बाबा मंशादास का देवालय

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ऐतिहासिक और धर्म परायण नगरी हल्दौर का बाबा मंशादास के नाम से प्रसिद्ध देवालय उनके यश का प्रतीक है। यह देवालय बाबा मंशादास जी के भक्त श्रद्धालुओं की अपार श्रद्धा का केंद्र है। हल्लौर नगरी के बीच में स्थित यह देवालय श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला महान संत बाबा मंशा दास की धवल यश गाथा का प्रतीक है।
महान आध्यात्मिक चिंतक बाबा मंशादास की गणना सिद्धि प्राप्त साधु संतों में की जाती है। इनके जन्म के बारे में कई जनश्रुति प्रचलित हैं। लेकिन इनके भक्तों का मानना है कि बाबा का जन्म बिजनौर जनपद के पुरैनी गांव के निकट परवनपुर गंगवाली नामक गांव में एक प्रतिष्ठित एवं धार्मिक धीमान – ब्राह्मण परिवार में हुआ था। बचपन से ही ये संसार की नश्वरता के विषय में घंटो – घंटो एकांत में बैठकर चिंतन किया करते थे। भ्रमण करते हुए बाबा हल्दौर आए और यहां पर रहकर उन्होंने इस पावन देवालय का निर्माण कराया। बाबा मनसा दास के शरीर त्यागने के बाद उनके शिष्यों ने इसी मंदिर में इनकी समाधि बनवाई।
बाबा मनसा दास का भव्य मंदिर एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित है। प्राचीन हिंदू वास्तुकला के अनुसार बने इस भव्य देवालय के शिखर पर स्वर्ण मंडित कलश स्थापित है। मंदिर पर उकेरे गए कंगूरो, बेल- बूटों और कशीदाकारी से इस मंदिर का सौंदर्य दर्शनीय है।
प्रतिदिन इस मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। दूर-दूर से श्रद्धालु मुंडन संस्कार जैसे मांगलिक कार्य यहीं संपन्न कराते हैं और बाबा की समाधि पर पुष्प, मिष्ठान तथा वस्त्र आदि अर्पित करके उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

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हलदौर कस्बे में पशुओं का प्रसिद्ध दोमत्र मेला लगता है। जिसमें देश के कोने-कोने से व्यापारी अपने घोड़े, भैंस, खच्चर, गधे आदि जानवर बिक्री के लिए लाते हैं।

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