बागपत जनपद में कोताना गांव यमुना नदी के किनारे स्थित है। महाभारत काल से लेकर आधुनिक काल तक के सभी प्रमाण यहां की धरती से मिले हैं।

पुराने समय में कोताना उत्तर भारत का प्रमुख व्यापारिक स्थल हुआ करता था। सैकड़ों वर्ष पहले जब अच्छे सड़क मार्ग नहीं होते थे और यातायात के साधन भी विकसित नहीं हुए थे। जमीनी मार्ग से व्यापार करना जोखिम भरा होता था। इसलिए उस समय अधिकांश व्यापार जल मार्गों के द्वारा ही होता था। उस समय का प्रमुख व्यापारिक जल मार्ग यमुना नदी के किनारे स्थित होने का लाभ कोताना को मिला। यहां सन 1376 इसी में लाला धनीराम ने एक बड़े भूखंड पर विशाल मंडी का निर्माण कराया था। मंडी में व्यापार करने के लिए दो दर्जन से अधिक दुकाने भी बनवाई गई थी। लुटेरों के भय से धन को बाहर लेकर जाना जोखिम भरा होता था। इसलिए मंडी के ठीक नीचे एक कोषागार का निर्माण कराया गया था।
इस बैंकनुमा कोषागार में भूमिगत तहखानो में व्यापारियों का धन सुरक्षित रहता था। क्योंकि इन तहखानों तक लुटेरे भी नहीं पहुंच सकते थे। इस प्राचीन भवन की नक्काशी बेजोड़ है और दीवारों पर सुंदर भित्ति चित्र बनाए गए हैं। जो आज भी जीवंत प्रतीक होते हैं।
इस क्षेत्र में दिल्ली के बाद यहां की मंडी महत्वपूर्ण मानी जाती थी। लेकिन जैसे-जैसे अच्छे पक्के मार्ग और यातायात के साधनों का विकास हुआ इस मंडी का महत्व समाप्त होता चला गया। रखरखाव के अभाव में आज इस प्राचीन मंडी का भवन जर्जर हो चुका है। उस समय की दुकानों एवं कुएं के अवशेष ही शेष बचे हैं। यदि इस विरासत को बचाने के प्रयास नहीं किए गए तो यह प्राचीन धरोहर नष्ट हो जाएगी।

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प्राचीन रघुनाथ मंदिर

कोताना के प्राचीन मंडी भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर मराठा स्थापत्य कला का अनूठा प्रमाण है।

इनके अलावा कोताना को बेगम समरू की रियासत, स्वामी कल्याण देव के प्रवास और हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ की ननिहाल के रूप में भी जाना जाता है। परवेज मुशर्रफ ने बचपन में काफी समय यहां बिताया था। कोताना के जिस शानदार महल में जनरल परवेज मुशर्रफ की ननिहाल हुआ करती थी उसका कुछ भी हिस्सा आज के समय में शेष नहीं बचा है। उस महल को अब तोड़ दिया गया है और उसकी नक्काशी की हुई दीवारें, स्तंभ और पत्थरों के अवशेषों को स्थानीय लोग उठाकर अपने घरों में ले गए हैं और आज भी उस महल की निशानियां उनके घरों के नलों के नीचे बिछाए गए पत्थरों के रूप में प्रयोग की जा रही है।

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