__________________________________________________मुजफ्फरनगर जनपद (उ.प्र.-भारत)के १००कि.मी.के दायरे में गंगा-यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र
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हैदरपुर झील वेटलैंड – मुजफ्फरनगर (मध्य गंगा बैराज)

मुजफ्फरनगर जनपद में प्रवासी पक्षियों से लेकर स्थानीय पक्षियों तक की अनेकानेक प्रकार की प्रजातियों के हजारों हजार पक्षियों के कलरव से गुंजायमान हैदरपुर वेटलैंड झील गंगा की गोद में मध्य गंगा बैराज पर स्थित है।

मेरठ-पौड़ी नेशनल हाईवे पर गंगा नदी के खादर क्षेत्र में स्थित हैदरपुर झील महत्वपूर्ण स्थल है। यह स्थान हर साल विदेशी प्रवासी पक्षियों के साथ स्थानीय पक्षियों के कलरव से गुलजार रहता है। सर्दियों के मौसम में हैदरपुर वेटलैंड झील पर प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा लगा रहता है। प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां हर किसी को लुभाती हैं। देसी विदेशी पक्षियों के संगम से यहां मनमोहिनी छटा बिखर जाती है।अनुकूल मौसम होने के कारण बड़ी मात्रा में यहां आए विभिन्न प्रकार के विदेशी पक्षियों के इस कुदरत के दुर्लभतम नजारे को यहां देखा जा सकता हैं। पक्षियों की अनेक प्रजातियों के साथ वन्य जीव भी यहां पाए जाते हैं।

हैदरपुर वेटलैंड झील पर विदेशी प्रवासी पक्षियों में ब्लैक नेक्ड स्टार्क, व्हाइट टेल्ड लेपविंग, सिट्रिन वैगटेल, कॉमन पोचार्ड, रेड क्रस्टेड पोचार्ड, नार्दन शोवलर,बार हैडेढ़ गूस, यूरेशियन करल्यू, वुड सैंड पाइपर, ब्लू थ्रोट,करल्यू सैंड पाइपर,गल बिल्डर र्टन,नार्दर्न पिनटेल, ग्रेटर स्पॉटेड, फेरूजिनस डंक, ब्लैक हेडेड आइबिस,ब्लैक टेल्ड गाडबिट, ग्रीलेज गूज, सॉर्स क्रेन सहित स्थानीय पक्षियों में इंडियन सिल्वर बिल, ब्लैक हेडेड आईबिल, ओरियंटल डार्टर,इंडियन रोलर,ग्रे हेडेड स्वांप हेन, इंडियन रिवर टर्न, वुली नेक्ड स्टाॅॅर्क,इंडियन ग्रे हॉर्नविल, पिंक हेडेड डक, पिंटेल, कूट,व्हीसल डक सहित कई अनेकानेक प्रजातियों के पक्षी यहां मौजूद होते हैं। इन तरह-तरह के पक्षियों की प्रजातियों में कई प्रजातियां तो संकटग्रस्त तथा संकटासन हैं।

भारत में विलुप्त होती कई प्रजातियों के पक्षियों के यहां आने के सुखद एहसास के साथ ही कई प्रकार के प्रवासी पक्षी तो यहां तक आने के लंबे सफर में माउंट एवरेस्ट की ऊंची चोटियों को पार करके यहां पधारते हैं। हेडेड गूज प्रजाति के प्रवासी पक्षी यहां माउंट एवरेस्ट की ऊंची चोटियों को पार करके ही पहुंचते हैं।

पक्षी विशेषज्ञों ने 24 घंटे तक वॉच करके हैदरपुर झील पर लगभग 239 प्रजाति के पक्षियों को देखा है। अनुकूल पर्यावरण भोजन की उपलब्धता और यहां का मौसम प्रवासी पक्षियों के यहां पहुंचने के मुख्य कारण हैं। प्रवासी पक्षियों को गंगा किनारे प्रचुर मात्रा में भोजन मिलता है। जिन देशों से यह प्रवासी पक्षी आते हैं वहां इन दिनों अत्यधिक ठंड रहती है, जिससे पक्षी अनुकूल मौसम वाले स्थान तलाशते हैं। फरवरी के बाद जब इस क्षेत्र में धीरे-धीरे गर्मी बढ़नी शुरू होती है तब यह पक्षी यहां से लौटना शुरू कर देते हैं। पक्षी विशेषज्ञों ने यहां आए पक्षियों के वॉच के दौरान भारत में लुप्त हो रहे ब्लैक नेक ग्रीब पक्षियों को भी यहां 2000 से भी अधिक की संख्या में देखा है।

हैदरपुर झील पर आए पक्षियों की तरह-तरह की प्रजातियों मे जलीय नमी में रहने वाले और शिकारी पक्षी शामिल हैं। सुर्खाब, बैखूर, गुगराल, चैता, छोटी मुर्गाबी, छोटी सिहली, मैना बत्तख,अबलकी बत्तख,सिलेटी सवन,गूंज, सरपट्टी सवन, नीलसर, सीकर, चुपका,सुरमा बाटन, छोटा बाटन, खीमा जलमुर्गी,ठेंकरी,तार,काली दुम का गुदेश,सारस,धक्का,करंजिया,बत्तख,लाल सिर, छोटा लाल सिरपोचर्ड,तिमतिमाबाटन,अंधा,किठवाड़ी,टुन्नककिलकिला,छोटाकिलकिला,कोरिल्ला,कोठियाल,उलट,राजचहा,चौबट्टा,कूट, गाय बगुला, लाल बगुला, पनडुब्बी, शिवहंस, पन्ना, सफेद बुज्जा, देसी पनकौवा, लोहा सारंग चैता बत्तख,गुगराल,बत्तख,पंजीरा,हवासील,बडाकर्वानक,गजपांव,पिहो,जलपीपी,किलकिला,कोडियाला,छोटा बाटन, भूरी गंगा चिल्ली सहित 150 से भी अधिक तो भारतीय प्रजातियों के पक्षी इस झील पर होते हैं जबकि अन्य विदेशी प्रजाति के प्रवासी पक्षी होते हैं।

वन्य एवं जलीय जीवों के साथ प्रकृति प्रेमियों को सुखद एहसास से भर देने के लिए कछुए और घड़ियालों के साथ गंगा की गोद में बसी इस झील के निकट दलदली जमीन को पसंद करने वाले बारहसिंघा भी देखे जा सकते हैं। हिरण व बारहसिंघा की मौजूदगी से इस झील की सुंदरता और भी अधिक बढ़ जाती है। बारहसिंघा हिरन मुख्यतः घास व जलीय पौधे ही चरते हैं लेकिन पूरा दिन खाते रहते हैं। घटती संख्या के कारण बारहसिंघा दुर्लभ श्रेणी के वन्य पशुओं में आता है और इनका यहां बड़ी संख्या में पाया जाना बड़ी बात है।

गंगा बैराज के पास हैदरपुर वेटलैंड का नजारा देखकर पक्षी विशेषज्ञ भी हैरत में पड़ गए। उन्हें यहां 234 प्रजातियों के विदेशी एवं स्थानीय पक्षी नजर आए। यह संख्या 250 तक पहुंचने की संभावना है। विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र को पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल बताया है। वेटलैंड में बढ़ रही पक्षियों की प्रजातियां एवं उनकी संख्या से पक्षी विशेषज्ञों एवं प्रकृति प्रेमियों में खुशी की लहर है। इस क्षेत्र के विकास के लिए यह अच्छा संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षेत्र पक्षियों के लिए बेहद अनुकूल है और बायो डायवर्सिटी पार्क के रूप में विकसित करने के योग्य है।

हैदरपुर झील लगभग 1221 हेक्टेयर में फैली है।यहां पर अभी डॉल्फिन भी हैं तथा घड़ियाल भी छोड़े गए हैं। कछुओं का प्रोजेक्ट भी जल्दी ही शुरू किया जाने वाला है।

हैदरपुर झील गंगा बैराज के उत्तरी पूर्व से आरंभ होती है। बिजनौर सीमा से सटे मुजफ्फरनगर के जानसठ-रामराज-मीरापुर वन प्रभाग व हस्तिनापुर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी क्षेत्र में गंगा की गोद में बना हैदरपुर वेटलैंड लगभग 1221 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। पूरा क्षेत्र वन्यजीव सेंचुरी से जुड़ा हुआ है। इस झील पर प्रकृति के मनोरम दृश्य देखने को मिलते हैं।

यह वेटलैंड जैव विविधता की दृष्टि से बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में देसी विदेशी प्रजातियों के पक्षी सैर सपाटे के लिए आते हैं जिन्हें झील के पानी में खेलते-फुदकते और अठखेलियां करते हुए देखा जा सकता है।

गंगा नदी के किनारे की प्राकृतिक चारों ओर पानी से घिरी दलदली आर्द्रभूमि वाली वेटलैंड झील में विभिन्न वनस्पतियों के साथ कीड़े, मछली आदि जंगली जीव, मेंढक, स्थानीय एवं विदेशी पक्षी, बगुला, टटीरी, जंगली मुर्गी आदि रहते हैं। यह वेटलैंड जैव विविधता की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।इस क्षेत्र में 36 डॉल्फिन पाई गई हैं। घड़ियाल और कछुओं की भी प्रजातियां हैं। भूजल रिचार्ज के लिहाज से भी वेटलैंड की बहुत उपयोगिता है।

हैदरपुर झील को ईको टूरिज्म का डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी की जा रही है। कुछ समय पहले तक झाड़ियों से घिरे हैदरपुर वेटलैंड के दिन अब बहुरने लगे हैं। सरकार द्वारा हैदरपुर झील को पक्षी विहार के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिसमें वन विभाग दिन-रात मेहनत कर रहा है तथा लोगों में प्रकृति प्रेम के लिए प्रेरित कर रहा है। हैदरपुर झील पर बायोडायवर्सिटी पार्क बनाने की परियोजना भी प्रस्तावित है। नमामि गंगे के अंतर्गत इस प्रस्ताव को हरि झंडी मिलने की संभावना है। यहां पर मौजूद पक्षियों की प्रजातियों, संख्या एवं लोकेशन के हिसाब से इस क्षेत्र के विकास की काफी संभावनाएं हैं।

आमजन के लिए अनजान यह स्थान लोगों की पसंदीदा जगह बन रहा है। लोग यहां आकर विदेशी पक्षियों का दीदार कर उनकी प्रजातियों से अवगत होते हैं। यहां अब पहले से अधिक चहल-पहल रहने लगी है इस स्थान का अभी पूरी तरह से विकास नहीं हो पाया है, लेकिन रोजाना बड़ी संख्या में लोग यहां घूमने के लिए आते हैं, छुट्टी वाले दिन तो और भी अधिक संख्या में लोग यहां आते हैं

। सर्दियों के मौसम में यहां स्थानीय और विदेशी पक्षियों की भरमार रहती है। पक्षियों की चहचहाहट कानों को सुकून देती है तथा सुबह से शाम तक यहां उनकी अठखेलियां को देखा जा सकता है।

हस्तिनापुर वन्य अभयारण्य क्षेत्र की प्रसिद्ध हैदरपुर झील को अलग पहचान दिलाने के लिए वन विभाग द्वारा पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हैदरपुर झील को पक्षी विहार पर्यटन स्थल के रूप में तैयार करने की योजना है।

गंगा का तराई क्षेत्र पक्षियों की पसंदीदा जगह है। गंगा बैराज व हैदरपुर झील पर सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का बसेरा होता है। यह लगभग 5 महीने यहीं गुजारते हैं और प्रजनन भी करते हैं। यहां शुद्धता है, तभी पक्षी यहां पर आते हैं। वन विभाग क्षेत्रीय पक्षियों के अलावा प्रवासी पक्षियों को भी लुभाने के प्रयास वन विभाग द्वारा किए जा रहे हैं। वन विभाग द्वारा पक्षियों के लिए घोसलों की व्यवस्था भी कराई जाएगी।

गंगा नदी पर बैराज बनने के बाद इस बैराज के दोनों ओर बड़ी झील बन गई है। उन्हीं में मुजफ्फरनगर जनपद साइड की हैदरपुर झील को विकसित किया जा रहा है। यह झील लगभग 12 हजार हेक्टेयर में फैली है।

इस झील को पर्यटन स्थल बनाने के लिए वन विभाग द्वारा इस झील के बंधे पर चार छोटे प्लेटफार्म बनाकर उन पर झोपड़ियां डाली गई है। दर्शक इन शेड में खड़े होकर पक्षियों को देख सकेंगे। यहां पर घूमने व बैठने के लिए प्राकृतिक स्थान हैं। पक्षियों को निहारने के लिए यहां करीब 2 कि.मी.लंबी पगडंडी,12 झोपड़ियां,2 वॉच टावर और 5 कि.मी.का नेचर ट्रेल का निर्माण करा दिया गया है। झील में आईलैंड बनवाने के भी प्रस्ताव हैं।

स्थानीय एवं प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन के द्वारा इंतजाम किए गए हैं। शिकारियों पर निगरानी रखने के लिए एक मोटर बोट यहां आ गई है। झील के निकट प्रवासी पक्षियों के साथ अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने निगरानी बढ़ाई है।

यह झील गंगा के निकट है, जिसके आसपास गांव बसे हुए हैं। ठंड बढ़ने के साथ सेंचुरी व झील के निकट शिकारी हावी हो जाते हैं। यह लोग मछलियों के साथ पक्षियों को भी निशाना बनाते हैं। इसके लिए वन विभाग ने रेंजरों के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया है। ‌

2 फरवरी ‘वेटलैंड डे’ हैदरपुर झील पर बर्ड फेस्टिवल के तौर पर मनाया गया। इस आयोजन को वन विभाग, नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया के सहयोग से हैदरपुर झील पर 2 दिन तक बर्ड फेस्टिवल का आयोजन किया गया। इसका मकसद वेटलैंड के संरक्षण की दिशा में समाज में जागरूकता बढ़ाना है और विभिन्न वन्य एवं जलीय जीवों के साथ वनस्पतियों, पक्षियों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज को और अधिक संवेदनशील बनाना है।

इस स्थान की जानकारी देने के लिए प्रशासन द्वारा बड़े बोर्ड लगवाए गए हैं और फ्लैक्स एवं बोर्ड पर यहां मौजूद पक्षियों के विषय में जानकारी दी गई है।

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