__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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मान्यता है कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र का जन्म इस क्षेत्र में हुआ था और उन्हीं के नाम पर इस छोटे से कस्बे हरिपुर बसाया गया था। राजा हरिश्चंद्र ने यहां के घने वन में चंडी देवी की उपासना की थी‌। उस समय बस्ती से बाहर एक मढ़ी के रूप में चंडी देवी की स्थापना की गई थी। समय बीतने के साथ चंडी देवी का मढ़ी स्थल बस्ती के बीच में आ गया और मढ़ी ने एक मंदिर का रूप ले लिया।

चंडी मंदिर के गर्भ गृह में मां चंडी की पिंडी स्थापित है। पिंडी के ऊपर चांदी का खोल चढ़ा हुआ है जिस पर सिंदूर का लेप किया जाता है। माता की पिंडी के पास ही पत्थर से निर्मित भैंसे का सिर है। माता की पिंडी के नीचे एक रहस्यमय तहखाना है। बताते हैं इसे कभी खोला नहीं गया है। इस चंडी मंदिर को सिद्ध शक्ति स्थल के रूप में माना जाता है।

मां चंडी का नित्य श्रृंगार किया जाता है और उसके बाद गर्भ ग्रह की शोभा देखते ही बनती है। चंडीमंदिर का विशाल प्रांगण है। जिसमें भैरोंजी, भगवान शंकर, दुर्गा माता, हनुमान जी आदि के पुरातन मंदिर बने हुए हैं। बाद में यहां श्री राधा कृष्ण, राम दरबार, लक्ष्मीनारायण, नवदुर्गा, वेंकटेश्वर बालाजी और अन्य प्रतिमाओं की स्थापना की गई है। विशाल द्वार के साथ मंदिर ने भव्य रूप ले लिया है। यहां के सुंदर फर्श को एक मुसलमान भक्त ने बनवाया है।

चंडी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं भक्तों की अगाध श्रद्धा और आस्था है। यहां के लोगों का विश्वास है कि सवा मन दूध की धार चढ़ाने से अकाल में भी मन वांछित वर्षा होती है। नित्य प्रति प्रातः काल और संध्या के समय देवी के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। पर्व- उत्सवों के अवसर पर तो यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।

नवरात्रों के पावन अवसर पर मां आद्यशक्ति चंडी जी की पालकी निकाली जाती है। प्रभात फेरी में भजन मंडलियां कीर्तन करते हुए चलती हैं। प्रभात फेरी पर विभिन्न स्थानों पर पुष्प वर्षा करके श्रद्धालु माता के नाम के जयकारे लगाते हैं जिससे नगर का वातावरण भक्ति में हो जाता है।

भव्य पालकी शोभायात्रा में विभिन्न प्रकार की भव्य झांकियां, मां काली का दर्शन और भव्य फूल बंगला सहित झांकियां निकाली जाती हैं और प्रसाद का वितरण होता है।

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