों को भी प्रदूषित कर रहा है। इसके स्रोत से जुड़े हैंडपंपों का पानी पीने से बहुत से लोग धीरे धीरे मौत के मुंह में समा गए और बहुत से विकलांग हो गए।

कृष्णानदी के गंदे पानी से निजात दिलाने के लिए इस नदी के आसपास के कई गांव के लोगों ने अपनी आवाज भी उठाई है लेकिन ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं हो सका।

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