बागपत जनपद का खेकड़ा कस्बा उत्तरी भारत का हथकरघा उद्योग का प्रमुख केंद्र है। यहां पर इस उद्योग की बहुत सी इकाइयां स्थापित है। इन सभी इकाइयों में उत्पादित कपड़े का शत-प्रतिशत निर्यात किया जाता है। विभिन्न डिजाइनों में उत्पादित कपड़े को अमेरिका, यूरोपीय देशों, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान आदि देशों को निर्यात किया जाता है।

खेकड़ा में हैंडलूम फैक्ट्रियों में बेडशीट, कुशन कवर, परदों, दरी व अन्य सजावटी कपड़ों का उत्पादन होता है।

खेकड़ा में सन 1972 में सबसे पहले एक छोटी सी इकाई की स्थापना से इस हथकरघा उद्योग की शुरुआत हुई थी। बाद में एक के बाद एक लगी हथकरघा इकाइयों ने खेकड़ा का नक्शा ही बदल दिया। खेकड़ा अब इसी हथकरघा उद्योग के कारण देश ही नहीं विदेशों में भी अपने वस्त्र उद्योग के कारण पहचाना जाता है।

अलग अलग मनमोहक डिजाइनों में गुणवत्ता के साथ उत्पादित खेकड़ा के हथकरघा उद्योग में निर्मित वस्त्र देश ही नहीं विदेशियों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यहां के उद्यमियों ने अपने प्रयासों से खेकड़ा के हथकरघा वस्त्रों को देश और विदेश में पहचान दिलाई है।

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खेकड़ा के संत घासीदास के बाड़े में प्रतिवर्ष दो दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर काफी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। पूरा बाड़ा श्रद्धालुओं द्वारा बाबा की जय – जयकार और घंटे – घड़ियालों की आवाज से गूंज उठता है।

श्रद्धालु सुबह के समय से ही पूजा-अर्चना कर घर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के कामना करते हैं। उसके बाद मेले में खेल- खिलौने, सौंदर्य प्रसाधन आदि की खरीदारी का आनंद लेते हैं। श्रद्धालु यहां लगने वाले भंडारे में सामूहिक रूप से बैठकर सब्जी पूरी और हलवे का प्रसाद ग्रहण करते हैं।

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खेकड़ा नगर में जन्माष्टमी के अवसर पर पतंग उड़ाने का चलन बहुत पुराना है। जन्माष्टमी पर यहां जमकर पतंगबाजी होती है। यहां पर पतंगबाजी की यह प्रथा वर्षों से चली आ रही है। इस अवसर पर नगर के रहने वाले जो लोग दूर के नगरों में नौकरी आदि करने गए हुए हैं। वह भी इस अवसर पर छुट्टी लेकर यहां आ जाते हैं और दिन भर व्रत रखने के साथ छतों पर चढ़कर पतंगबाजी करते हैं।

इस अवसर पर पतंग और मांझा की इतनी खरीदारी होती है कि दिल्ली का लाल कुआं बाजार में खेकड़ा सीजन की धूम रहती है। दिल्ली का प्रसिद्ध पतंग बाजार लालकुआं में तो रक्षाबंधन से लेकर जन्माष्टमी तक का समय खेकड़ा सीजन के नाम से जाना जाता है।

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खेकड़ा का ठाकुरद्वारा मंदिर, पट्टी औरंगाबाद स्थित प्राचीन शिव मंदिर ।

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