____________________________________________________ मुजफ्फरनगर जनपद के १०० किमी के दायरे में गंगा – यमुना की धरती पर स्थित पौराणिक महाभारत क्षेत्र

_________________________________________

गुलावठी जनपद बुलंदशहर का एक पुराना और एक विकसित होता हुआ नगर है।

कहा जाता है मुगलों के समय में धौलाना के नवाब और मालागढ़ के नवाब आपस में संबंधी थे और यह मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के बहनोई हुआ करते थे। इन दोनों के रास्ते में गुलाब बसी का जंगल पडा करता था। कहते हैं इस स्थान को गुलाब खां ने साफ करवा कर यहां रहना शुरु किया। उनकी एक लड़की थी गुलाबो उसी के नाम पर उन्होंने इसका नाम गुलाब बसी रख दिया ‌।

1857 में मुंशी महरबान अली जो भरतपुर रजवाड़े के वजीर थे, राजा की मृत्यु के बाद बहुत सारी दौलत के साथ यहां लौटे और उन्होंने घोड़ों का व्यापार करना शुरू किया। आसपास के रजवाड़ों में घोड़े बेच कर वह हर साल लाखों रुपए कमाते थे। यहां का एक मोहल्ला   घोड़ावाला मोहल्ला के नाम से जाना जाने लगा।

मुंशी महरबान अली के पास बेशुमार दौलत थी। यहां की आबादी बढ़ाने की धुन में उसने आसपास के चार गांव खरीद लिए और उनका संपर्क गुलाब बसी से बनाने के लिए यहां पास में ही बहती काली नदी के ऊपर एक विशाल पुल का निर्माण करवाया। जो काली नदी के पुल के नाम से जाना जाता है। बाद में उसने यहां  एक मस्जिद बनवाई जो दूर-दूर तक जामा मस्जिद के नाम से जानी जाती है। मुंशी ने इस स्थान पर 52 कुएं और ईदगाह बनवाया। गुलाब बसी में इस प्रकार तरक्की होती देख आसपास के क्षेत्रों के लोग यहां आकर बसने लगे। धीरे-धीरे इस स्थान पर हर जाति और वर्ग के लोग आकर बस गए और इसने एक बड़े बाजार का रूप ले लिया।

मुंशी महरबान अली की एक लड़की का नाम फातमा था। उसने अंग्रेज गवर्नर के ठहरने के लिए 100 बीघा जमीन में एक महल बनवाया था। जो आज भी आत्मा की कोठी के नाम से प्रसिद्ध है।

अंग्रेजों ने ही 1865 में गुलाब बसी का नाम बदलकर गुलावठी कर दिया था।

_____

गुलावठी से 10 किमी दूर सैदपुर गांव है। पूरे भारत में यह गांव भारतीय सेना के गौरव के रूप में जाना जाता है। इस गांव के लगभग हर परिवार का कोई न कोई सदस्य फोज में रहा है। इसलिए सैदपुर को फौजियों का गांव कहा जाता है एक सिपाही से लेकर बड़े अफसर तक सैदपुर से फौज में रहे हैं प्रथम महायुद्ध से लेकर 1971  की भारत-पाक जंग व अन्य अवसरों पर सैदपुर के फौजियों ने अपनी बहादुरी दिखाई है और गांव के कई जवान शहीद हुए हैं।

_____

गुलावठी का प्राचीन शिव मंदिर जो बड़ा मंदिर के नाम से विख्यात है।

इस शिव मंदिर को किसने और कब बनवाया यह निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता लेकिन यहां के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। मंदिर की बाहरी और भीतरी बनावट एवं मंदिर का गुंबद कलात्मक रूप से बनाए गए हैं।

महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु हरिद्वार से पैदल पवित्र गंगाजल लाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं।

प्रत्येक मंगलवार को यहां हनुमान भक्तों की भीड़ लगी रहती है।

चैत्र माह के नवरात्रों पर अष्टमी के दिन यहां देवी का विशाल मेला लगता है।

_____

गुलावठी का शिव –  शनि देव मंदिर प्रसिद्ध है। यहां शनि जयंती व शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा अर्चना करने के लिए सैलाब उमड़ पड़ता है। इस अवसर पर शनि दरबार को भव्यता से सजाया जाता है। भजन संध्या के उपरांत यहां भंडारा का भी आयोजन किया जाता है।

_____

दूध के उत्पादन एवं व्यापार में गुलावठी नगर का नाम देश-विदेश में प्रसिद्ध है।

_____

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *