_________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १००कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
_____________________________________

इस इलाके के उत्तरी हिस्से में पूर्व से पश्चिम तक शिवालिक पर्वतमाला फैली हुई है। शिवालिक पर्वतमाला का यह पूरा क्षेत्र जैव विविधता से भरपूर है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के पेड़-पौधे,औषधियां और वन्यजीवों का भंडार है। इससे इस क्षेत्र की पूरी शिवालिक पर्वतमाला श्रंखला के निचले एवं तराई के हिस्से में भारत के कई प्रसिद्ध राष्ट्रीय अभयारण्य और वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र स्थित हैं।

इस क्षेत्र की शिवालिक पर्वतमाला की पैर पहाड़ियों में तीन राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से लगती हुई सीमा पर हरियाणा राज्य में कालेसर राष्ट्रीय उद्यान (कालेसर नेशनल पार्क)यमुनानगर जनपद के पूर्वी हिस्से में स्थित है। कालेसर राष्ट्रीय उद्यान के नजदीक ही कलेसर वर्ल्ड लाइफ सेंचुरी भी स्थित है।

इस राष्ट्रीय उद्यान के पूर्व में यमुना नदी स्थित है। खास बात यह भी है कि हिमाचल प्रदेश के सिंपलवाड़ा वन्यजीव अभयारण्य और उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क की सीमाएं भी इस राष्ट्रीय उद्यान से बिल्कुल सटी हुई ही हैं।

कलेसर वन क्षेत्र हरियाणा का प्राकृतिक रूप से बहुत सुंदर स्थान है यह इलाका पुराने समय में रियासतों के शिकार का स्थान होता था इस स्थान पर प्रकृति की हरियाली के बीच से होकर बहती यमुना की सुंदरता को देखा जा सकता है।

छुट्टियों में एवं पर्यटन के उद्देश्य से घूमने के लिए कलेसर राष्ट्रीय उद्यान, हथिनी कुंड बैराज और ताजेवाला हैडवर्क्स त्रिकोण के रूप में एक अच्छे पर्यटक स्थल हैं। यहां आकर पूरा दिन सुकून के साथ आनंद लिया जा सकता है।

इस कलेसर राष्ट्रीय उद्यान का नाम नेशनल पार्क के इलाके में ही बने कलेसर(शिव) मंदिर के नाम पर पड़ा है। पूरा पार्क जैव विविधताओं से भरपूर है। सारा इलाका साल, आंमला, खैर, अमलतास, शीशम,टुन, सेन, कचनार, ढाक जैसे विभिन्न प्रकार के पेड़ों और विभिन्न प्रकार की औषधिय पौधों के जंगलों के बीच में घास की भूमि के धब्बों से भरा हुआ है। उद्यान में वन्य प्राणियों की विभिन्न प्रजातियां पाई जाती हैं।इस राष्ट्रीय पार्क का हमारे देश में जैव विविधता तथा पारिस्थितिक स्थिरता के संदर्भ में बहुत महत्व है। हरियाणा राज्य में केवल यही राष्ट्रीय उद्यान है जहां इतनी बड़ी जैव विविधता के साथ अच्छा प्राकृतिक वन है। औषधीय पौधों की कई सारी प्रजातियां यहां मौजूद हैं।

कलेसर में साल के वृक्ष हजारों हेक्टेयर में स्थित हैं। यह इस राज्य का फॉरेस्ट ट्रैक भी है। मौसमी फूल और ढाक अमलतास और कचनार के पेड़ों की कभी न भूलने वाली सुंदरता यहां पर है।

कलेसर राष्ट्रीय उद्यान बहुत ही सुंदर पर्यटन स्थल है।
इस पार्क का क्षेत्र 11570 एकड़ होने पर 8 दिसंबर सन 2003 को कलेसर राष्ट्रीय उद्यान किया गया था। कलेसर राष्ट्रीय पार्क यमुनानगर से लगभग 55 कि.मी.,पोंटा से 15 कि.मी और देहरादून से 55 कि.मी.है।यमुनानगर पौंटा साहिब राजमार्ग कलेसर नेशनल पार्क से होकर ही गुजरता है। यह नेशनल पार्क रेल एवं सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

कलेसर राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षित क्षेत्र में वन्यजीवों की पर्याप्त विविधता के अनुरूप वन्यजीवों की अनेक किस्में हैं। शाकाहारी वन्य जीवो में कोमल ढलानों पर अधिक घने वन क्षेत्रों में सांभर दो से चार के समूह में देखा जा सकता है। चीतल खुले घास के दब्बों जैसे मैदानों में पाया जाने वाला शाकाहारी जानवर है। बार्किंग डियर यहां पर्याप्त भूमि में फैले वन क्षेत्रों में देखा जा सकता है। जंगली बकरी गोरल शिवालिक पर्वत की लकीरों के शीर्ष पर अपेक्षाकृत नंगी चट्टानों की डाल पर पाई जाती है। इनके अलावा खुले घास के मैदानों में चीतल, हिरण, नीलगाय, नीलबैल जैसे जानवर भी यमुना के खुली जगह व घास के मैदानों में पाए जाते हैं।

कलेसर राष्ट्रीय उद्यान लाल जंगली मुर्गे के लिए प्रसिद्ध है। पार्क में जंगली सूअर काफी संख्या में हैं। इनके अलावा इस पार्क में बंदरों की संख्या बहुत ही ज्यादा है। रीसस मकाक पार्क में सबसे शानदार बंदर है और इनमें से ज्यादातर बंदर बाहर से पार्क में छोड़े गए हैं वर्तमान में इनकी संख्या बहुत अधिक है। यह बंदर इस पार्क में मिलने वाली लाल जंगली मुर्गियों के अंडों को खाते हैं इसलिए लाल जंगली मुर्गियों की संख्या में कमी आने की आशंका भी होने लगी है।

राजाजी नेशनल पार्क का इलाका भी कलेसर नेशनल पार्क से लगा हुआ है इससे राजाजी नेशनल पार्क से हाथी भी यहां कुछ समय के लिए निवास करने के लिए आते हैं।

यह पार्क सरीसृप प्रजातियों की अजगर, किंगकोबरा, मानीटर छिपकली आदि कई खतरनाक जानवरों का घर है।

मांसाहारी वन्य जंतुओं में तेंदुआ खास है। जिनकी यहां अच्छी-खासी संख्या है और इस संरक्षित क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए हुए हैं। कभी-कभी बाघ भी राजाजी नेशनल पार्क से इस पार्क में आते हैं। कुछ दिन यहां रहते हैं फिर वापस राजाजी नेशनल पार्क चले जाते हैं।

यदि कलेसर राष्ट्रीय उद्यान के वास प्रबंधन में थोड़ा सुधार कर दिया जाता है तो बाघ और हाथी यहां साल भर रह सकते हैं। यह पार्क भी बाघ और हाथी जैसे शानदार वन्य पशु के वैकल्पिक घर के रूप में हो सकता हैं।


कभी-कभी राजाजी नेशनल पार्क से कलेसर राष्ट्रीय पार्क में आ जाने वाले हाथी इस नेशनल पार्क के बीच से गुजर रहे हाईवे पर भी आ जाते हैं।

इस राष्ट्रीय उद्यान में वन्य जीवन को करीब से देखने के लिए जीप सफारी की सुविधा भी उपलब्ध है। यहां ट्रैकिंग, साइट सीइंग, स्विमिंग, बर्डवाचिंग और सफारी तक का आनंद लिया जा सकता है।

अक्टूबर से लेकर मार्च तक का समय कलेसर राष्ट्रीय पार्क में घूमने के लिए सबसे अच्छा समय होता है। इस समय यहां वन्य पशु एवं पक्षियों को देखना आसान होता है।

कलेसर राष्ट्रीय उद्यान के 45 से 50 कि.मी. के दायरे में कई धार्मिक स्थल है और प्रकृति का रोमांच भी। धार्मिक स्थलों में आदि बद्री धाम है यहां सरस्वती नदी के उद्गम स्थल के साथ-साथ पहाड़ी पर माता मंत्रा देवी व केदारनाथ मंदिर स्थित है। कपाल मोचन तीर्थ, पंचमुखी हनुमान मंदिर, बसातियां वाला मंदिर, अमादलपुर का सूरजकुंड सूर्य मंदिर, त्रिलोकपुर का माता मनसा देवी मंदिर विख्यात हैं जहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

रोमांचप्रिय स्थलों में हथिनीकुंड बैराज, ताजेवाला हैडवर्क्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए हिमाचल प्रदेश का सिंपलवाड़ा नेशनल पार्क और उत्तराखंड का राजाजी नेशनल पार्क भी पास में ही स्थित है।

कलेसर नेशनल पार्क में ने केवल आसपास के व अपने देश के ही नहीं विदेशों से भी प्रकृति प्रेमी सैलानी घूमने के लिए आते हैं। विशेष अवसरों एवं वीकेंड के अवसर पर यहां पर्यटक को की संख्या बढ़ जाती है प्रकृति प्रेमी सफारी गाड़ी में पार्क के अंदर वन्य पशुओं को नजदीक से देख सकते हैं। इस पार्क में घूमने पर न केवल रोमांचक नजारे देखने को मिलते है बल्कि जंगल में दुर्लभ प्राणी भी देखने को मिलते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *