__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.भारत) के १०० कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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काठा नदी –

इस क्षेत्र की प्राचीन काठा नदी शिवालिक पर्वत मालाओं से निकलती है। सहारनपुर जनपद से शामली जनपद तक बहने वाली लगभग 150 किलोमीटर लंबी काठा नदी का पौराणिक इतिहास है।

काठा नदी का उद्गम सहारनपुर शहर से 20 कि.मी. दूर नकुड़ तहसील के ग्राम नयागांव में है।515वर्ग कि.मी.जल ग्रहण क्षेत्र वाली इस नदी की कुल लंबाई 123.890 कि.मी.है। शामली जनपद के ग्राम मवी के समीप यह नदी यमुना नदी में मिल जाती है।

यमुना नदी के समानांतर बहने वाली काठा नदी एक समय किसानों के लिए वरदान होती थी। इस शताब्दी की शुरुआत तक काठा नदी में पानी की पर्याप्त मात्रा होती थी। इस नदी के आसपास के गांवों के ग्रामीण लोग गर्मी के मौसम में अपने पशुओं को इस नदी के पानी में नहला कर भीषण गर्मी से निजात दिलाते थे। किसान इसके पानी से अपने खेतों की फसलों को सींचते थे।

सूखाग्रस्त आपदा के समय यह काठा नदी ग्रामीणों की मददगार साबित होती थी। बरसात के मौसम में जब यमुना नदी में पानी की मात्रा बहुत बढ़ जाती थी तब बाढ़ की स्थिति को संभालने में भी इस काठा नदी का बहुत योगदान रहता था।

सन 1830 में जब अंग्रेजी हुकूमत ने इस क्षेत्र में पूर्वी यमुना नहर का निर्माण कराया था तब सहारनपुर और रामपुर के बीच नहर बनाने के लिए इस नदी के शिवालिक पर्वतों से आने वाले जलस्रोत को रोक दिया गया था। इसका सारा जल दूसरी नदियों में बांट दिया गया। तब से लगभग 150 किलोमीटर लंबी काठा नदी मृत पड़ी है।

पानी के अभाव सिंचाई विभाग की उपेक्षा और ग्रामीणों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण अब काठा नदी केवल नाम मात्र को ही बची है। आज मरणासन्न काठा नदी अपनी किस्मत पर खून के आंसू बहाती नजर आती है। इसके किनारे पर बसे सैकड़ों गांव व कस्बे पानी की किल्लत को महसूस करते हैं।

नदी में पानी नहीं आने के कारण बड़ी संख्या में जीव-जंतु व पशु-पक्षी प्यासे ही रहते हैं।

भू माफियाओं के द्वारा भी काठा नदी पर अपना अवैध कब्जा करके नदी में खेती करना शुरू कर दिया है। अवैध कब्जे होने के कारण इस काठा नदी को अब काठा नाले का नाम दे दिया गया है।

अधिक पानी का दोहन होने से इस क्षेत्र के सभी ब्लॉक डार्क जोन में पहुंच गए हैं। पानी का जलस्तर नीचे चले जाने से इस क्षेत्र के खेतों में फसलों की सिंचाई में दिक्कत हो रही है।

काठा नदी के पुनर्जीवन को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया था। जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं उच्च अधिकारियों के बीच निर्णय लिया गया।

इस नदी क्षेत्र के ही सहारनपुर जनपद के सरसावा,नकुड़, और गंगोह तथा शामली जनपद के चौसाना, बिडौली और कैराना क्षेत्र का ऐसा हिस्सा है जहां कृषि के लिए या किसी और उपयोग के लिए किसी नहर प्रणाली की व्यवस्था नहीं है।

पानी के अंधाधुंध दोहन के कारण यह सभी ब्लॉक डार्क जोन में हैं। इस क्षेत्र में भूमिगत पानी पर कृषि और पीने के पानी का उपयोग हो रहा है। इस क्षेत्र के ही यमुना नदी में गर्मी के मौसम में एक भी बूंद पानी नहीं रहता है।

पानी की समस्या का समाधान करने के लिए अगर नई नदी बनाई जाए या नहर बनाई जाए तो उसके लिए अरबों रुपए जमीन खरीदने में खर्च करने होगें। जिसके चलते इस प्राकृतिक काठा नदी को ही पुनर्विकसित दोबारा जीवित किया जाएगा।

इन समस्याओं के समाधान के लिए कैराना क्षेत्र में काठा नदी को दोबारा जीवित करने का निर्णय लिया गया।

काठा नदी को पुनर्जीवित करने के लिए अवैध कब्जों को हटाया जाएगा और जहां खुदाई की आवश्यकता होगी वहां खुदाई कराई जाएगी।

** काठा नदी को ग्रामीणों के सहयोग से पुनर्जीवित करने के अभियान भी चलाए गए। जिसमें काठा नदी को पुनः जीवित करने के लिए के लिए ‘बस एक लोटा पानी डाल दो’पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मुहिम चलाई गई थी। इस मुहिम में नदी के तल पर एक लोटा पानी डालकर इसे बचाने की शपथ ली गई।


ग्रामीणों ने श्रमदान करके बरसात का पानी एकत्र करने के लिए कच्चा चैकडैम बनाने का प्रयास।


काठा नदी के पुनर्जीवित होने पर इस क्षेत्र के भूमिगत जलस्तर में भी वृद्धि होगी। जिससे यहां के निवासियों को पानी की कमी से निजात मिलेगी।

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