____________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

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कांधला कस्बा –   ( जनपद शामली )

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मनकामेश्वर महादेव मंदिर –

पूर्वी यमुना नहर के किनारे प्राचीन मनकामेश्वर महादेव का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यमुना नहर के किनारे इस शिव मंदिर की स्थापना सन १९२६ में हुई थी। बताया जाता है की नहर के किनारे एक मैदान में भगवान शिव शंकर का शिवलिंग प्रकट हुआ था। उसके बाद इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर में होने वाले चमत्कारी किस्सों और श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होने पर इस मंदिर के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ती गई। श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होने पर यह मंदिर मनकामेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ। कुछ वर्षों पहले शिवलिंग के ऊपर गणेश जी की आकृति स्वयमेव उभर जाने से लोगों की श्रद्धाभावना इस मंदिर के प्रति और भी गहरी हो गई। यह भी बताया जाता है कि कुछ वर्षों से सावन मास में भगवान शिव नाग के रूप में भक्तों को दर्शन देकर अंतर्ध्यान हो जाते हैं।

श्रावण मास में हजारों श्रद्धालु कांवड़िए पैदल गंगाजल लाकर यहां शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां मंदिर में भगवान शंकर और उनके वाम भाग में स्थित दुर्गा माता मंदिर के दर्शन करते हैं और अपने कष्टों से मुक्ति पाते हैं।

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शिव मंदिर – गांव खेड़ा कुर्तान

कांधला से 8 किलोमीटर दूर खेड़ा कुर्तान गांव में स्थित यह शिव मंदिर पिछले कई दशकों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।

इस मंदिर की स्थापना के बारे में बताया जाता है कि सन १९४२ में गांव के एक किसान के खेत में एक शिवलिंग भूमि से स्वयं प्रकट हुआ। इस शिवलिंग के बारे में यहां के ग्रामीण बड़े बुजुर्ग कई कथा सुनाते हैं। बताया जाता है कि अपने पशुओं को चराने के लिए कुछ लोग उसी खेत के पास आए जिस खेत में शिवलिंग प्रकट हुआ था। उनमें से ही एक व्यक्ति घास काटने के लिए अपनी दरांती को उस शिवलिंग पर घिसकर दरांती की धार तेज करने लगा। देखते ही देखते उस शिवलिंग से एक खून की धारा बहने लगी। इससे ग्रामीण घबरा गए और उन्होंने तत्काल गांव में जाकर पूरी घटना का वृत्तांत गांव वालों को सुनाया। गांव के लोग पूरी बात सुन कर उस स्थान पर पहुंचे। बाद में ग्रामीणों ने इस शिवलिंग के ऊपर एक मंदिर बनाने का निर्णय लिया।
बताया जाता है कि उस समय आसपास के इलाकों में भी खेड़ा कुर्तान के शिवलिंग के चमत्कार की चर्चाएं होने लगी ।तभी पास के गांव लम्बू के कुछ ग्रामीणों ने इस शिवलिंग के चमत्कारों से प्रभावित होकर इस शिवलिंग को अपने गांव में लाकर स्थापित करने का मन बनाया। जिसके बाद वह ग्रामीण रात के समय उस शिवलिंग को चोरी करने के लिए खेड़ा कुर्तान गांव के उस खेत पर पहुंच गए।. उन्होंने शिवलिंग को जमीन से निकालने के लिए उसके चारों तरफ से खुदाई की। लेकिन पूरी रात खुदाई करते करते सुबह हो गई लेकिन वे शिवलिंग के अंतिम छोर तक नहीं पहुंच सके और बाद में निराश होकर अपने गांव लौट आए। इसके बाद ग्रामीणों द्वारा इसी स्थान पर श्रद्धा भाव से मंदिर का निर्माण कराया गया।

धीरे धीरे बाबा खेड़ा कुर्ता के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होने की चर्चाएं यहां आस-पास के इलाके के साथ-साथ हरियाणा के इलाकों में भी होने लगी। जिसके बाद श्रावण मास की शिवरात्रि के अवसर पर दोनों राज्यों के बीस हजार से अधिक श्रद्धालु कांवड़िए हरिद्वार से पैदल तथा डाक कांवड़ लाकर यहां शिव महादेव के शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और मनोकामनाएं मांगते हैं। इस अवसर पर यहां पर एक विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।

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